नई दिल्ली:
प्रवर्तन निदेशालय ने ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले साइबर फ्रॉड नेटवर्क का फंडाफोड़ किया है. ईडी के कोलकाता जोनल ऑफिस ने मुंबई, ठाणे, बेंगलुरु और गुरुग्राम में 8 ठिकानों पर छापेमारी की. 1 जून 2026 और 4 जून 2026 को ये एक्शन मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत हुआ. ED की टीम ने इस दौरान कई कंपनियों और उनसे जुड़े परिसरों की तलाशी भी ली, इनमें Payx Digital Payment Pvt. Ltd., Smoothpe Digital Pvt. Ltd., Kinsen Business Solution Pvt. Ltd., Safexpay Technologies Pvt. Ltd. (अब Touras Tech Global Pvt. Ltd.), Gyan Kuber Ltd. और Decentro Tech Pvt. Ltd. शामिल हैं.
अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद
ईडी को तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं, जिनकी जांच हो रही है. इसके अलावा129 बैंक खातों को फ्रीज भी किया गया है, जिनमें करीब 18.4 करोड़ रुपये की रकम जमा थी. जांच के दौरान कुछ लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं. ED ने यह जांच पश्चिम बंगाल के बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की थी. इन मामलों में ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों को ठगने का आरोप लगाया गया था. जांच में पचा चला है कि साइबर ठग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए लोगों को अपने झांसे में लेते थे. Stock Frontline C4 और Vanguard C7 जैसे ग्रुपों के जरिए निवेश कर मोटी रकम का लालच देते थे.
निवेश के नाम पर करोड़ों ठगे
लोगों को CHC-SES, ALICE, ESCORTS जैसे ऐप्स के जरिए IPO और शेयर बाजार में निवेश करने का झांसा दिया गया. पीड़ितों को बताया गया कि उनको बहुत ज्यादा रिटर्न मिलेगा. शुरुआत में निवेशकों को भारी मुनाफा भी दिखाया गया, जिससे उनको भरोसा हो सके. लेकिन जब निवेशक अपना पैसा निकालने की कोशिश करते थे तो उनसे टैक्स, फीस या अन्य कारण बताकर और पैसे जमा करवाए जाते थे.
इस तरह कई लोग ठगी का शिकार हो गए और उनकी मेहनत की कमाई साइबर अपराधियों के हाथों चली गई. ED जांच में पता चला कि साइबर फ्रॉड से हासिल की गई रकम को सीधे इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि उसे छिपाने के लिए कई स्तरों पर घुमाया गया.
चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिए घुमाया पैसा
जांच एजेंसी के मुताबिक, ठगी की रकम को फर्जी या म्यूल बैंक खातों, चैरिटेबल ट्रस्ट के खातों और पेमेंट गेटवे कंपनियों के जरिए आगे भेजा गया. इसके बाद कई कंपनियों और खातों के बीच लेनदेन कर पैसे की असली पहचान छिपाने की कोशिश की गई. लेनदेन के पैटर्न से पता चला कि कई संदिग्ध खातों से पैसा आया, फिर उसे अलग-अलग संस्थाओं के जरिए घुमाया गया और पेमेंट गेटवे कंपनियों के माध्यम से ट्रांसफर किया गया.
रकम को वैध दिखाने और मनी लॉन्ड्रिंग करने की कोशिश
जांच में कई कंपनियों के बीच कॉमन डायरेक्टर, एक जैसे बिजनेस एड्रेस, आपसी वित्तीय कनेक्शन और पैसों के ट्रांसफर के सबूत मिले हैं. ED का कहना है कि इन गतिविधियों के जरिए साइबर फ्रॉड से कमाए गए पैसों को वैध दिखाने और मनी लॉन्ड्रिंग करने की कोशिश की गई. फिलहाल ED जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है. मामले में आगे की कार्रवाई और जांच जारी है.
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