फंस गया पेच! ईरान के इनकार के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति का पाकिस्तान दौरा रद्द, एक दूसरे पर फोड़ा ठीकरा

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ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की डेडलाइन खत्म होने से पहले बातचीत बनती नहीं दिख रही है. एक तरफ अमेरिका कह रहा है कि वो शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद जाने को तैयार है, वहीं ईरान लगातार इससे मुकर रहा है. पाकिस्तान ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी स्पीकर कलीबाफ बुधवार को इस्लामाबाद पहुंचेंगे. लेकिन ईरान ने इससे इनकार कर दिया है. ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार कोई ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद पहुंचने से इनकार किया है. इधर ईरान की तरफ से कोई जवाब न दिए जाने पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा फिलहाल टाल दी गई है.

जेडी वेंस का इस्लामाबाद दौरा टला

व्हाइट हाउस ने पुष्टि की थी कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे. ईरान के साथ बातचीत करने के लिए यही प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद जाने वाला था. पाकिस्तान ने भी कहा था कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी स्पीकर कलीबाफ बुधवार को इस्लामाबाद पहुंचेंगे. लेकिन अब वेंस का इस्लामाबाद दौरा स्थगित हो गया है. अमेरिकी मीडिया के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान द्वारा अमेरिकी रुख पर कोई जवाब न दिए जाने के बाद, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा फिलहाल टाल दी गई है. 

ईरान बातचीत के लिए राजी नहीं

ईरानी सरकारी टीवी ने किसी भी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद पहुंचने से इनकार किया है. जो तेहरान के भीतर चल रहे मतभेद को भी दर्शाता है. तेहरान अभी ‘वेट एंड वॉच’ नीति पर काम कर रहा है.  ईरान ने कहा कि उसने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वह अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करेगा या नहीं. ऐसे में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता असमंजस की स्थिति में लग रही है क्योंकि तेहरान ने पाकिस्तान में होने वाली बातचीत में शामिल होने को लेकर हिचकिचाहट दिखाई है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कड़ा रुख अपना लिया है. इससे आगामी संघर्ष विराम की समय सीमा से पहले किसी समझौते को लेकर नए संदेह पैदा हो गए हैं.

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दौर, जिसके इस्लामाबाद में होने की उम्मीद थी, अब अनिश्चित हो गया है. ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अमेरिका की ओर से ईरान के झंडे वाले एक जहाज को जब्त किए जाने के बाद वे इस बातचीत में शामिल नहीं हो सकते हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अब तक, हमने बातचीत के अगले दौर के बारे में कोई फैसला नहीं किया है.

सीजफायर खत्म होने से पहले बढ़ गई टेंशन

यह बातचीत ऐसे समय में होने वाली थी जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का संघर्ष-विराम खत्म होने वाला है. इससे दोनों पक्षों पर किसी समझौते पर पहुंचने का दबाव बढ़ गया है, वरना उन्हें फिर से दुश्मनी शुरू होने का जोखिम उठाना पड़ सकता है. सीएनएन के अनुसार, इस अनिश्चितता को और बढ़ाते हुए, ट्रंप के सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट ने इस नाजुक बातचीत को और भी पेचीदा बना दिया है.

दोनों पक्ष सात हफ्ते से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए किसी समझौते के काफी करीब लग रहे थे. लेकिन ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि ईरान कुछ अहम शर्तों पर सहमत हो गया है, जबकि अधिकारियों का कहना था कि उन शर्तों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया था.

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ईरानी अधिकारियों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इन दावों को खारिज कर दिया और इस बात पर संदेह जताया कि क्या बातचीत का अगला दौर आगे बढ़ पाएगा? बातचीत से परिचित एक व्यक्ति ने सीएनएन को बताया कि ईरानियों को यह बात पसंद नहीं आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति सोशल मीडिया के जरिए बातचीत कर रहे थे और ऐसा दिखा रहे थे जैसे उन्होंने उन मुद्दों पर सहमति दे दी हो जिन पर वे अभी तक सहमत नहीं हुए थे. बदलती समय-सीमाओं और अमेरिका से मिलने वाले मिले-जुले संकेतों ने इस भ्रम को और भी बढ़ा दिया है. ट्रंप कभी यह संकेत देते हैं कि समझौता बस होने ही वाला है, तो कभी चेतावनी देते हैं कि अगर बातचीत विफल रही तो फिर से सैन्य कार्रवाई की जाएगी.

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ट्रंप ने दी ईरान को धमकी

वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ट्रंप के बुधवार के बाद संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की संभावना कम है, जिससे कूटनीतिक प्रयासों में और भी तेजी आ गई है. रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तों पर सहमत नहीं होता है, तो उसे पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे अहम बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने वाले हमलों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, ईरान ने जोर देकर कहा है कि वह दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा. ईरान की संसद के स्पीकर और एक अहम वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने कहा कि तेहरान ‘धमकियों के साये में’ बातचीत स्वीकार नहीं करेगा.

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