पैन इंडिया हुईं साउथ की क्षेत्रीय फिल्में, बंपर कमाई ने तोड़ा बॉलीवुड का मिथक, जानिए कौन आगे, कौन पीछे? | bollywood-vs-South-tollywood-become-number-one -pan-india-regional-movies-box-office-collection

पैन इंडिया हुईं साउथ की क्षेत्रीय फिल्में, बंपर कमाई ने तोड़ा बॉलीवुड का मिथक, जानिए कौन आगे, कौन पीछे? | bollywood-vs-South-tollywood-become-number-one -pan-india-regional-movies-box-office-collection पैन इंडिया हुईं साउथ की क्षेत्रीय फिल्में, बंपर कमाई ने तोड़ा बॉलीवुड का मिथक, जानिए कौन आगे, कौन पीछे? | bollywood-vs-South-tollywood-become-number-one -pan-india-regional-movies-box-office-collection


Bollywood Vs South Cinema: एक दौर था जब बॉलीवुड फिल्मों की तूती बोलती थी. दौर बदला हिन्दी फिल्में कंटेट, ट्रीटमेंट और क्रिएटिविटी के मामले में साउथ की क्षेत्रिय फिल्मों के सामने फिसड्डी साबित होने लगी. साल 2025 के अंत में रिलीज हुई निर्देशक आदित्य धर की धुरंधर फ्रेंचाईजी की फिल्मों ने हिंदी सिनेमा की वापसी कराई, बावजूद इसके तेलगु फिल्मों ने इस दौरान भी पैन इंडिया में अपना दबदबा बरकरार रखा है.

तेलगु सिनेमा (टॉलीवुड) पैन इंडिया का आज असली किंग बनकर उभरा है. घरेलू बॉक्स ऑफिस ग्रॉस रेवन्यू में लगभग 20 हिस्सेदारी के साथ देश के सबसे आक्रामक पैन इंडिया इंडस्ट्री बने टॉलीवुड ने सफलता का स्वाद बाहुबली फिल्म से चखा. इस कड़ी में ग्लोबल स्टार राम चरण की ‘पेड्डी’ ने 350 करोड़ रुपए कमाकर एक बार फिर झंडे गाड़ दिए हैं.

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पैन इंडिया बॉक्स ऑफिस हिस्सेदारी 20% के साथ नंबर वन है टॉलीवुड

गौरतलब है टॉलीवुड सिनेमा की लार्जर देन लाइफ सफलता के पीछे उसकी फिल्मों का मास-मसाला एंटरटेनमेंट है. यही कारण है कि पैन इंडिया हिस्सेदारी में उसका नंबर वन है, जिसकी पैन इंडिया बॉक्स ऑफिस में हिस्सेदारी 20 फीसदी है, जबकि बॉलीवुड फिल्मों की पैन इंडिया बॉक्स ऑफिस हिस्सेदारी 38 से 40 फीसदी के बीच है. इसमें निर्देशक आदित्य धर निर्देशित फिल्म धुरंधर-पार्ट-1 और धुरंधर पार्ट-2 का बड़ा योगदान है.

आदित्य धर निर्देशित धुरंधर पार्ट-1 और पार्ट-2 तोड़ कमाई के सारे रिकॉर्ड

रिपोर्ट कहती है कि निर्देशक आदित्य धर की मेगा-एक्शन फिल्म ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी के पार्ट-1 ने 1,400 करोड़ और पार्ट-2 ने ₹1,850 करोड़ से अधिक का ऐतिहासिक कलेक्शन कर बॉलीवुड के स्टारडम का लोहा एक बार फिर मनवाया है. इसमें सनी देओल अभिनीत ‘बॉर्डर 2’ और अक्षय कुमार स्टारर हालिया फिल्म ‘भूत बंगला’ ने भी बड़ी भूमिका निभाई है. 

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हिन्दी सिनेमा इंडस्ट्री यानी बॉलीवुड शायद यह भूल गया कि दर्शक आज भी जड़ों से जुड़ी कहानियां देखना चाहता है. ऋषभ शेट्टी निर्देशित और अभिनीत फिल्म ‘कांतारा’ फ्रेंचाइजी की फिल्में इसका बड़ा उदाहरण है, जो विशुद्ध कन्नड़ संस्कृति पर आधारित फिल्म थी, जिसे हिंदी बेल्ट में भारी संख्या में दर्शक मिले और फिल्म हिंदी बेल्ट में भी ब्लॉकबस्टर हो गई. 

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लगभग 15 से 16 फीसदी पैन इंडिया हिस्सेदारी के साथ स्थिर है तमिल सिनेमा

क्षेत्रिय फिल्मों में कॉलीवुड यानी तमिल सिनेमा पैन-इंडिया मार्केट टॉलीवुड की तुलना में थोड़ा धीमा है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 15 से 16 फीसदी पर स्थिर है. तमिल सिनेमा की सफलता का पूरा श्रेय सुपर स्टार रजनीकांत (‘कूली’), थलपति विजय की (‘गोट’) और सूर्या (‘करुप्पु’) का दिया जा सकता है. तीनों फिल्मों ने करीब 304 करोड़ कमाई की. तमिल सिनेमा के धीमी रफ्तार के पीछे की उसकी सिनेमा स्थानीय राजनीति का प्रभाव माना जाता है. 

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9 से 10 फीसदी पहुंच गई मॉलिवुड की पैन इंडिया बॉक्स ऑफिस हिस्सेदारी

तमिल सिनेमा की तुलना में मलयालम सिनेमा (मॉलिवुड) की पैन इंडिया कमाई ‘सरप्राइज करती है, जिसकी हिस्सेदारी चौंकाती है. मॉलिवुड की पैन इंडिया बॉक्स ऑफिस हिस्सेदारी 9 से 10 फीसदी पहुंच गई है. इसमें बड़ा योगदान साल 2018 में रिलीज हुई ‘मंजुम्मेल बॉयज’ और हालिया रिलीज ‘दृश्यम 3’ का है, जिसने बेहतरीन ‘कंटेंट और स्क्रीनप्ले’ के दम पर पूरे देश से पैसा कमाया. मलयाली फिल्मों का डब भी खूब पसंद किया जाता है.

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सस्ते इंटरनेट और नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो और हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने दर्शकों को घर बैठे क्षेत्रीय फिल्में देखने की सुविधा दी, जिससे साउथ फिल्मों के सुपर स्टार अभिनेता अल्लू अर्जुन, राम चरण और जूनियर एनटीआर उत्तर भारत के घर-घर पहुंच गए. बॉलीवुड तकनीक, एक्शन, कोरियोग्राफी और VFX के मामले में भी साउथ से पिछड़ गईं.

लार्जर-देन-लाइफ और ओरिजिनल कंटेंट से साउथ फिल्मों को मिले पैन इंडिया दर्शक

साउथ के सुपर स्टार निर्देशकों में शुमार एस.एस. राजामौली, सुकुमार, प्रशांत नील ने हिंदी भाषी दर्शकों को खूब प्रभावित किया. एस एस राजामौली कि ‘बाहुबली’ फ्रेंचाइजी, ‘केजीएफ’ फ्रेंचाइजी और ‘पुष्पा’ फ्रेचाइजी की ओरिजनल कहानी, भव्य और लार्जर-देन-लाइफ सिनेमा को उभारने में बड़ी भूमिका निभाई. जबकि इस दौरान बॉलीवुड का एक बड़ा हिस्सा रीमेक और घिसी-पिटी मसाला फिल्मों तक सिमटा रहा है, जिसके चलते हिंदी भाषी दर्शक साउथ फिल्मों की ओर मुड़ गए. 

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