नई दिल्ली:
ओटीटी प्लेटफॉर्म जियोहॉटस्टार पर इन दिनों एक फिल्म ने गर्दा उड़ा रखा है. इसकी कहानी ऐसी कि होश फाख्ता कर देगी. सस्पेंस और सीधी-सादी क्राइम थ्रिलर. वैसे भी मलयालम सिनेमा को अपनी तगड़ी कहानियों, सस्पेंस और रियलिस्टिक किरदारों के लिए पहचाना जाता है. इस बार नई फिल्म ‘दृढ़म‘ (Dridam) ने दर्शकों की नींद उड़ाकर रख दी है. फिल्म 8 मई 2026 को थिएटर में रिलीज हुई और अब 12 जून 2026 से जियोहॉटस्टार पर है. यह 2 घंटे 8 मिनट (128 मिनट) की क्राइम थ्रिलर है, जिसमें ईमानदार युवा पुलिस अधिकारी की जद्दोजहद को दिखाया गया है. निर्देशक मार्टिन जोसेफ की यह डेब्यू फिल्म जीथू जोसेफ ने प्रेजेंट की है, जिन्हें ‘दृश्यम’ सीरीज के लिए पहचाना जाता है.
दृढ़म की कहानी और परफॉर्मेंस
‘दृढ़म’ की कहानी इडुक्की जिले के शांत गांव कुजिनिलम में सेट है. एसआई विजय राधाकृष्णन (शेन निगम) एक नौसिखिया सब-इंस्पेक्टर है, जिसकी पहली पोस्टिंग इस शांत जगह पर होती है, जहां पहले कभी बड़े अपराध नहीं हुए. विजय उत्साही, ईमानदार और मेहनती युवा अफसर है, जो अपनी ड्यूटी को लेकर बेहद गंभीर है. लेकिन उस समय हालात एकदम उलट-पुलट हो जाते हैं जब गांव में अचानक मानव अवशेष मिलते हैं. उसके बाद सीरीज ऑफ मर्डर और बैंक रॉबरी जैसे घटनाक्रम शुरू हो जाते हैं. विजय पर एक हफ्ते के अंदर केस सॉल्व करने का दबाव बनता है. यही इसकी कहानी है.
फिल्म का स्क्रीनप्ले जोमन जॉन और लिंटो देवासिया ने लिखा है. कहानी धीरे-धीरे बिल्डअप करती है. शुरुआत में यह एक टिपिकल पुलिस प्रोसीजर लगती है, लेकिन जैसे-जैसे प्लॉट आगे बढ़ता है, ट्विस्ट और टर्न्स बांधे रखते हैं. खासकर फिल्म का क्लाइमैक्स चौंका देने वाला है. जहां पहला हाफ थोड़ा स्लो लग सकता है, वहीं सेकंड हाफ और फिनाले हाई ऑक्टेन एक्शन और सस्पेंस से भरपूर है.
शेन निगम ने विजय राधाकृष्णन का रोल बखूबी निभाया है. वे जज्बाती लेकिन डटकर लड़ने वाले अफसर हैं. सपोर्टिंग कास्ट में शोबी तिलकन, कोट्टायम रमेश, दिनेश प्रभाकर, नंदन उन्नी, कृष्णा प्रभा और सानिया फातिमा शामिल हैं, जिन्होंने किरदारों को जीवंत बनाया है.
यह भी पढ़ें: 75 साल के एक्टर का कमाल, तारक मेहता और नागिन को OTT पर दी मात, युवाओं के लिए इंस्पिरेशन है 6 एपिसोड की सीरीज
दृढ़म को IMDb पर मिली सॉलिड रेटिंग
IMDb पर ‘दृढ़म’ को 10 में से 7 रेटिंग मिली है. ‘दृढ़म’ मलयालम सिनेमा की उस परंपरा को आगे बढ़ाती है जिसमें छोटे-छोटे डिटेल्स, रियल लोकेशन और स्ट्रॉन्ग किरदार कहानी को आगे बढ़ाते हैं. यह फिल्म युवा पुलिस अधिकारियों की चुनौतियों, सिस्टम के दबाव और सच्चाई की जीत को दिखाती है. आज के समय में जब ज्यादातर फिल्में बड़े एक्शन और वीएफएक्स पर निर्भर करती हैं, ‘दृढ़म’ स्क्रिप्ट और परफॉर्मेंस पर भरोसा रखती है. ‘दृढ़म’ एक सॉलिड वन-टाइम वॉच है.
लेखक के बारे में

नरेंद्र सैनी
डिप्टी एडिटर
और पढ़ें


