देश-दुनिया में अपनी बेमिसाल खूबसूरती और हेरिटेज के लिए मशहूर गुलाबी नगरी जयपुर इन दिनों बदहाल है. शहर की सूरत पिछले कुछ दिनों से पूरी तरह बिगड़ी हुई है. तमाम मुख्य चौराहों और मार्गों पर कचरे का ढेर लगा हुआ है. हालात ऐसे हैं कि जिन सड़कों पर कभी पर्यटकों की चहल-पहल हुआ करती थी, वहां अब पैर रखने तक की जगह नहीं बची है. इसकी वजह है- जयपुर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, जिसकी वजह से व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है.
पॉश इलाकों में ट्रैफिक जाम, व्यापार ठप
दरअसल, निगम प्रशासन और सफाई कर्मचारी संगठनों के बीच गतिरोध बना हुआ है. सफाई कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं और नतीजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. खातीपुरा और वैशाली नगर जैसे पॉश इलाकों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. इन रिहायशी और कमर्शियल हब के मुख्य चौराहों पर कचरा सड़कों तक फैल चुका है. इससे ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो गई और स्थानीय व्यापार भी पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है. दूसरी ओर, हसनपुरा जैसे रिहायशी इलाके में स्थिति और भी ज्यादा बदतर है. यहां संकरी गलियों के कोने पर फैले कचरे और उसकी बदबू से क्षेत्रवासी बेहाल हैं.
जयपुर में सफाईकर्मियों की हड़ताल
रेलवे स्टेशन के बाहर गंदगी से पर्यटक परेशान
जयपुर रेलवे स्टेशन का भी कुछ ऐसा ही हाल है. हर दिन हजारों की संख्या में देश-विदेश से सैलानी और आम मुसाफिरों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. स्टेशन परिसर के बाहर गंदगी पसरी हुई है. वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर जयपुर की छवि को गहरा नुकसान पहुंच रहा है.
निगम प्रशासन नहीं निकाल पा रहा रास्ता
स्थानीय निवासियों का कहना है, “कर्मचारियों की मांगों पर विचार करना और कोई हल निकालना पूरी तरह से प्रशासनिक मशीनरी का काम है. लेकिन टैक्स देने वाली आम जनता को इस स्थिति में रहने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है?” राजस्थान की राजधानी की ऐसी स्थिति कब तक रहेगी, यह कह पाना मुश्किल है. इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए फिलहाल निगम प्रशासन कोई ठोस रास्ता नहीं निकाल पाया है.
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