सैलानियों से क्यों चिढ़ रहे हैं थाईलैंड के लोग, सरकार ने वीजा नियमों में शिकंजा कसने का लिया फैसला

सैलानियों से क्यों चिढ़ रहे हैं थाईलैंड के लोग, सरकार ने वीजा नियमों में शिकंजा कसने का लिया फैसला सैलानियों से क्यों चिढ़ रहे हैं थाईलैंड के लोग, सरकार ने वीजा नियमों में शिकंजा कसने का लिया फैसला

थाईलैंड की पहचान हमेशा से उसकी बेमिसाल मेहमाननवाजी और ‘लैंड ऑफ स्माइल्स’ के तौर पर रही है. इस देश के निवासी अपनी मुस्कान और आवभगत के लिए जाने जाते हैं. लेकिन अब थाईलैंड की मुस्कुराहट के पीछे नाराजगी छिपी है. यह देश अब बदतमीज और कानून तोड़ने वाले सैलानियों से आजिज आ चुका है. बैंकॉक की शोर-शराबे वाली गलियों से लेकर पटाया के समुद्री किनारों तक, स्थानीय लोगों का सब्र अब जवाब दे रहा है. इसी के मद्देनजर थाईलैंड की सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है.

सरकार ने वीजा नियमों को कड़ा करने का फैसला किया है. अब थाईलैंड को सिर्फ पार्टी डेस्टिनेशन समझने वाले पर्यटकों के लिए राह आसान नहीं रहने वाली है. बैंकॉक की मशहूर खाओसान रोड बैकपैकर्स का गढ़ मानी जाती है.

इस जगह पर गांजे के धुएं की महक आम बात है. लेकिन अब माहौल बदल रहा है. थाईलैंड ने 90 से अधिक देशों के लिए वीजा-मुक्त रहने की अवधि को 60 दिनों से घटाकर 30 दिन करने का फैसला किया है. यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो थाईलैंड को अपनी जागीर समझने लगे थे.

पर्यटकों की बदतमीजी ने बढ़ाया गुस्सा

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, थाईलैंड के लोगों में बढ़ते गुस्से की सबसे बड़ी वजह पर्यटकों का खराब व्यवहार है. सोशल मीडिया पर आए दिन ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें विदेशी पर्यटक रेस्तरां का बिल देने से मना कर रहे हैं, सड़कों पर मारपीट कर रहे हैं या सार्वजनिक वाहनों में अश्लील हरकतें करते पकड़े जा रहे हैं. हद तो तब हो गई जब एक पर्यटक ने स्थानीय वेंडर के साथ बदसलूकी की और इसका वीडियो भी सामने आया.

‘नियमों के घेरे में रहें पर्यटक’

थाईलैंड के गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि किसी भी विदेशी को यहां के स्थानीय लोगों को परेशान करने या थाई संस्कृति और नैतिकता के खिलाफ जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. सरकार का कहना है कि जो विदेशी खुद को रसूखदार समझकर अवैध गतिविधियों में शामिल होते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

हालांकि, यह सरकार के लिए एक संतुलन बनाने जैसा है. थाईलैंड की अर्थव्यवस्था का लगभग 20% हिस्सा पर्यटन से आता है. लग्जरी होटलों से लेकर छोटे टैक्सी ड्राइवरों तक, लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर्यटकों पर टिकी है. इसके बावजूद, सरकार अब सुरक्षा और मर्यादा को आर्थिक लाभ से ऊपर रख रही है.

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