12 ज्योतिर्लिंग यात्रा की शुरुआत कहां से करें? ट्रैवल रूट के हिसाब से पहला स्टॉप | Travel plan for 12 Jyotirlinga | Kaun se Jyotirlinga par pahle jaye

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Travel Plan For Jyotirlingas: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में गिने जाते हैं. मान्यता है कि इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और भक्तों पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है. हालांकि देश के अलग-अलग राज्यों में फैले इन 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा की योजना बनाना कई श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है. यात्रा को आसान बनाने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपने क्षेत्र के अनुसार सही रूट और पहला पड़ाव चुनें. इससे समय, खर्च और यात्रा की दूरी तीनों कम हो सकती हैं.

उत्तर भारत से यात्रा शुरू करने वालों के लिए पहला पड़ाव- (Travel Plan For North Indians)

उत्तर भारत के श्रद्धालुओं के लिए यात्रा की शुरुआत उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम से करना सबसे बेहतर माना जाता है. इसके बाद उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ, झारखंड के देवघर में स्थित बैद्यनाथ एवं मध्य प्रदेश के दो ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर की यात्रा की जा सकती है. यात्रा के अगले चरण में महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर और घृष्णेश्वर, फिर गुजरात के सोमनाथ और नागेश्वर तथा अंत में दक्षिण भारत के मल्लिकार्जुन और रामेश्वरम के दर्शन किए जा सकते हैं.

 कहां से करें ज्योतिर्लिंग यात्रा की शुरूआत? (Image NDTV)

दक्षिण भारत से यात्रा की शुरुआत कहां से करें? (Travel Plan For South Indians)

दक्षिण भारत के श्रद्धालु अपनी ज्योतिर्लिंग यात्रा तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित रामनाथस्वामी मंदिर से शुरू कर सकते हैं. फिर आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन करना सुविधाजनक रहता है. इसके बाद महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर भारत के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए जा सकते हैं. 

पश्चिम भारत के श्रद्धालु कहां से शुरूआत करें?(Travel Plan For Western India)

गुजरात और महाराष्ट्र के श्रद्धालु द्वारका स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से शुरूआत कर सकते हैं. हालांकि, इस दौरान गुजरात और महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं अपनी सुविधा के अनुसार पहला पड़ाव चुनने की सलाह दी जाती है. इसके बाद सोमनाथ, त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर, घृष्णेश्वर, ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर के दर्शन किए जा सकते हैं. अंत में यात्रा उत्तर भारत के केदारनाथ, काशी विश्वनाथ और बैद्यनाथ होते हुए दक्षिण भारत के मल्लिकार्जुन और रामेश्वरम तक पहुंच सकती है. 

पूर्वी भारत से शुरू करें तो कहां जाएं? (Travel Plan For Eastern India)

पूर्वी भारत के श्रद्धालुओं के लिए देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम सबसे बेहतर पहला पड़ाव माना जाता है. इसके बाद वाराणसी का काशी विश्वनाथ और उत्तराखंड का केदारनाथ धाम यात्रा में शामिल किया जा सकता है. फिर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के ज्योतिर्लिंगों को कवर करना यात्रा को आसान बनाता है.

केदारनाथ यात्रा से जुड़ी जरूरी बात- (Important Information Regarding The Kedarnath Yatra)

अगर आप उत्तर भारत से यात्रा शुरू कर रहे हैं और पहला पड़ाव केदारनाथ रखना चाहते हैं, तो यात्रा की योजना पहले से बनाना जरूरी है. केदारनाथ मंदिर के कपाट हर साल कुछ ही समय के लिए खुलते हैं, जो आमतौर पर अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत से अक्टूबर-नवंबर तक खुले रहते हैं. इसलिए ज्योतिर्लिंग यात्रा का पूरा कार्यक्रम केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के समय को ध्यान में रखकर बनाना चाहिए.

इन शहरों से मिलती है बेहतर कनेक्टिविटी- (How To Travel)

ज्योतिर्लिंग यात्रा के लिए देश के कई बड़े शहरों से अच्छी रेल और सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध है. उत्तर भारत में दिल्ली, लखनऊ और देहरादून, दक्षिण भारत में चेन्नई, बेंगलुरु और मदुरै, पश्चिम भारत में मुंबई, अहमदाबाद और सूरत तथा पूर्वी भारत में पटना, रांची और कोलकाता प्रमुख केंद्र हैं.

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