आदि कैलाश यात्रा 2026: रजिस्ट्रेशन, रूट मैप, जरूरी दस्तावेज और नियमों की पूरी जानकारी; जाने से पहले जरूर पढ़ें

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Adi Kailash Yatra 2026: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से आस्था का सबसे पवित्र सफर एक बार फिर शुरू होने जा रहा है. आगामी 1 मई 2026 से आदि कैलाश यात्रा का विधिवत शुभारंभ होगा, जिसके लिए 28 अप्रैल से पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है. श्रद्धालु पिथौरागढ़ जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट या उत्तराखंड पर्यटन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं. इस यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) अनिवार्य है, जिसे ऑनलाइन या धारचूला में एसडीएम कार्यालय में आवेदन कर प्राप्त किया जा सकता है.

आदि कैलाश और ॐ पर्वत का धार्मिक महत्व

भगवान शिव के धाम के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु इस सीमांत जिले में पहुंचेंगे. प्रशासन भी इस यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है. आदि कैलाश की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 5,945 मीटर (19,505 फीट) है. यह पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और इसे ‘छोटा कैलाश’ के नाम से भी जाना जाता है. आदि कैलाश यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु ‘ॐ पर्वत’ के दर्शन भी करते हैं, जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 6,191 मीटर (20,312 फीट) है. आदि कैलाश और ॐ पर्वत, भारत-तिब्बत-चीन सीमा पर स्थित अत्यंत पवित्र स्थल हैं. 

adi kailash yatra 2026 registration dates travel guide pithoragarh                                    Photo Credit: kishor kumar Rawat

ऐतिहासिक मार्ग और प्रधानमंत्री मोदी का प्रभाव

आदि कैलाश की यात्रा प्रतिवर्ष मई से अक्टूबर तक संचालित होती है. सामरिक दृष्टि से संवेदनशील बॉर्डर एरिया होने के कारण यहाँ इनर लाइन परमिट लेना अनिवार्य है. वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदि कैलाश के दर्शन किए थे, जिसके बाद से इस क्षेत्र में यात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है. अब हर साल आध्यात्मिक दर्शन के साथ-साथ साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) के शौकीन भी यहाँ भारी तादाद में पहुँचते हैं. आदि कैलाश और ॐ पर्वत का यह मार्ग अत्यंत प्राचीन है; यही वह पारंपरिक पैदल रास्ता है जहाँ से लिपुलेख दर्रे के माध्यम से तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर की यात्रा की जाती रही है. हालांकि, कैलाश मानसरोवर जाने के अन्य रास्ते नेपाल और अरुणाचल प्रदेश से भी होकर गुजरते हैं.

पंजीकरण प्रक्रिया और यात्रा का चुनौतीपूर्ण मार्ग

यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण pass.pithoragarh.online पोर्टल पर किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त एसडीएम धारचूला के माध्यम से ऑफलाइन परमिट भी प्राप्त किए जा सकते हैं. आवेदन के लिए आधार कार्ड, फिटनेस सर्टिफिकेट और फोटो आवश्यक दस्तावेज हैं.

आदि कैलाश जाने का मार्ग जितना सुंदर है, उतना ही कठिन और चुनौतीपूर्ण भी है. यात्रा पिथौरागढ़ से शुरू होकर लगभग 100 किलोमीटर दूर धारचूला पहुँचती है. यहाँ से तावघाट, पांगल, मालपा, बूंदी, गरब्यांग, छियालेख और गूंजी का सफर तय करना पड़ता है. धारचूला से गूंजी तक का यह रास्ता महाकाली नदी के किनारे-किनारे होकर गुजरता है, जहाँ एक ओर भारत और दूसरी ओर नेपाल की सीमाएं लगती हैं. गूंजी पहुंचने के बाद मार्ग दो हिस्सों में बंट जाता है:

  • पहला मार्ग: गूंजी से नबी, रोंगकोंग और कुटी होते हुए जोलिंगकोंग पहुंचता है, जहां आदि कैलाश स्थित है.
  • दूसरा मार्ग: गूंजी से कालापानी और नाभीढांग होते हुए ॐ पर्वत और लिपुलेख दर्रे की ओर जाता है. 
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adi kailash yatra 2026 registration dates travel guide pithoragarh Photo Credit: kishor kumar Rawat

स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर सकारात्मक असर

1 मई से शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए अब तक 155 यात्रियों ने आवेदन किया है, जिनमें से लगभग 50 श्रद्धालुओं को इनर लाइन परमिट जारी कर दिए गए हैं. इस यात्रा को लेकर स्थानीय निवासियों में जबरदस्त उत्साह है. गूँजी और आसपास के गांवों में लोगों ने होमस्टे और छोटे होटल विकसित किए हैं. यात्रियों के इन होमस्टे और ढाबों में रुकने और भोजन करने से स्थानीय व्यवसायों को प्रोत्साहन मिल रहा है और सीमांत क्षेत्र की आर्थिकी सुदृढ़ हो रही है.

प्रशासनिक तैयारियां और स्वास्थ्य सुविधाएं

जिलाधिकारी आशीष भटगांई के निर्देशानुसार प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने धारचूला और गूंजी सहित विभिन्न पड़ावों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया है. यात्रियों के ठहरने के लिए टेंट कॉलोनी, विश्राम गृह और अस्थायी शिविर तैयार किए गए हैं. उच्च हिमालयी क्षेत्र की विषम परिस्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है; मार्ग में मेडिकल कैंप, प्राथमिक उपचार केंद्र, ऑक्सीजन सिलेंडर और एम्बुलेंस की तैनाती की गई है. सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस और अर्धसैनिक बलों की गश्त बढ़ा दी गई है.

उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार, आदि कैलाश यात्रा न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सीमांत क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है. होमस्टे और टैक्सी व्यवसाय से जुड़े स्थानीय लोग यात्रियों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं. 

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