नई दिल्ली:
एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेवाओं में निजी भागीदारी के प्रस्ताव को लेकर कर्मचारियों के संगठन एयर ट्रैफिक सेफ्टी इलेक्ट्रॉनिक पर्सनल एसोसिएशन (इंडिया) ने कड़ा विरोध जताया है. एसोसिएशन के सेंट्रल काउंसिल मेंबर योगेंद्र गौतम ने इस संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन को पत्र लिखकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. पत्र में कहा गया है कि स्वतंत्र एयर नेविगेशन सर्विसेज़ ढांचा स्थापित किए बिना ATC सेवाओं का निजीकरण करना संस्थागत और सुरक्षा दोनों ही दृष्टियों से उचित नहीं होगा.
एसोसिएशन का कहना है कि एयर नेविगेशन सर्विसेज़, जिसमें ATC और कम्युनिकेशन, नेविगेशन व सर्विलांस सेवाएं शामिल हैं, को AAI से अलग करने का फैसला पहले ही सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया जा चुका है, लेकिन इसे अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है. ऐसे अधूरे ढांचे में निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना राष्ट्रीय क्षमता को कमजोर करने के बराबर होगा. पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि ATC जैसी अत्यंत सुरक्षा-संवेदनशील सेवाओं के विभाजन से जवाबदेही, संचालन की एकरूपता और सुरक्षा मानकों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
एसोसिएशन ने यह चिंता भी जताई कि पहले से उपलब्ध प्रशिक्षित और अनुभवी ANS कर्मियों की अनदेखी करने से देश की संप्रभु तकनीकी विशेषज्ञता को नुकसान पहुंच सकता है. संगठन ने मांग की है कि ANS को एक स्वतंत्र, स्वायत्त और सक्षम संस्था के रूप में स्थापित किया जाए, जिसे देश के सभी हवाई अड्डों पर ATC और CNS सेवाएं प्रदान करने का अधिकार हो, साथ ही AAI की भूमिका को भी स्पष्ट रूप से पुनर्परिभाषित किया जाए. पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि तय क्रम का पालन किए बिना निजीकरण को आगे बढ़ाया गया तो इससे संचालन से जुड़ी चुनौतियां बढ़ेंगी और पेशेवर समुदाय में असंतोष भी पैदा हो सकता है. एसोसिएशन ने इस पूरे मामले पर उच्चतम नीति स्तर पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की है.
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