Donald Trump- Xi Jinping Meeting in Beijing: दुनिया की राजनीति और कारोबार पर असर डालने वाली एक बेहद बड़ी मुलाकात बीजिंग में शुरू हो गई है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारतीय समयानुसार सुबह 7.30 बजे बीजिंग के भव्य “ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल” में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हाथ मिलाकर स्वागत किया. शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल के अंदर बैठकर अपनी द्विपक्षीय बैठक से पहले उद्घाटन भाषण (ओपनिंग रिमार्क) दिया. शी ने ट्रंप और अमेरिका से कहा कि हमें एक-दूसरे के विरोधी के बजाय पार्टनर बनना चाहिए, एक-दूसरे के लिए सफलता हासिल करनी चाहिए. वहीं ट्रंप ने शी जिनपिंग से कहा कि दोनों महाशक्तियों का एक साथ “शानदार भविष्य” होगा. ट्रंप ने कहा, “आपसे मिलना सम्मान की बात है. आपका मित्र होना सम्मान की बात है, और चीन और अमेरिका के बीच संबंध पहले से कहीं बेहतर होने जा रहे हैं.”
यह भव्य कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरा तनाव बना हुआ है. दोनों नेता शाम को इसी हॉल में स्टेट बैंक्वेट यानी सरकारी भोज में भी शामिल होंगे. इसके अलावा ट्रंप ऐतिहासिक “टेंपल ऑफ हेवन” भी जाएंगे. यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जहां कभी चीन के सम्राट अच्छी फसल के लिए प्रार्थना किया करते थे.
The Star-Spangled Banner plays as President Donald J. Trump is greeted by President Xi at the Great Hall of the People in Beijing, China. 🇺🇸🇨🇳 pic.twitter.com/ANPzR3WQmi
— The White House (@WhiteHouse) May 14, 2026
ट्रंप के इस दौरे पर दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध, ताइवान विवाद, ईरान तनाव, AI की लड़ाई और अरबों डॉलर के सौदों जैसे कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. बाहर से भले ही शानदार स्वागत और दोस्ती दिखाई जाए, लेकिन अंदर ही अंदर अमेरिका और चीन के रिश्तों में भारी तनाव बना हुआ है. पूरी दुनिया की नजर अब इस हाई-वोल्टेज बैठक पर टिकी हुई है.
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति बुधवार देर रात एयर फोर्स वन विमान से दो दिन की इस यात्रा पर बीजिंग पहुंचे. उनके साथ कई बड़े कारोबारी भी आए हैं, जिनमें जेन्सेन हुआंग और एलन मस्क शामिल हैं. ये उन व्यापारिक समझौतों के प्रतीक माने जा रहे हैं जिन्हें ट्रंप करना चाहते हैं. बीजिंग पहुंचने पर ट्रंप का रेड कार्पेट स्वागत हुआ. सफेद यूनिफॉर्म पहने 300 चीनी युवाओं ने “वेलकम” के नारे लगाए और चीन व अमेरिका के छोटे झंडे लहराए. इस दौरान ट्रंप विमान की सीढ़ियां उतरते हुए मुट्ठी हवा में लहराते नजर आए.
क्यों अहम है यह दौरा?
यह लगभग 10 साल में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली बीजिंग यात्रा है. इससे पहले ट्रंप ही 2017 में चीन गए थे. उस समय उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप भी साथ थीं, लेकिन इस बार वह उनके साथ नहीं हैं. पहली यात्रा के बाद ट्रंप ने चीनी सामान पर भारी टैक्स और कई प्रतिबंध लगाए थे. पिछले साल दोबारा व्हाइट हाउस लौटने के बाद उन्होंने फिर ऐसा किया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध शुरू हो गया. बाद में अक्टूबर में शी जिनपिंग और ट्रंप ने अस्थायी समझौता किया.
ट्रंप को ‘बड़ी झप्पी’ की उम्मीद
ट्रंप ने कहा है कि उन्हें शी जिनपिंग से “बहुत बड़ी झप्पी” मिलने की उम्मीद है. ट्रंप मानते हैं कि उनकी चीन के नेता के साथ मजबूत निजी दोस्ती है. उन्होंने पहले शी जिनपिंग की तारीफ करते हुए कहा था कि वह “लोहे की मुट्ठी” (आयरन फिस्ट) से चीन चलाते हैं.
ट्रंप की सबसे बड़ी इच्छा कृषि, विमान और दूसरे क्षेत्रों में बड़े व्यापारिक समझौते करने की है. इसलिए उनके साथ कई बड़े कारोबारी भी आए हैं. बीजिंग जाते समय एयर फोर्स वन में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह शी जिनपिंग पर दबाव डालेंगे कि चीन अमेरिकी कंपनियों के लिए अपने बाजार खोले “ताकि ये शानदार लोग अपना कमाल दिखा सकें.”
ईरान मुद्दे पर ट्रंप को चाहिए चीन की मदद?
इस बार ट्रंप जिस चीन से सामना कर रहे हैं, वह नौ साल पहले वाले चीन से अलग और ज्यादा मजबूत माना जा रहा है. दोनों देशों के बीच व्यापार और भू-राजनीतिक तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. खासकर ईरान युद्ध ने ट्रंप की स्थिति को कमजोर किया है. इसी कारण उन्हें मार्च में अपनी यात्रा टालनी पड़ी थी.
ट्रंप ने कहा कि वह ईरान पर शी जिनपिंग से “लंबी बातचीत” करेंगे. चीन, अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से सबसे ज्यादा तेल खरीदता है. हालांकि ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि ईरान मामले में हमें बीजिंग की किसी मदद की जरूरत है.” लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का बयान थोड़ा अलग था. उन्होंने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि चीन ईरान को फारस की खाड़ी में अपनी मौजूदा गतिविधियां रोकने के लिए मनाने में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएगा.”
क्या व्यापार युद्ध रुकेगा? ताइवान मुद्दा भी सरगर्म
दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहा व्यापार युद्ध भी बातचीत का बड़ा मुद्दा रहेगा. पिछले साल ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैक्स के जवाब में चीन ने भी जवाबी टैक्स लगाए थे, जो 100 प्रतिशत से ज्यादा तक पहुंच गए थे. अब ट्रंप और शी जिनपिंग उस एक साल के टैक्स समझौते को बढ़ाने पर चर्चा करेंगे जो अक्टूबर में दक्षिण कोरिया में उनकी पिछली मुलाकात के दौरान हुआ था. हालांकि समझौता होना अभी तय नहीं माना जा रहा.
ताइवान का मुद्दा भी बातचीत में शामिल रहेगा. ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि वह ताइवान को अमेरिकी हथियार बिक्री के मुद्दे पर शी जिनपिंग से बात करेंगे. यह अमेरिका की पुरानी नीति से अलग माना जा रहा है, क्योंकि पहले अमेरिका कहता रहा है कि वह ताइवान को समर्थन देने के मामले में बीजिंग से सलाह नहीं लेगा. इस मुद्दे पर ताइपे और अमेरिका के सहयोगी देशों की भी नजर रहेगी.
इसके अलावा चीन द्वारा रेयर अर्थ निर्यात पर नियंत्रण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की प्रतिस्पर्धा और दोनों देशों के शोरगुल भरे व्यापारिक रिश्ते भी चर्चा में शामिल रहेंगे. दोनों देश इस बैठक से अपने-अपने फायदे लेकर निकलना चाहेंगे और साथ ही बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच अक्सर तनावपूर्ण रहने वाले रिश्तों को कुछ स्थिर करने की कोशिश करेंगे. इन रिश्तों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है.
ट्रंप यह भी चाहेंगे कि 2026 में शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा की पक्की तारीख तय हो जाए, ताकि वह दिखा सकें कि उनके और चीनी नेता के बीच अच्छे संबंध हैं.
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