ED ने 2025-26 में पांच गुना ज्यादा मनी लॉन्ड्रिंग के मामले दर्ज किए, कुर्की-जब्ती में तोड़ा रिकॉर्ड

ED ने 2025-26 में पांच गुना ज्यादा मनी लॉन्ड्रिंग के मामले दर्ज किए, कुर्की-जब्ती में तोड़ा रिकॉर्ड ED ने 2025-26 में पांच गुना ज्यादा मनी लॉन्ड्रिंग के मामले दर्ज किए, कुर्की-जब्ती में तोड़ा रिकॉर्ड

देश में मनी लॉन्ड्रिंग, बैंक फ्रॉड, पोंजी स्कैम और आर्थिक अपराधों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की भूमिका पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुई है. वित्तीय वर्ष 2025-26 की ताज़ा परफॉर्मेंस रिपोर्ट इस बदलाव को आंकड़ों के जरिए साफ-साफ सामने रखती है. यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों का ब्योरा नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि ED की कार्यशैली, प्राथमिकताएं और रणनीति किस तरह बदल रही हैं. जहां अब जोर सिर्फ छापेमारी या गिरफ्तारी पर नहीं, बल्कि ठोस केस बनाकर सजा दिलाने, संपत्ति जब्त करने पर है.

मनी लॉन्ड्रिंग के 5 गुना ज्यादा केस दर्ज

सबसे बड़ा संकेत केस दर्ज करने के आंकड़ों से मिलता है. साल 2025-26 में ED ने कुल 1080 ECIR यानी मनी लॉन्ड्रिंग के नए मामले दर्ज किए. अगर इसे पिछले दशक के औसत से तुलना करें, तो यह करीब पांच गुना ज्यादा है. पहले जहां हर साल औसतन 200-250 केस दर्ज होते थे, अब यह संख्या हजार के पार पहुंच चुकी है. इसका मतलब साफ है या तो आर्थिक अपराधों की संख्या बढ़ी है, या फिर एजेंसी अब ज्यादा सक्रिय होकर मामलों को पकड़ रही है, या दोनों ही बातें एक साथ हो रही हैं.

तकनीकी जांच को अपग्रेड किया

विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल ट्रांजैक्शन, ऑनलाइन फ्रॉड और शेल कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के तरीके काफी जटिल हुए हैं. ऐसे में ED ने भी अपनी जांच तकनीक को अपग्रेड किया है. डेटा एनालिटिक्स, फाइनेंशियल ट्रेल ट्रैकिंग और इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन के जरिए अब केस ज्यादा तेजी से सामने आ रहे हैं.

81,422 करोड़ की संपत्ति कुर्क

संपत्ति जब्ती के आंकड़े इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा हैं. 2025-26 में ED ने 712 Provisional Attachment Orders जारी करते हुए 81,422 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति अटैच की. यह न सिर्फ पिछले साल के मुकाबले 171 प्रतिशत ज्यादा है, बल्कि अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. यह बढ़ोतरी सिर्फ संख्या की नहीं, बल्कि रणनीति की भी है. अब एजेंसी सीधे प्रोसीड्स ऑफ क्राइम यानी अपराध से अर्जित संपत्ति पर वार कर रही है. इससे आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर पड़ता है और उसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ना भी मुश्किल हो जाता है.

जब्ती में भी बड़ी कार्रवाई 

संपत्ति जब्ती के अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत भी बड़ी कार्रवाई हुई है. PMLA की धारा 8(5) के तहत 68.20 करोड़ रुपये की संपत्ति सजा के आधार पर जब्त की गई, जबकि धारा 8(7) के तहत 15,667 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति उन मामलों में जब्त की गई जहां ट्रायल पूरा नहीं हो सका जैसे आरोपी की मौत हो गई हो या वह भगोड़ा घोषित हो चुका हो. इसके अलावा Fugitive Economic Offenders Act के तहत 2,178 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है.

अब तय समय में जांच पर जोर

जांच और अभियोजन (प्रॉसिक्यूशन) के स्तर पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इस साल 657 चार्जशीट दाखिल हुईं, जो दिखाता है कि ED अब लंबी जांच के पुराने पैटर्न से हटकर टाइम बाउंड इन्वेस्टिगेशन पर काम कर रही है. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि फील्ड यूनिट्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे मामलों की पहचान करें जो ट्रायल के लिए तैयार हैं, ताकि बेवजह की देरी कम हो और केस जल्दी अदालत तक पहुंचे.

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