मोदी सरकार के 12 साल: भारत की असली ताकत गांवों की बदल रही तस्वीर, नए दौर की शुरुआत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 सालों के कार्यकाल में ग्रामीण भारत में जो बदलाव दिखा है, वह पहले की तुलना में काफी तेज और व्यापक माना जा रहा है. सरकारी योजनाओं और जमीनी स्तर पर हुए बदलावों ने गांवों में स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी सुविधाएं और डिजिटल कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है. आज ग्रामीण भारत भी ऐसे दौर में है जहां विकास केवल शहरों तक सीमित नहीं रह गया है. भारत में करीब 6.65 लाख गांव हैं और 2.68 लाख ग्राम पंचायतें देश के ग्रामीण ढांचे की रीढ़ हैं. ये गांव भारत की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक जीवन का आधार हैं.

पिछले 12 वर्षों के दौरान मोदी सरकार ने विभिन्न योजनाओं के जरिए ग्रामीण भारत में कई स्तरों पर सकारात्मक बदलाव किए हैं. आज ये बदलाव लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में साफ दिखाई देते हैं. चलिए बताते हैं कि किन योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचा और ये कैसे बदल रहे हैं गांवों की तस्वीर…

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मोदी सरकार का स्वास्थ्य मिशन 

मोदी सरकार का देश की आम जनता को मुफ्त या सस्ती कीमतों पर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का लक्ष्य है. इसके तहत 44 करोड़ से अधिक परिवारों को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाया गया तो 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के जरिए जेनेरिक दवाएं बाजार मूल्य की तुलना में 50–90 प्रतिशत कम कीमतों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं. 2014 के बाद से देश में विभिन्न राज्यों में 12 नए एम्स शुरू हुए हैं. 

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य को लेकर मोदी सरकार का सबसे बड़ा फोकस रहा है, जहां 25 अक्‍तूबर 2021 को शुरू किए गए प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं. 64 हजार करोड़ से अधिक की इस योजना के तहत 23 हजार से अधिक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए ग्रामीणों की मदद की जा रही है. इसके तहत 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले सभी जिलों में 631 क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉक स्थापित किए जा रहे हैं.

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पीएम आवास योजना के तहत बने मकान

पीएम आवास योजना के तहत बने मकान
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गांवों में पक्के घर, मजदूरी की दरें बढ़ीं 

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाखों परिवारों को पक्के घर मिले हैं जिससे लोगों के जीवन स्तर में स्थिरता आई है. स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत गांवों में खुले में शौच की समस्या में भारी कमी आई है और स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी है. 1 अप्रैल 2016 से शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण के पहले और दूसरे चरण के तहत, राज्यों को 4.15 करोड़ घर आवंटित किए गए, 3.90 करोड़ घर स्वीकृत किए गए, 2.99 करोड़ घर बनाए गए. मोदी सरकार ने साल 2029 तक, कुल 4.95 करोड़ ग्रामीण घरों का लक्ष्य रखा है. 

श्रम और रोजगार मंत्रालय के अनुसार, भारत में रोजगार 2017-18 में 47.5 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 64.33 करोड़ हो गया है. यानी छह सालों में 16.83 करोड़ नई नौकरियां जुड़ी. वहीं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से 10 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया गया.

इन 12 सालों के दौरान मनरेगा से जीरामजी बने योजना के तहत मजदूरी में लगातार वृद्धि देखने को मिली. 2013-14 में महात्मा गांधी नरेगा के लिए न्यूनतम औसत मजदूरी दर 155 रुपये थी, वित्त वर्ष 2024-25 में न्यूनतम औसत मजदूरी 279 रुपये हो गई. जो अलग-अलग राज्यों में 349 रुपये से लेकर 370 रुपये या इससे अधिक हो सकती है.

इस दौरान ग्रामीण मजदूरी में लगातार वृद्धि तो हुई है, साथ ही गरीबी दर में महत्वपूर्ण कमी आई और आय की असमानता भी कम हुई है. राष्ट्रीय गरीबी सूचकांक के अनुसार 2015-16 से 2019-21 के बीच गरीबी में रहने वाले लोगों का अनुपात 24.85 प्रतिशत से घटकर 14.96 प्रतिशत हो गया. इस दौरान करीब 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए.

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गांवों से शहरों की कनेक्टिविटी बढ़ी

गांवों से शहरों की कनेक्टिविटी बढ़ी

गांवों में सड़क, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं बढ़ीं

ग्रामीण भारत में सड़क, पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क पहले की तुलना में काफी मजबूत हुआ है. इससे गांवों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार आया है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए 7.87 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण कर ग्रामीण इलाकों को मुख्य बाजारों और शहरों से जोड़ा गया है. इस योजना ने दूर बस्तियों को मुख्य सड़कों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हुई. 

ग्रामीण भारत में सबसे बड़ा बदलाव जल जीवन मिशन के जरिए देखा गया है. इस योजना का उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाना है. 3 मार्च 2026 तक देश के लगभग 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 15.82 करोड़ (81.71 फीसद) परिवारों के घरों में नल के पानी की आपूर्ति मुहैया कराई जा चुकी है. यह ग्रामीण जीवन में स्वास्थ्य, समय बचत और जीवन गुणवत्ता के स्तर पर बड़ा बदलाव माना जा रहा है. 

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डिजिटल भारत की पहुंच गांवों तक

भारतनेट परियोजना ने ग्रामीण भारत में डिजिटल क्रांति को गति दी है. इसके तहत गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है. अब कई ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी सेवाएं डिजिटल नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं. इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार देखने को मिला है. ग्रामीण इंटरनेट उपयोग में बढ़ोतरी ने युवाओं के लिए नए रोजगार और ऑनलाइन अवसरों के द्वार खोले हैं.

बीते वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि देश के कुल 6,44,131 गांवों में से लगभग 97.65% (6.29 लाख से अधिक) गांव मोबाइल कनेक्टिविटी से जुड़ चुके हैं, और गांवों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है.

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इंडिया पोस्ट और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है. ग्रामीण डाकघर अब बैंकिंग, लोन और डिजिटल सेवाओं का केंद्र बनते जा रहे हैं. इंडिया पोस्ट के 1.5 लाख ग्रामीण डाकघर और लाखों डाक सेवक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं. इससे छोटे उद्यमों, किसानों और महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है.

स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया है. लाखों महिलाएं छोटे व्यवसाय और कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं.

सामाजिक सुरक्षा, आदिवासी और वंचित समुदायों पर खास जोर

ग्राम न्यायालय अधिनियम ने ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय तक पहुंच को आसान बनाया है. इससे छोटे विवादों का निपटारा स्थानीय स्तर पर हो रहा है. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम ने कमजोर वर्गों को आर्थिक सुरक्षा देने में मदद की है.

प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुधारने पर जोर दिया गया है.

पिछले 12 वर्षों में ग्रामीण भारत में बदलाव देखने को मिला है. सड़क, पानी, बिजली, इंटरनेट और रोजगार समेत अन्य क्षेत्रों में हुए सुधार से गांवों की तस्वीर बदल रही है. 2047 के विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब गांव आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होंगे.

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