Parle Products IPO: जैसे ही पीएम मोदी ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को पारले मेलोडी गिफ्ट की, वैसे ही शेयर मार्केट में लिस्टिड दूसरी पारले इंडस्ट्रीज लिमिटेड, जिसका मेलोडी से कोई लेना-देना नहीं है, कंपनी के शेयरों में अपर सर्किट लग गया. वजह साफ थी कि सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का पीएम मेलोनी के साथ जैसे ही वीडियो आया, वैसे ही निवेशकों ने इस कंपनी को असली पारले कंपनी मानकर खूब पैसे लगा दिए. हालांकि बाद में तस्वीर साफ हुई कि मेलोडी वाली पारले यानी असली पारले तो अभी शेयर मार्केट में लिस्टेड ही नहीं है, ये अभी भी प्राइवेट कंपनी बनी हुई है. यहां तक की अभी मेलोडी टॉफी बनाने वाली पारले (Parle Products) का IPO के लिए कोई पक्की तारीख नहीं है.
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— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) May 20, 2026
अभी क्या स्थिति है?
पारले अभी भी पूरी तरह प्राइवेट कंपनी है. यानी शेयर मार्केट में लिस्ट नहीं है. रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी ने IPO का DRHP भी दाखिल नहीं किया यानि ऑफिशियली प्रोसेस शुरू नहीं हुआ है. अभी सिर्फ बैंकों के साथ शुरुआती बातचीत ही चल रही है. कुछ महीनों पहले खबरें आईं कि पारले IPO पर विचार कर रही है. यानी कंपनी कुछ बड़े बैंक्स से बात कर रही है, लेकिन ये सिर्फ शुरुआती स्टेज ही है. कंपनी ने आईपीओ को लेकर कोई फाइनल फैसला नहीं किया है.
IPO कब आ सकता है?
अगर सब कुछ आगे बढ़ता है तो पहले DRHP फाइल होगा, फिर SEBI की मंजूरी ली जाएगी. उसके बाद ही कंपनी का आईपीओ आएगा. यानी अभी शेयर मार्केट में आप पारले प्रोडक्ट्स में निवेश नहीं कर सकते हैं. मार्केट में जो पारले नाम का शेयर चल रहा है, वो दूसरी कंपनी पारले इंडस्ट्रीज लिमिटेड है, ऐसे में पैसा लगाने से पहले सारी जानकारी लेना उचित रहता है.
क्या है DRHP?
डीआरएचपी (Draft Red Herring Prospectus) वो डॉक्यूमेंट है, जो कोई कंपनी आईपीओ (Initial Public Offering) लाने से पहले तैयार करती है और SEBI को जमा करती है. इसके बाद सेबी सारे पेपर्स चेक करने के बाद कंपनी को पब्लिक होने के लिए मंजूरी दे देती है.
DRHP में क्या होता है?
डीआरएचपी की बात करें तो इसमें कंपनी का बिजनेस यानी ये क्या काम करती है,कंपनी के फाइनेंशियल्स, प्रमोटर्स कौन हैं, IPO से जुटाए जाने वाले पैसे का इस्तेमाल कहां होगा और कंपनी का भविष्य का प्लान की जानकारी होती है. इसी को निवेशक पढ़कर जान पाते हैं कि कंपनी में पैसा लगाना ठीक रहेगा या फिर नहीं. इससे कंपनी की असली और रिस्की कंडीशन के बारे में पता चलता है.
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