राज्यसभा चुनाव: तरुण चुघ को टिकट, रवनीत बिट्टू को इंतजार; जानें पंजाब में BJP के स‍ियासी उलटफेर के मायने

राज्यसभा चुनाव: तरुण चुघ को टिकट, रवनीत बिट्टू को इंतजार; जानें पंजाब में BJP के स‍ियासी उलटफेर के मायने राज्यसभा चुनाव: तरुण चुघ को टिकट, रवनीत बिट्टू को इंतजार; जानें पंजाब में BJP के स‍ियासी उलटफेर के मायने

राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 4 जून की शाम को 11 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. बीजेपी की इस सूची में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का नाम शामिल न होना पंजाब की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है. बिट्टू फिलहाल राज्यसभा सदस्य और केंद्र सरकार में रेल राज्य मंत्री हैं. उनका कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है.

रवनीत सिंह बिट्टू को टिकट नहीं म‍िलने के मायने

पंजाब बीजेपी के वरिष्ठ नेता तरुण चुघ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को पार्टी के संगठनात्मक समीकरणों और भविष्य की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. दूसरी ओर, रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा का टिकट न मिलने पर सियासी गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी मंत्रिपरिषद से छुट्टी हो सकती है.

दो साल पहले भाजपा ज्‍वाइन की 

लुधियाना के रहने वाले 50 वर्षीय रवनीत सिंह बिट्टू साल 2024 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. वह पिछले कुछ समय से पंजाब में पार्टी के प्रमुख सिख चेहरों में गिने जा रहे थे. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते बिट्टू को पंजाब में बीजेपी के विस्तार की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा था. यही कारण था कि राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए भी संभावित उम्मीदवारों में उनका नाम सबसे आगे चल रहा था.

रवनीत सिंह बिट्टू की राजनीतिक अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2025 में पंजाब में बाढ़ राहत कार्यों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिखाई देने वाले वह राज्य के एकमात्र प्रमुख नेता थे. इससे बीजेपी और मोदी सरकार दोनों में उनकी बढ़ती स्वीकार्यता का संदेश गया था.

अमृतसर के तरुण चुघ पर जताया भरोसा

बीजेपी नेतृत्व ने फिलहाल उन्हें राज्यसभा की दौड़ से बाहर रखते हुए अमृतसर के रहने वाले तरुण चुघ पर भरोसा जताया है. चुघ लंबे समय से पार्टी संगठन का महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी रणनीतिक भूमिका को काफी महत्व दिया जाता है. उनकी उम्मीदवारी यह संकेत देती है कि बीजेपी पंजाब में चुनावी विस्तार के साथ-साथ संगठनात्मक मजबूती को भी प्राथमिकता दे रही है.

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जारी है कि बिट्टू को किसी अन्य राज्य से राज्यसभा भेजा जा सकता है. वहीं, पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अटकलें बनी हुई हैं. आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी के ये फैसले स्पष्ट संकेत देते हैं कि पार्टी पंजाब में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण गढ़ने की तैयारी में जुटी है.

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