शादी के बाद Ex से एक बार मिलना गुनाह नहीं… पर पत्नी की इस बड़ी गलती पर कोर्ट ने मंजूर किया तलाक

शादी के बाद Ex से एक बार मिलना गुनाह नहीं... पर पत्नी की इस बड़ी गलती पर कोर्ट ने मंजूर किया तलाक शादी के बाद Ex से एक बार मिलना गुनाह नहीं... पर पत्नी की इस बड़ी गलती पर कोर्ट ने मंजूर किया तलाक

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में ‘व्यभिचार’ और ‘मानसिक क्रूरता’ की सीमाएं तय की हैं. हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था अगर कोई पत्नी अपने पुराने पार्टनर से अकेले में एक बार मिलती है, तो इसे व्यभिचार (adultery) नहीं माना जा सकता. हालांकि अदालत ने पत्नी द्वारा ससुर पर लगाए गए चरित्रहीनता के आरोपों को गंभीर मानते हुए इसे मानसिक क्रूरता माना और शादी को भंग करने का आदेश बरकरार रखा. कोर्ट ने कहा कि पति या पत्नी और उनके परिवार वालों पर झूठे और बिना सोचे-समझे आरोप लगाना मानसिक क्रूरता मानी जाएगी, जिसके आधार पर तलाक दिया जा सकता है.

‘एक बार पुराने साथी से मिलना व्यभिचार नहीं’

जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमार ने कहा, ‘ट्रायल कोर्ट ने यह भी पाया कि पत्नी का अकेले में दूसरे व्यक्ति से मिलना सिर्फ एक घटना थी. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि वह उस व्यक्ति के साथ व्यभिचार कर रही है. साथ ही, शादी से पहले उस व्यक्ति के साथ उसके जो भी संबंध थे, उन्हें भी पति के लिए व्यभिचार का अपराध नहीं माना जा सकता. ट्रायल कोर्ट ने पत्नी की क्रूरता के आधार पर दोनों पक्षों के बीच शादी को सही फैसले के तहत रद्द कर दिया.’

क्या है मामला?

महिला की शादी 16 नवंबर 2021 को हुई थी. दोनों को इस शादी से कोई बच्चा नहीं है. भारतीय नौसेना में तैनात पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी थी. उनका आरोप है कि पत्नी झगड़ालू स्वभाव की है, वह शादी से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभात और अक्सर अपने मोबाइल फोन पर अनजान लोगों से बात करती रहती है. उसने आगे आरोप लगाया कि शादी से पहले भी उसका किसी दूसरे आदमी के साथ संबंध था और 11 जनवरी 2023 को वह उस आदमी के साथ आपत्तिजनक हालत में पाई गई थी.

पत्नी ने इन सभी आरोपों से इनकार किया और बदले में पति और उसके परिवार वालों पर दहेज मांगने का आरोप लगाया. उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके ससुर ने उसके साथ गलत व्यवहार किया था.

दहेज के आरोपों को माना गलत

फैमिली कोर्ट ने पाया कि पत्नी के आरोप आपस में मेल नहीं खाते और उनके समर्थन में कोई सबूत भी नहीं है. कोर्ट ने कहा कि वह दहेज की कथित मांगों के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दे पाई. साथ ही, क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान उसने यह भी मान लिया कि दहेज में कोई मोटरसाइकिल नहीं दी गई थी, जबकि उसने अपनी अर्जी में इसके विपरीत बात कही थी.  कोर्ट ने ससुर पर लगाए गए उसके आरोपों को भी अविश्वसनीय पाया, खासकर तब जब उसने खुद यह माना था कि उसके ससुर ही उसे कॉलेज छोड़ने जाते थे. यह मानते हुए कि इस तरह के झूठे आरोप क्रूरता की श्रेणी में आते हैं, फैमिली कोर्ट ने तलाक का आदेश जारी कर दिया.

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