जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सनशाइन पीक पर 24 पर्यटक अचानक फंस गए. ये सभी पर्यटक एक निजी हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए घूमने निकले थे, लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से हेलीकॉप्टर बीच रास्ते में ही जवाब दे गया. बर्फीली चोटियों और ठंडी हवाओं के बीच फंसे इन सैलानियों के लिए भारतीय सेना के जवान और जिला प्रशासन के लोग देवदूत बनकर पहुंचे. गुलमर्ग के सनसाइन पीक पर फंसे पर्यटकों को सुरक्षित बचा लिया गया है.
पर्यटकों के फंसने की सूचना पर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
जानकारी के मुताबिक, जैसे ही अधिकारियों को हेलीकॉप्टर में खराबी और पर्यटकों के फंसने की सूचना मिली, बिना वक्त गंवाए एक साझा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. इस रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय सेना, बारामूला जिला प्रशासन, गुलमर्ग डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान शामिल थे. सेना के एविएटर्स (विमान चालक) ने सूचना मिलते ही तुरंत रिस्पॉन्स किया.
चुनौतीपूर्ण मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, सेना के जवानों ने अपनी कुशलता का परिचय देते हुए एक-एक कर सभी 24 पर्यटकों को सनशाइन पीक से सुरक्षित बाहर निकाल लिया. भारतीय सेना ने अपने बयान में कहा कि आपातकालीन स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा के लिए वे हमेशा प्रतिबद्ध हैं. उनकी त्वरित कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया कि अंधेरा होने या मौसम बिगड़ने से पहले ही सभी को नीचे लाया जा सके.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुला ने की ऑपरेश की तारीफ
इसी बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि सेना और नागरिक प्रशासन के बीच जो तालमेल दिखा, उसी की वजह से सभी पर्यटकों की सुरक्षित घर वापसी संभव हो पाई. मुख्यमंत्री ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को कड़े निर्देश भी दिए हैं. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ‘सेफ्टी प्रोटोकॉल’ को और मजबूत करने की बात कही है. उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि गुलमर्ग जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में चल रही निजी हेलीकॉप्टर सेवाओं और अन्य पर्यटन गतिविधियों के सुरक्षा तंत्र की दोबारा समीक्षा की जाए.
यह भी पढे़ं-
गोलाबारी में डटे रहे, बिन वर्दी निभाया फर्ज…ऑपरेशन सिंदूर में जान कुर्बान करने वाले अफसर की पत्नी


