मुजफ्फरपुर में अग्निकांड के बाद बड़ी कार्रवाई, प्रसाद हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन किया सस्पेंड

मुजफ्फरपुर में अग्निकांड के बाद बड़ी कार्रवाई, प्रसाद हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन किया सस्पेंड मुजफ्फरपुर में अग्निकांड के बाद बड़ी कार्रवाई, प्रसाद हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन किया सस्पेंड

Muzaffarpur Prasad Hospital Licensed Cancelled: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में गुरुवार को नामी प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू (ICU) में हुए भीषण हादसे के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अस्पताल पर कार्रवाई करते हुए प्रसाद हॉस्पिटल ( Prasad Hospital) का निबंधन (Registration) तत्काल प्रभाव से निलंबित( Suspend) कर दिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार  ने जारी किया है. इस दर्दनाक हादसे में अब तक 6 गंभीर मरीजों की मौत हो चुकी है.

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पड़ी भारी

अस्पताल प्रबंधन के जरिए सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना अस्पताल प्रबंधन को महंगा पड़ा. 4 जून को प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में लगी आग के तुरंत बाद जिला प्रशासन के जरिए एक उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया गया था. घटना के बाद गठित जांच टीम ने शुरुआती रिपोर्ट में अस्पताल की कई बड़ी और गंभीर लापरवाही सामने आई हैं. जांच में यह साफ हुआ है कि इतने बड़े अस्पताल में सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखा गया था.

सिविल सर्जन ने 7 दिनों में मांगा जवाब

हादसे की भयावहता और जांच रिपोर्ट के आधार पर मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन  डॉ अजय कुमार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. उन्होंने अस्पताल के निबंधन को सस्पेंड करने के साथ-साथ प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है. सिविल सर्जन द्वारा दिए गए निर्देश के मुताबिक, प्रसाद हॉस्पिटल प्रबंधन को अगले सात दिनों के भीतर हादसे से जुड़े सभी आवश्यक अभिलेख, दस्तावेज और साक्ष्य विभाग के समक्ष उपलब्ध कराने होंगे.

क्या था मामला

बता दें कि घटना के कुछ ही घंटों बाद ही पुलिस ने अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. साथ ही अस्पताल के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया था. फिलहाल तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं. घटना गुरुवार को मुजफ्फरपुर के  ब्रह्मपुर क्षेत्र में स्थित प्रसाद हॉस्पिटल की थी, जिसके 5वें फ्लोर पर आईसीयू में आग लग गई थी. आईसीयू में 20 से 25 मरीज भर्ती थे. अचानक शार्ट सर्किट के कारण 6 लोगों की मौत हो गई थी. जबकि कई ऐसे मरीज थे, जिनको अलग-अलग अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. 

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