नीदरलैंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में चोल राजवंश से जुड़े ताम्रपत्र भारत को सौंप दिए. इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने डच प्रधानमंत्री मार्क रुटे के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया और इसे सभी भारतीयों के लिए गर्व का पल बताया. ये ताम्रपत्र 11वीं शताब्दी के हैं और इन्हें दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है. भारत ने साल 2012 से अनाइमंगलम ताम्रपत्रों की वापसी के लिए प्रयास कर रहा था, जिन्हें नीदरलैंड में ‘लीडेन प्लेट्स’ के नाम से जाना जाता है.
இந்தியர் அனைவருக்கும் ஒரு மகிழ்ச்சிகரமான தருணம்!
11-ம் நூற்றாண்டைச் சேர்ந்த சோழர்கால செப்பேடுகள், நெதர்லாந்தில் இருந்து இந்தியாவிற்குத் திரும்பவும் கொண்டுவரப்பட இருக்கின்றன. இது தொடர்பான விழாவில் பிரதமர் ராப் ஜெட்டன் அவர்களுடன் இணைந்து பங்கேற்றேன்.
சோழர் கால செப்பேடுகள், 21… pic.twitter.com/af4NWacMwt
— Narendra Modi (@narendramodi) May 16, 2026
2012 से जारी थी ‘लीडेन प्लेट्स’ की वापसी की प्रक्रिया
पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ये चोल युग के ताम्रपत्र भारत वापस लाए जा रहे हैं और यह हर भारतीय के लिए खुशी का क्षण है. उन्होंने बताया कि इन ताम्रपत्रों में 21 बड़े और 3 छोटे ताम्रपत्र शामिल हैं, जिन पर मुख्य रूप से तमिल भाषा में शिलालेख अंकित हैं. इन ताम्रपत्रों का संबंध चोल सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम से है और ये उनके पिता राजाराजा चोल प्रथम द्वारा दिए गए मौखिक वचन को औपचारिक रूप देते हैं. साथ ही ये चोल साम्राज्य की महानता और गौरव का वर्णन भी करते हैं.
पीएम मोदी बोले- हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण
पीएम मोदी ने कहा कि भारत को चोलों की संस्कृति और उनकी समुद्री शक्ति पर बेहद गर्व है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ये ताम्रपत्र तमिलनाडु के नागपट्टिनम स्थित ‘चूलामणिवर्म-विहार’ को दिए गए अनुदान का दस्तावेज हैं. इनमें तमिल और संस्कृत दोनों भाषाओं में लेख अंकित हैं. इन्हें दो भागों में बांटा गया है एक भाग संस्कृत में और दूसरा तमिल में है. लगभग 30 किलोग्राम वजन वाले ये ताम्रपत्र एक कांस्य की अंगूठी से जुड़े हुए हैं, जिस पर चोल शाही मुहर लगी है. इन्हें 19वीं शताब्दी से नीदरलैंड के लीडेन विश्वविद्यालय में सुरक्षित रखा गया था.

सांस्कृतिक धरोहर की वापसी पर दोनों देशों के संबंध मजबूत
प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड सरकार और लीडेन विश्वविद्यालय का आभार जताया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस वापसी को भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों की पुनर्प्राप्ति की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बताया. वहीं, प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी मौजूद रहे. ये ताम्रपत्र चोल काल के सबसे महत्वपूर्ण बचे हुए अभिलेखों में गिने जाते हैं और भारत के बाहर मौजूद तमिल विरासत की अहम धरोहरों में शामिल रहे हैं.

भारत-नीदरलैंड्स CEO राउंडटेबल में पीएम मोदी ने लिया हिस्सा
पीएम मोदी ने नीदरलैंड्स की राजधानी हेग में भारत-नीदरलैंड्स सीईओ राउंडटेबल में हिस्सा लिया. इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी, निवेश, सेमीकंडक्टर, शिपिंग, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई. राउंडटेबल में नीदरलैंड्स की प्रमुख कंपनियों के सीईओ ने भारत में पिछले 10-12 वर्षों में आए बदलावों की सराहना की और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की.रॉयल वोपाक के सीईओ डिक रिचेल ने कहा कि उनकी कंपनी एगिस लॉजिस्टिक्स के साथ संयुक्त उद्यम के जरिए भारत में लंबे समय से मौजूद है. उन्होंने भारत में आए बदलावों की सराहना करते हुए भविष्य में और निवेश बढ़ाने की उम्मीद जताई.
डच कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाने की इच्छुक
वीएनओ एससीडब्ल्यू के अध्यक्ष कोएन वैन ओस्ट्रोम ने प्रधानमंत्री मोदी के मजबूत नेतृत्व की तारीफ की. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी डच कंपनियों की समझ रखते हैं और वैश्विक साझेदारियों के जरिए भारत में निवेश बढ़ाने के प्रति उत्सुक हैं. एपीएम टर्मिनल्स के सीईओ कीथ स्वेंडसेन ने कहा कि भारत की महत्वाकांक्षा और आर्थिक प्रगति सुनकर अच्छा लगा. ईयू के साथ व्यापार समझौता दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगा. हम परिवहन, जहाज निर्माण, कंटेनर उत्पादन और युवाओं के प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में ठोस प्रगति कर रहे हैं. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप पर हस्ताक्षर के बाद क्रिस्टोफ फौक्वेट ने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी की सेमीकंडक्टर उद्योग स्थापित करने की महत्वाकांक्षा का नतीजा है. भारत में यह उद्योग आत्मनिर्भरता और समृद्धि के लिए बेहद जरूरी है.
भारत में नए बुनियादी ढांचे पर हो रहे निवेश का स्वागत
बौदेविज्न सीमन्स के सीईओ ने प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा और दृढ़ संकल्प की तारीफ करते हुए कहा, “उन्होंने जो कहा कि सबसे अच्छा समय अभी आना बाकी है, उससे मैं पूरी तरह सहमत हूं. ईयू-भारत व्यापार समझौते और नीदरलैंड्स के साथ विशेष संबंधों के आधार पर हमारे पास विशाल अवसर हैं.” रोटरडम पोर्ट के सीईओ ने कहा कि जहाज बंदरगाह में सुरक्षित रहने के लिए नहीं बने हैं, वे व्यापार के लिए बने हैं. उन्होंने भारत में नए बुनियादी ढांचे पर हो रहे निवेश का स्वागत किया.
किन मुद्दों पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) भारत और नीदरलैंड्स के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संबंधों को नई गति प्रदान करेगा. उन्होंने सेमीकंडक्टर, समुद्री क्षेत्र, जल प्रबंधन, एग्रीटेक, हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस्ड लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बैठक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने ऊर्जा, सस्टेनेबिलिटी और टेक्नोलॉजी समेत विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख डच कंपनियों के सीईओ के साथ विस्तृत चर्चा की.”
(आईएएनएस इनपुट्स के साथ)


