Gig Workers की हड़ताल! ठप रही ओला-उबर, स्विगी-जोमैटो, अमेजन-फ्लिपकार्ट की सेवाएं, अब आगे की ये है तैयारी

Gig Workers की हड़ताल! ठप रही ओला-उबर, स्विगी-जोमैटो, अमेजन-फ्लिपकार्ट की सेवाएं, अब आगे की ये है तैयारी Gig Workers की हड़ताल! ठप रही ओला-उबर, स्विगी-जोमैटो, अमेजन-फ्लिपकार्ट की सेवाएं, अब आगे की ये है तैयारी

Gig Workers Strike: देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के बढ़ते दामों ने आम जनता के साथ-साथ ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की कमर तोड़ दी है. ईंधन की मार और कंपनियों की कथित मनमानी के विरोध में ‘गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ ने शनिवार को दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक देशव्यापी सांकेतिक हड़ताल का आह्वान किया. गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन  के आह्वान पर आज देश के प्रमुख शहरों में 60% से अधिक डिलीवरी पार्टनर्स और राइड-हेलिंग ड्राइवरों ने दोपहर 12:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक अपने ऐप्स बंद रखे. 

यूनियन का स्पष्ट कहना है कि यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इसी तरह वृद्धि होती रही, तो देश के लगभग 1 करोड़ 20 लाख गिग वर्कर्स इस पेशे को छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे. GIPSWU के अनुसार, कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ खुद उठाने या ग्राहकों पर डालने के बजाय सीधा वर्कर्स की जेब पर डाल रही हैं. 

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद ऑनलाइन डिलीवरी आर ऐप आधारित टैक्‍सी सेवाओं से जुड़े गिग वर्कर्स मांग कर रहे हैं कि उनके लिए किराया और चार्ज भी बढ़ाया जाए. गिग वर्कर्स ने 5 घंटे तक ऐप आधारित सेवाएं (Ola, Uber, Rapido, Swiggy, Zomato, Bistro, Zepto, Blinkit) पूरी तरह बंद रखने का ऐलान किया है. 

दोपहर 12 से शाम 5 बजे तक सेवाएं ठप रहीं 

गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने रविवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक यानी पूरे 5 घंटे तक हड़ताल पर रहे. लोगों के वीकेंड पर बड़ा असर पड़ा. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 4 साल बाद बढ़ोतरी की गई है और ये बढ़ोतरी, दरों में पिछले बदलावों की तुलना में कहीं ज्‍यादा है. इसके विरोध में और प्रति किलोमीटर सर्विस दर बढ़ाने की मांग में गिग वर्कर्स ने हड़ताल की. 

गिग वर्कर्स का क्‍या कहना है? 

मिडल ईस्‍ट वॉर के चलते अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर तेल और गैस की कीमतें बढ़ने के बाद देश में लंबे समय तक कीमतें कंट्रोल में रखने का प्रयास किया गया, लेकिन बहुत ज्‍यादा नुकसान में जा रही तेल मार्केर्टिंग कंपनियों ने आखिरकार दाम बढ़ा ही दिए. इसने गिग वर्कर्स की कमर तोड़ दी.LPG की दिक्‍कत के बीच कई रेस्‍तरां आर क्‍लाउड किचन बंद हो गए, जबकि कइयों ने मेन्‍यू सीमित कर लिए. इससे फूड डिलीवरी ऐप के आर्ड वॉल्‍यूम में 50 से 70 फीसदी तक की कमी आई है. ये स्थिति खास तौर से उन डिलीवरी पार्टनर्स के लिए बहुत गंभीर है, जिनकी दैनिक कमाई पूरी तरह से ऑर्डर्स नंबर पर मिलने वाले इंसेंटिव पर टिकी होती है. GIPSWU के मुताबिक, ओला, उबर और रैपिडो वालों के लिए भी लागत बढ़ रही है, जबकि अमेजन-फ्लिपकार्ट, मीशो, मंत्रा जैसे प्‍लेटफॉर्म्स के डिलीवरी पार्टनर्स का भी खर्च बढ़ा है. 

20 रुपये प्रति किलोमीटर न्यूनतम रेट की मांग

GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने तेल-गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को गिग वर्कर्स पर सीधा प्रहार बताया है, जो पहले ही भीषण गर्मी और महंगाई की मार से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘अमेजन, स्विगी, जेप्‍टो और अन्य कंपनियों के डिलीवरी वर्कर्स अब इस बढ़े हुए खर्च का बोझ उठाने की स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं. हम सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से मांग करते हैं कि वर्कर्स के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का न्यूनतम सर्विस रेट तय किया जाए.’ 

…तो प्रभावित होगी गिग इकोनॉमी  

यूनियन ने चेताया कि यदि ईंधन और वाहनों के रखरखाव के खर्च के अनुपात में कमाई नहीं बढ़ी, तो लाखों वर्कर्स इस सेक्टर को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे. ऐसे में देश की गिग इकोनॉमी पर बुरा असर होगा. नीति आयोग के अनुमानों के मुताबिक, इस सेक्‍टर में चुनौतियां तमाम हैं, लेकिन उन चुनौतियों के बावजूद इस सेक्टर में विस्तार की अपार संभावनाएं हैं.देश में गिग वर्कर्स की संख्या, जो  2020-21 में 77 लाख थी, वो वर्ष 2029-30 तक बढ़कर 2.3 करोड़ होने का अनुमान जताया जा रहा है. 

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