राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक 8 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड कौन? | Ram Mandir donation theft case 8 arrested who is the mastermind

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अयोध्या (यूपी):

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी के कड़े एक्शन की सिफारिश के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए टिन्नू यादव समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ये सभी नामजद आरोपी हैं. सभी का मेडिकल कराने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया. CJM कोर्ट ने सभी आरोपियों को 3 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. पुलिस सोमवार को कोर्ट में याचिका देकर इन्हें रिमांड पर ले सकती है. गिरफ्तार आरोपियों में 6 चढ़ावे और नकदी की गिनती का काम देखते थे.

मुख्य आरोपी टिन्नू यादव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर है. आरोपी सुभाष श्रीवास्तव की निगरानी में चढ़ावे की गिनती होती थी. आरोपी मनीष यादव टिन्नू यादव का भतीजा है. इसके साथ अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा की भी गिरफ्तारी हुई है. अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र को भी पुलिस ने पकड़ा है.

ट्रस्ट के सदस्य की शिकायत पर ये FIR दर्ज हुई थी. BNS की धारा 306, 316(5), 317(4) में FIR हुई है. इसके साथ ही 317(5), 61 और धारा 3(5) भी लगाई है. चोरी से जुड़ी धारा 306 में 7 साल तक की सजा का प्रावधान है. आपराधिक विश्वासघात की धारा-316(5) में आजीवन कारावास तक की सजा है. 317(4) और 317(5) चोरी की संपत्ति खरीदने-बेचने से जुड़ी है. इन धाराओं में भी अधिकतम आजीवन कारावास तक की सजा है. BNS की धारा 61 और 3(5) सामूहिक आपराधिक षडयंत्र और साजिश से जुड़ी है. गंभीर अपराध में 2 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा है.

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से 6 लोग मंदिर के ऐसे कर्मचारी थे, जो दानपात्र के चढ़ावे और नकदी की गिनती का काम देखते थे. ये आरोपी काफी समय से एक संगठित गिरोह की तरह दान राशि की चोरी कर रहे थे और इन्हें सीसीटीवी कैमरों में गड़बड़ी करते हुए पकड़ा गया था.

प्राथमिकी में नामजद और गिरफ्तार किए गए आठ आरोपी

चढ़ावा चोरी मामले में गुरुवार देर शाम ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पहली FIR दर्ज कराई गई थी. इसमें चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा समेत अन्य बड़े पदाधिकारियों के नाम नहीं हैं. एफआईआर के बाद रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. 

पदों का दुरुपयोग-

  • टिन्नू के पास बिना आदेश के थीं हुंडियों की चाभी 
  • SIT की रिपोर्ट में उल्लेख, ट्रस्ट को बहुत पहले हो गया था चोरी का अंदेशा 
  • सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में ट्रस्ट और बैंक के बीच बैठक में बनी थी एसओपी 
  • स्टेट बैंक की तरफ़ से गोविन्द मिश्र और ट्रस्ट की तरफ़ से अनिल मिश्र ने किया था अभिलेख पर हस्ताक्षर
  • गणना प्रक्रिया में आगे एसओपी का नहीं हुआ इस्तेमाल
  • SIT की रिपोर्ट में उल्लेख, जानबूझकर की गई लापरवाही

अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गौरव ग्रोवर ने बताया कि आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और पुलिस मामले के संबंध में उनसे पूछताछ कर रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस पूछताछ के बाद उन्हें अदालत के समक्ष पेश करेगी.  पुलिस ने बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से 23 जून को सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में कठोर कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिसके आधार पर यह कदम उठाया गया है.

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सूत्रों के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है.

अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित दान और चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने विशेष जांच का अनुरोध किया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था. एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि एसआईटी की निष्पक्ष जांच से ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होकर रहेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को सात जून को एक खबर का हवाला देते हुए उठाया और उन्होंने इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी, बाद में इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया.

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खबरों के अनुसार, आरोपी सुभाष श्रीवास्तव नकदी गिनने वाले कर्मचारियों के प्रभारी थे, जबकि अन्य आरोपी नकदी या कीमती सामान गिनने में शामिल थे या अलग-अलग भूमिकाओं में इस प्रक्रिया से जुड़े थे. प्राथमिकी में नामजद रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के बारे में बताया गया है कि वह ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पहले वाहन चालक रहा है.

टिन्नू ने दान और चढ़ावे की रकम गिनने में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया था और कहा था कि उससे जलने वाले कुछ लोग उसका नाम उछाल रहे हैं. हालांकि उसने उन लोगों के नाम नहीं बताए थे. लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा नामक आरोपी भी मंदिर में मिले दान की रकम और अन्य कीमती सामान की गिनती का काम करते थे.

विश्व हिंदू परिषद और आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की. वहीं कुछ विपक्षी नेताओं ने प्राथमिकी को “दिखावा” करार दिया. उनका आरोप है कि इसमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों – जिनमें महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा शामिल हैं, उनकी जवाबदेही तय नहीं की गई है.

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