Parenting Tips: आजकल बहुत से माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे हर चीज में सबसे आगे हों, पढ़ाई में टॉप करें, हर काम सही करें और किसी भी तरह की गलती न करें. लेकिन इसी सोच के चक्कर में कई बार वे अनजाने में बच्चों पर काफी दबाव डाल देते हैं और उन्होंने बहुत ज्यादा कंट्रोल करने लगते हैं, जिससे बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सेहत पर असर पड़ता है.
Over Parenting क्या है?
आज के दौर में हर माता पिता अपने बच्चे को दुनिया की तमाम सुख सुविधाएं और सफलता दिलाना चाहते हैं. इसी चाहत में कई बार वे अनजाने में ओवर पेरेंटिंग का शिकार हो जाते हैं. ओवर पेरेंटिंग का मतलब है बच्चे के जीवन में जरूरत से ज्यादा दखल देना और उसके हर छोटे बड़े फैसले खुद लेना. जब पेरेंट्स बच्चे की सुरक्षा को लेकर इतने ज्यादा फिक्रमंद हो जाते हैं कि उसे खुद की गलतियों से सीखने का मौका ही नहीं देते तो इसे हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग भी कहा जाता है. मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों को हर वक्त अपनी निगरानी में रखना या उनके लिए ढाल बने रहना उनके विकास के लिए हानिकारक हो सकता है.
बच्चों को ज्यादा कंट्रोल करने से क्या नुकसान होते हैं?
- बच्चों को ज्यादा कंट्रोल करने से उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर बुरा असर पड़ता है.
- जब बच्चों को अपनी पसंद के कपड़े पहनने, दोस्त चुनने या खाली समय बिताने की आजादी नहीं मिलती तो उनमें निर्णय लेने की क्षमता खत्म होने लगती है.
- ऐसे बच्चे बड़े होकर अक्सर दूसरों पर निर्भर रहते हैं और छोटी सी मुश्किल आने पर भी घबरा जाते हैं.
- ज्यादा सख्ती और कंट्रोल की वजह से बच्चों के मन में विद्रोह की भावना भी पनप सकती है या फिर वे बहुत ज्यादा दब्बू स्वभाव के हो सकते हैं.
बच्चों को कितना स्पेस देना चाहिए?
एक स्वस्थ परवरिश के लिए बच्चों को पर्याप्त स्पेस देना बहुत जरूरी है. बच्चों को स्पेस देने का मतलब उन्हें लावारिस छोड़ना नहीं है बल्कि उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि आप उनकी मदद के लिए मौजूद हैं लेकिन उन्हें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी. उन्हें छोटे छोटे जोखिम लेने दें और अपनी पसंद नापसंद को समझने का मौका दें. जब बच्चा खुद से कोई काम पूरा करता है तो उसे जो खुशी मिलती है वह उसके आत्मविश्वास को बढ़ाती है. उम्र के हिसाब से बच्चों को जिम्मेदारी देना और उनकी प्राइवेसी का सम्मान करना एक समझदार पेरेंट की पहचान है.
सही Parenting से कैसे बढ़ेगा बच्चों का कॉन्फिडेंस?
- सही पेरेंटिंग से बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए जरूरी है कि आप उनकी उपलब्धियों की तारीफ करें और उनकी नाकामियों में उनका साथ दें.
- जब पेरेंट्स बच्चों को यह अहसास कराते हैं कि उनका प्यार किसी शर्त पर आधारित नहीं है तो बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है.
- बच्चों की बात को ध्यान से सुनें और उनके विचारों को महत्व दें.
- इससे उन्हें महसूस होता है कि वे भी परिवार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
पेरेंट्स को किन आदतों से बचना चाहिए?
पेरेंट्स को कुछ खास आदतों से बचना चाहिए जैसे हर समय टोकाटोकी करना, दूसरे बच्चों से तुलना करना और अपनी अधूरी इच्छाओं को बच्चों पर थोपना. बच्चों पर हर वक्त पढ़ाई या बेहतर प्रदर्शन का दबाव डालना उन्हें तनाव की ओर धकेलता है. इसके अलावा बच्चों के सामने खुद को हमेशा सही साबित करने की जिद भी रिश्तों में दूरी पैदा करती है. एक अच्छा पेरेंट बनने के लिए जरूरी है कि आप पहले खुद एक अच्छे श्रोता बनें और बच्चे के साथ दोस्ती का रिश्ता कायम करें.
परफेक्ट बनाने के चक्कर में होती है गलती

परफेक्ट बनने की कोशिश में कई माता-पिता बच्चों की हर छोटी-बड़ी चीज पर नजर रखने लगते हैं कि वे क्या पढ़ रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं, क्या खेल रहे हैं और क्या पहन रहे हैं. धीरे-धीरे यह कंट्रोल इतना बढ़ जाता है कि बच्चा खुद फैसले लेना बंद कर देता है. उसमें आत्मविश्वास कम होने लगता है और वह हर बात के लिए माता-पिता पर निर्भर हो जाता है. यह स्थिति बच्चे के विकास के लिए ठीक नहीं होती.
बच्चों को स्पेस दें
बच्चों को भी गलती करने और उससे सीखने का मौका मिलना चाहिए. अगर हर बार माता-पिता ही सब कुछ तय करेंगे, तो बच्चा कभी खुद से सोचने और समझने की क्षमता नहीं विकसित कर पाएगा. इसलिए जरूरी है कि बच्चों पर पूरा कंट्रोल करने के बजाय उन्हें थोड़ा स्पेस दिया जाए.
भरोसा
पेरेंटिंग में सबसे जरूरी चीज है भरोसा. अगर आप अपने बच्चे पर भरोसा करेंगे, तो वह भी आपसे अपनी बातें शेयर करेगा. लेकिन अगर हर बात पर रोक-टोक होगी, तो बच्चा धीरे-धीरे आपसे चीजें छुपाने लगेगा. इसलिए बेहतर है कि बच्चों के साथ दोस्त की तरह उसके साथ पेश आएं. उससे पूछें कि उसका दिन कैसा रहा, उसे क्या अच्छा लगा और क्या नहीं.
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बच्चे की बात सुनें
इसके साथ ही बच्चों की भावनाओं को समझना भी बहुत जरूरी है. अगर बच्चा किसी बात से परेशान है, तो उसे तुरंत डांटने के बजाय उसकी बात सुनें. कई बार बच्चे चाहते हैं कि उनकी बातों को सुना जाए. ऐसे में अगर माता-पिता शांत होकर उनकी बात सुनते हैं, तो बच्चे को बहुत राहत मिलती है.
उम्मीदों का बोझ ना डालें
परफेक्ट पैरेंट बनने के चक्कर में अक्सर माता-पिता बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखने लगते हैं. हर बच्चा एक जैसा नहीं होता. किसी की पढ़ाई में रुचि होती है, तो किसी की खेल-कूद में. इसलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे की क्षमता और रुचि को समझें और उसी के हिसाब से उसे आगे बढ़ने दें.
माफी मांगे
इसके अलावा, अगर कभी आपसे भी गलती हो जाए, तो बच्चे से माफी मांगने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए. इससे बच्चा यह सीखता है कि गलतियां सभी से होती हैं और उन्हें सुधारना जरूरी है.


