जिंदगी में मुश्किलें हर किसी के सामने आती हैं, लेकिन कुछ लोग उन्हीं चुनौतियों को अपनी ताकत बना लेते हैं. कोलकाता के सायंतन बनर्जी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. जन्म से नेत्रहीन होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आज वह एक शिक्षक, रेडियो जॉकी और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में लोगों को प्रेरित कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उनकी कहानी अब लाखों लोगों का दिल जीत रही है.
जन्म से नेत्रहीन हैं सायंतन बनर्जी
कोलकाता के रहने वाले सायंतन बनर्जी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. जन्म से नेत्रहीन सायंतन ने अपनी मेहनत और हौसले के दम पर ऐसी पहचान बनाई है, जो आज हजारों लोगों को प्रेरणा दे रही है. डिजिटल क्रिएटर अराधना चटर्जी द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो के वायरल होने के बाद लोग सायंतन की कहानी के बारे में जानने लगे. वीडियो में बताया गया कि सायंतन ने 11वीं कक्षा से अकेले सफर करना शुरू कर दिया था. आज वह बिक्रमगढ़ हाई स्कूल में शिक्षक हैं और पिछले करीब 8 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं.
ब्रेल और ऑडियोबुक्स से पूरी की पढ़ाई
सायंतन ने अपनी पढ़ाई ब्रेल और ऑडियोबुक्स की मदद से पूरी की. इन्हीं साधनों ने उन्हें शिक्षा जारी रखने और अपने करियर को आगे बढ़ाने में मदद की. शिक्षक बनने के अलावा सायंतन ने यूनिवर्सिटी कम्युनिटी रेडियो स्टेशन में रेडियो जॉकी के रूप में भी काम किया है. वह ऑल बंगाल ब्लाइंड टीचर्स एसोसिएशन के सदस्य भी हैं, जहां नेत्रहीन शिक्षकों की समस्याओं को समझने और सुलझाने का काम किया जाता है.
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नेत्रहीन छात्रों की मदद के लिए कर रहे काम
अराधना चटर्जी ने अपने पोस्ट में बताया, कि सायंतन ‘लाइटहाउस रीडर राइटर ग्रुप’ से भी जुड़े हुए हैं. उनका मानना है कि नेत्रहीन लोगों के लिए समाज में अभी भी जागरूकता की कमी है. फिलहाल, वह एक ‘रीडर-राइटर बैंक’ पर काम कर रहे हैं, ताकि नेत्रहीन छात्रों को पढ़ाई में बेहतर मदद मिल सके. पेशेवर जिंदगी के अलावा सायंतन को किताबें पढ़ना और स्विमिंग करना भी पसंद है.
लोगों ने की जमकर तारीफ
सायंतन की कहानी वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स लगातार उनकी तारीफ कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, सच में प्रेरणादायक. दूसरे ने कहा, यह साबित करता है कि विजन के लिए आंखों की नहीं, हौसले की जरूरत होती है. एक अन्य यूजर ने लिखा, सायंतन जैसे लोग दुनिया को बेहतर बनाते हैं. वहीं, एक शिक्षक ने कमेंट किया, एक टीचर होने के नाते मुझे उन पर गर्व महसूस हो रहा है.
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