फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और मैसेंजर की मालिक (पैरेंट कंपनी) मेटा अब एक ऐसे फिल्ड में कदम रखने की तैयारी कर रही है जिसने पिछले कुछ सालों में इंटरनेट पर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है. यह फिल्ड है प्रेडिक्शन मार्केट यानी ऐसी जगह, जहां लोग भविष्य में होने वाली घटनाओं के नतीजों का अनुमान लगाते हैं. आसान शब्दों में कहे तो सट्टा बाजार. दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी कही जाने वाली मेटा अब सट्टा वाला ऐप बनाने जा रही है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है और अपनी कंपनी के भीतर एक छोटी टीम को ऐसा ही एक स्मार्टफोन ऐप बनाने का काम सौंपा है.
दरअसल अमेरिका में पॉलीमार्केट और काल्शी जैसे सट्टा प्लेटफॉर्म तेजी से फेमस हुए हैं. इन बेटिंग प्लेटफॉर्मों पर लोग सुपर बाउल जैसे गेम्स से लेकर राष्ट्रपति कितनी देर तक बोलेंगे, ऐसी कई तरह की घटनाओं के नतीजों पर दांव लगाते हैं. कभी बार तो अजीबोगरीब चीजों पर भी लोग सट्टा लगाते हैं और पैसा बनाते हैं. ईरान जंग में तो इस बात तक पर सट्टा लगा कि ईरान में गिरे अमेरिकी पायलट को कबतक रेस्क्यू किया जाएगा.
मेटा का प्लान क्या है?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के अंदर इस प्रोजेक्ट को ‘एरीना’ नाम दिया गया है. रिपोर्ट की माने तो फिलहाल इस ऐप में असली पैसे से दांव लगाने का ऑप्शन नहीं होगा. इसके बजाय वीडियो गेम की तरह इसमें लोग पॉइंट्स सिस्टम का इस्तेमाल कर पाएंगे. हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी के सूत्रों ने भविष्य में असली पैसे से सट्टा लगाने की संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया है. यानी इसी ऐप पर आगे लोग अपने दांव पर पैसा लगा सकेंगे, मुनाफा कमाएंगे या पैसा हारेंगे.
खास बात है कि यह पहली बार नहीं है जब मेटा ने डिक्शन मार्केट की दुनिया में कदम रखा हो. साल 2020 में कंपनी ने “फोरकास्ट” नाम का एक ऐप लॉन्च किया था. तब कोराना महामारी का शुरुआती दौर था और इस ऐप के जरिए लोग दुनिया से जुड़े तमाम विषयों पर अनुमान लगाते थे. इसमें भी पॉइंट्स सिस्टम का इस्तेमाल होता था. लेकिन मेटा ने 2022 में इस ऐप को बंद कर दिया था.
खूब फैल रहा ऑनलाइन सट्टा बाजार
पिछले 2-3 सालों में प्रेडिक्शन मार्केट की लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया है. लोग ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल अब छिपकर नहीं करते. बड़े खेल आयोजनों और गोल्डन ग्लोब्स जैसे कार्यक्रमों में भी इनकी चर्चा होने लगी है. आप पिछले दो सालों के आंकड़े से ही अनुमान लगा सकते हैं कि ऐसे ऐप्स का क्रेज कितनी तेजी से बढ़ा है. साल 2025 में काल्शी और पॉलीमार्केट पर कुल 50 अरब डॉलर के ऑनलाइन डील्स हुए थे. लेकिन अभी 2026 का साल आधा भी नहीं बीता है और यह आंकड़ा पहले ही 130 अरब डॉलर को पार कर चुका है. लगता है कि इसी को देखते हुए मेटा भी इस तेजी से बढ़ती दुनिया में अपनी जगह बनाने की तैयारी कर रहा है.
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