यूरोप में भी गर्मी से हाहाकार, फ्रांस में 1000 लोगों की मौत; ब्रिटेन, जर्मनी जैसे देश भी तप रहे | Europe heatwave news 1,000 deaths in France countries like Britain and Germany also heating

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फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने रविवार को बताया कि पिछले हफ्ते रिकॉर्ड तोड़ने वाली भीषण गर्मी के दौरान देश में लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतें हुईं. वहीं, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख ने चेतावनी दी कि यूरोप अब सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन गया है और उसे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए और कदम उठाने की जरूरत है. वीकेंड पर कई देशों में तापमान के पुराने रिकॉर्ड टूट गए, जर्मनी में जंगल की आग लग गई और बर्लिन पुलिस ने भीड़ को ठंडा करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया.

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इस बीच, गर्मी की लहर धीरे-धीरे महाद्वीप के पूर्वी हिस्सों की ओर बढ़ने लगी. पोलैंड की सीमा के पास नाइसेमुंडे (Neißemünde) में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस (107 डिग्री फ़ारेनहाइट) तक पहुंच गया, जो जर्मनी में लगातार तीसरे दिन एक नया रिकॉर्ड था. यहां इससे पहले का सबसे ज्यादा तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस (104.9 डिग्री फ़ारेनहाइट) था. चेक गणराज्य में भी अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां तापमान 41.1 डिग्री सेल्सियस (106.4 डिग्री फ़ारेनहाइट) तक पहुंच गया.

50 साल पहले ऐसा सोचना नामूमकिन था

यूरोप के वैज्ञानिकों के एक ग्रुप, ‘वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन’ की एक नई स्टडी में शुक्रवार को बताया गया कि पिछले हफ्ते यूरोप में पड़ी रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी और उमस, क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) के बिना संभव नहीं होती. एक तेजी से की गई स्टडी में पाया गया कि इतनी गर्मी का होना सिर्फ 50 साल पहले लगभग नामुमकिन था, और आज इसके होने की संभावना 20 साल पहले की तुलना में 200 गुना ज्यादा है.

पब्लिक हेल्थ फ्रांस के अनुसार, बुधवार को, जब फ्रांसस में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ रही थी, तब 1,200 से ज्यादा मौतें हुईं; और उसके बाद के दो दिनों में हर दिन मौतों की संख्या बढ़कर 1,400 से ज्यादा हो गई. अप्रैल और मई में, यानी हीटवेव से पहले, फ्रांस में रोजाना मौतों की दर लगभग 900 से 1,000 थी. एजेंसी ने निष्कर्ष निकाला कि उन तीन दिनों में ही फ्रांस में कम से कम 1,000 अतिरिक्त मौतें हुईं. एजेंसी ने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे और डेटा इकट्ठा होगा – जिसमें घरों में हुई मौतें भी शामिल हैं – यह अनुमान बढ़ सकता है.

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WHO के महानिदेशक टेड्रोस अदानोम घेब्रेयेसस ने रविवार को ‘X’ पर कहा, “यूरोप पृथ्वी पर सबसे तेज़ी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जो वैश्विक औसत से दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है. अभी 150 मिलियन लोग अत्यधिक गर्मी का सामना कर रहे हैं, सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, स्कूल बंद हैं और बिजली ग्रिड पर भारी दबाव है.” टेड्रोस ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से, “पीढ़ी में एक बार” आने वाली हीटवेव (भीषण गर्मी का दौर) अब लगभग हर साल आ रही है. उन्होंने यह भी बताया कि 21 जून के बाद से यूरोप में ज्यादा तापमान की वजह से 1,300 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं.

यूरोप एक्शन प्लान लागू करे: WHO

टेड्रोस ने चेतावनी देते हुए कहा, “हीट स्ट्रेस (गर्मी का तनाव) को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है — और यूरोप के घर, दफ्तर और स्कूल ऐसे तापमान के हिसाब से नहीं बने हैं.” उन्होंने यूरोपीय देशों से एक्शन प्लान लागू करने की अपील की. ​​उन्होंने कहा कि उन्हें तैयारी, बचाव और मजबूत हेल्थ सिस्टम रिस्पॉन्स पर ध्यान देना चाहिए.

ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड दोनों जगहों पर जून महीने के तापमान ने नया रिकॉर्ड बनाया. पूर्वी इंग्लैंड में तापमान 37.3°C और बेसल में 38.8°C तक पहुंच गया. लंदन एम्बुलेंस सर्विस ने कहा कि बुधवार को पड़ी भीषण गर्मी के कारण एक ही दिन में जानलेवा इमरजेंसी कॉल की संख्या सबसे ज्यादा रही.

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स्वीडन की TT समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, देश के एक एम्यूजमेंट पार्क में बिजली गिरने से कई लोग घायल हो गए. देश के दक्षिण में टोमेलिला के टोसेलिल्ला सोमरलैंड पार्क में बिजली गिरने के बाद तीन वयस्कों को अस्पताल ले जाया गया; इनमें एक महिला भी शामिल थी जिसे गंभीर चोटें आई थीं. पूरे यूरोप में भीषण गर्मी के बाद जबरदस्त आंधी-तूफान का दौर देखा गया है.

जर्मनी का हाल भी बेहाल

पब्लिक ब्रॉडकास्टर DR के अनुसार, डेनमार्क में शनिवार को तापमान के नए रिकॉर्ड बने और रविवार सुबह तक बिजली गिरने की 1,156 घटनाएं दर्ज की गईं. पूर्वी जर्मनी के गोहरिशहाइड (Gohrischheide) में एक बड़े जंगल में आग लग गई. यह इलाका अभी भी दूसरे विश्व युद्ध के समय के गोला-बारूद से दूषित है, जिससे आग बुझाने वालों का काम और भी मुश्किल हो गया. इसी तरह, दक्षिण-पश्चिम जर्मनी में ट्राइसेन (Traisen) गांव के पास आग बुझाने का एक बड़ा अभियान चल रहा था. वहां गर्मी की वजह से जंगल में आग लग गई और उस इलाके में बिना फटे गोला-बारूद भी मौजूद थे. जर्मन समाचार एजेंसी dpa की रिपोर्ट के मुताबिक, धमाके होने के बाद आग बुझाने का काम कुछ समय के लिए रोकना पड़ा और स्थिति का लगातार जायजा लेने के लिए गोला-बारूद हटाने वाली यूनिट को बुलाया गया. आग के लगातार फैलने की वजह से रविवार दोपहर ट्राइसेन में करीब 650 लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा.

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