बिहार में शिवचंद्र राम के इस्तीफे से RJD को कितना नुकसान? MLC का टिकट न मिलने पर दिया इस्तीफा

बिहार में शिवचंद्र राम के इस्तीफे से RJD को कितना नुकसान? MLC का टिकट न मिलने पर दिया इस्तीफा बिहार में शिवचंद्र राम के इस्तीफे से RJD को कितना नुकसान? MLC का टिकट न मिलने पर दिया इस्तीफा

बिहार में राजद के बड़े दलित नेता शिवचंद्र राम ने RJD के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. शिवचंद्र राम बिहार के कला संस्कृति और खेल मंत्री रह चुके हैं. वह अभी RJD के दलित प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और रविदास चेतनामंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. माना जा रहा है कि शिवचंद्र राम को उम्मीद थी कि बिहार में 10 सीटों पर होने जा रहे विधान परिषद के चुनाव (MLC) में आरजेडी अपना उम्मीदवार बनाएगा, लेकिन आरजेडी ने राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई सुनील कुमार को MLC के लिए उम्मीदवार बनाया था.

 कला संस्कृति और खेल मंत्री रहे

इसी से आहत होकर आरजेडी नेता शिवचंद्र राम ने आरजेडी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. शिवचंद्र राम ने पहली बार 2005 में फरवरी और अक्टूबर में बिहार के वैशाली जिला के महुआ विधानसभा से आरजेडी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता था. परिसीमन के बाद वैशाली जिला के राजापाकर विधानसभा से 2015 में चुनाव जीतकर बिहार के कला संस्कृति और खेल मंत्री बने थे.

शिवचंद्र राम वैशाली जिला ही नहीं, पूरे बिहार में RJD के बड़े दलित चेहरा थे. हालांकि आरजेडी ने शिवचंद्र राम को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन दोनों बार उन्हें बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा. वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने वैशाली जिला के पातेपुर विधानसभा से अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन शिवचंद्र राम यहां भी बुरी तरह पराजित हुए थे.

दलित वोट बैंक पर कमजोर होगी राजद की पकड़

पर इन सबके बावजूद राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके इस्तीफा के बाद आरजेडी के दलित वोट बैंक खिसकना निश्चित है. शिवचंद्र राम के आरजेडी से रूठने पर आगामी चुनाव महागठबंधन के दलित वोट का भारी नुकसान होने की संभावना है. माना जा रहा है कि दलित वोट बैंक पर पकड़ रखने वाले शिवचन्द्र राम के साथ छोड़ने से राजद की परेशानी बढ़ेगी.

खासकर आगामी चुनाव में दलित वोट बैंक को गोलबंद करने के मुद्दे पर आरजेडी के लिए राह आसान नहीं रहने वाली है. शिवचंद्र राम का राजद छोड़ना NDA के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है. वहीं, माना जा रहा है कि शिवराम चंद्र के साथ न होने से राजद का वैशाली समेत कई इलाकों में दलित वोट बैंक कमजोर होगा. दूसरी तरफ चिराग पासवान के कारण एनडीए का खेमा पहले से ही बिहार में मजबूत है. 

यह भी पढे़ं-

दीपक प्रकाश से छिनेगी मंत्री की कुर्सी? उपेंद्र कुशवाहा के पास अब 2 विकल्प

अनंत सिंह की 15 जून तक नहीं होगी गिरफ्तारी, फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट की वजह से टली सुनवाई




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *