नई दिल्ली:
Parking Online: दिल्ली, नोएडा-गाजियाबाद हो या लखनऊ-कानपुर जैसे दूसरे बड़े शहर, पार्किंग बड़ी परेशानी बन गई है. घरों की पार्किंग तो छोड़िए, बाजार, शॉपिंग कांप्लेक्स या अन्य सार्वजनिक स्थानों के आसपास पार्किंग मिलना टेढ़ी खीर है. बाजार में इधर-उधर कार पार्किंग पर कई बार ट्रैफिक पुलिसकर्मी बाइक या कार खिंचवाकर ले जाते हैं, जो खरीदारी करने गए परिवारों के लिए नई मुसीबत बनता है. बाजार-मॉल जैसी जगहों पर ऐसी पार्किंग को लेकर आम आदमी के क्या अधिकार हैं, वो कैसे इन अधिकारों का इस्तेमाल करें. अगर गलत ढंग से गाड़ी खींचकर ले जाने पर कार या बाइक जैसे वाहनों को नुकसान पहुंचता है तो वो कैसे मुआवजा ले सकता है, आइए जानते हैं.
कहां पार्किंग का अधिकार (Parking Rules)
आम नागरिक को बाजार, मॉल, सार्वजनिक सड़कें,अस्पताल,रेलवे स्टेशन,सरकारी कार्यालयों और व्यावसायिक परिसरों में पार्किंग का अधिकार है. इन जगहों से मनमाने और गैर कानूनी तरीके से वाहनों को नहीं हटाया जा सकता. मोटर वाहन अधिनियम, लोकल ट्रैफिक रूल्स के तहत ही एक्शन हो सकता है. वहां नो पार्किंग बोर्ड, रोड साइन या टो अवे (वाहन खींचकर ले जाने) की चेतावनी होनी चाहिए. कोर्ट ने अदालतों ने उन जगहों से टोइंग को गलत ठहराया है, जहां ऐसी पाबंदी को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं था.
मोटर वाहन कानून क्या है
मोटर वाहन अधिनियम 1988 (Motor ehicle Act) की धारा 122 में गलत गैरकानूनी पार्किंग से जुड़ी बातें हैं. इसमें वाहनों को खतरनाक स्थिति में, रोड को जाम करने या जनता की असुविधा बढ़ाते हुए सड़क पर छोड़ देने की मनाही शामिल हैं.मोटर वाहन चालक या मालिक ऐसे वाहन को सार्वजनिक स्थान पर ऐसी हालत में नहीं छोड़ेगा, जिससे ट्रैफिक में बाधा आए या सड़क इस्तेमाल करने वालों को दिक्कतें हों. मोटर वाहन कानून की धारा 127 के अनुसार, पुलिस को वाहन हटाने का अधिकार है. अगर गाड़ी लावारिस है,लापरवाही या गलत ढंग से पार्क की गई हो या फिर इससे ट्रैफिक जाम पैदा हो रहा हो. ट्रैफिक पुलिस अधिकारी वाहन को टो करने या हटाने का आदेश दे सकता है. गाड़ी मालिक को टोइंग शुल्क, पार्किंग फीस और गलत पार्किंग पर जुर्माना या चालान भरना पड़ेगा.
ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन खींचकर ले जाने का नियम
पुलिस आमतौर पर किसी वाहन को टो कर सकती है अगर वो व्यस्त बाजार, चौराहे, फ्लाईओवर, अस्पताल के गेट, बस स्टॉप आदि पर नो पार्किंग जोन में पार्क किया गया हो.अगर वो वाहन यातायात में बाधा उत्पन्न करता हो.सड़क पर आवाजाही रोकने या कई लेन को बंद करता हो तो टोइंग उचित है. अगर वाहन लावारिस हालात में बिना मालिक के खड़ा है. जले हुए, खराब या हादसे में टूटे फूटे वाहनों को भी हटाया जा सकता है. अगर वाहन किसी अंधे मोड़ पर, हाईवे किनारे, स्कूल-अस्पताल के गलत क्षेत्र में या आग जैसे हादसों से बचाव के रास्ते में खड़ा हो तो उसे हटाया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे और सड़कों पर ऐसी पार्किंग पर सख्त रुख दिखाया है.
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कब गाड़ी को टो नहीं कर सकते
अगर चालक उपस्थित है और वाहन हटाने को तैयार है तो ट्रैफिक पुलिसकर्मी गाड़ी खींचकर नहीं ले जा सकते. कोर्ट और ट्रैफिक गाइडलाइंस के अनुसार, अगर कार मालिक तुरंत उपस्थित होकर वाहन को हटा लेता है तो टोइंग का मतलब नहीं है.टोइंग से पहले अनाउंसमेंट के वक्त गाड़ी हटा ली जाए तो भी.
- ऐसे मामलों में भी गाड़ी खींचना गलत
- अगर वहां नो पार्किंग का सिग्नल न हो
- सड़क का निशान स्पष्ट न हो
- टो-अवे का कोई संकेत न लगाया गया हो
इन 5 बातों का ध्यान रखें
- हमेशा पार्किंग स्थल की तस्वीर लें
- भुगतान की गई पार्किंग पर्चियों को सुरक्षित रखें
- संभव हो तो डैशकैम/सीसीटीवी का उपयोग करें।
- आवश्यकता पड़ने पर टोइंग प्रक्रिया को शांतिपूर्वक रिकॉर्ड करें
- पुलिस अधिकारियों के साथ बहस या बाधा डालने से बचें.
ट्रैफिक पुलिस की मनमानी को चुनौती
अगर मनमाने ढंग से वाहन को खींचकर ले जाया गाय तो उसे चुनौती दी जा सकती है. असुरक्षित या अनुचित तरीके से टोइंग नहीं की जा सकती. हैंडब्रेक लगे वाहन को घसीटना,सस्पेंशन को नुकसान पहुंचाना, दोपहिया वाहनों को अनुचित तरीके से उठाना, ऑटोमैटिक कारों को गलत तरीके से टो करना गैरकानूनी है. अगर वाहन में यात्री हों, बच्चे-बुजुर्ग हों, पालतू जानवर हों तो गाड़ी खींचने को गंभीर लापरवाही या दुर्व्यवहार माना जा सकता है.
पुलिस वाहन खींच ले जाए तो क्या करें
सबसे पहले वाहन की लोकेशन का पता लगाएं. ट्रैफिक पुलिस हेल्पलाइन, स्थानीय पुलिस स्टेशन, ई-चालान पोर्टल या टोइंग यार्ड (गाड़ी खींचकर ले जाने के बाद रखने वाला स्थान) की जानकारी लें.चालान की प्रति, टोइंग का कारण, फोटो/वीडियो सबूत और टोइंग रसीद मांगें. कुछ शहरों में अब टोइंग से पहले फोटो एविडेंस अनिवार्य किया गया है. अगर आपको लगता है कि टोइंग गलत है तो जुर्माना अदा कर वाहन वापस लें और फिर टोइंग को कोर्ट या अन्य जगहों पर चुनौती दें.
टोइंग के दौरान वाहन को नुकसान पहुंचे तो क्या करें
अगर टोइंग के कारण कार या बाइक में खरोंच, बंपर टूट जाए, सस्पेंशन या गियरबॉक्स में खराबी आ जाए, पहिये मुड़ जाएं तो आप मुआवज़ा मांग सकते हैं.वाहन क्षतिपूर्ति के लिए कानूनी उपायों के तहत यातायात अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराएं. डीसीपी ट्रैफिक, पुलिस आयुक्त, नगरपालिका प्राधिकरण और टोइंग ठेकेदार प्राधिकरण को भी ये शिकायत भेजें.
शिकायत के साथ फोटोग्राफ, मरम्मत बिल, सीसीटीवी फुटेज (उपलब्ध हो तो) और टोइंग रसीद भेजें. अगर सुनवाई न हो तो कंज्यूमर फोरम जा सकते हैं. उपभोक्ता आयोग में सेवा में कमी, लापरवाही, अवैध वसूली, उत्पीड़न के आधार पर मुआवजा मांग सकते हैं.
अदालत में मुकदमे का विकल्प
आप इन उपायों के अलावा क्षतिपूर्ति के लिए दीवानी मुकदमा दायर कर सकते हैं. टोइंग ठेकेदार, नगर निगम या नगरपालिका, यातायात विभाग को क्षतिपूर्ति के लिए कोर्ट में प्रतिवादी बना सकते हैं. हाईकोर्ट में रिट याचिका लगा सकते हैं. मनमानी टोइंग, सत्ता का दुरुपयोग, अवैध जुर्माने और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठा सकते ैहं.
वाहनों की पार्किंग पर कोर्ट का आदेश
एमसी मेहता बनाम भारत संघ केस में सुप्रीम कोर्ट ने जनहित में सख्त यातायात नियमों और अवैध पार्किंग को हटाने पर जोर दिया है.मनमानी टोइंग पर हाईकोर्ट ने दिशानिर्देश दिए हैं.
कोर्ट के अहम कानूनी सवाल
1. क्या वाहन को खींचना कानूनी रूप से उचित था?
यदि वाहन को खींचना अवैध/मनमाना था, तो मुआवजा मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है.
2. क्या वाहनों को क्षति अपरिहार्य थी?
क्या वाहन मालिक ने जानबूझकर बाधा उत्पन्न की है और जबरन एक्शन में वाहन को नुकसान पहुंचा है. यदि कोई कार भीड़भाड़ वाले अवैध पार्किंग स्थल में बुरी तरह फंसी हुई है और कानूनी रूप से हटाने के दौरान बंर पर मामूली खरोंच आ जाती है, तो कोर्ट मुआवज़ा देने से इनकार कर सकते हैं.
3. क्या अधिकारियों ने उचित सावधानी बरती?
टोइंग के दौरान अक्सर ये सवाल उठते हैं कि क्या टोइंग के दौरान व्हील डॉली का उपयोग किया गया. आवश्यकतानुसार फ्लैटबेड टोइंग का उपयोग करना जरूरी है, ताकि वाहन को घसीटने से बचाया जा सके. क्या ट्रैफिक नियमों का इस कार्यवाही में पालन किया गया. क्या ट्रेन्ड कर्मियों ने वाहन टो किया. अगर ऐसा नहीं किया है तो अवैध पार्किंग के बावजूद वाहन मालिक को कोर्ट से राहत दी जा सकती है. भले ही पार्किंग में वाहन मालिक की गलती हो, अगर ट्रैफिक अधिकारी द्वारा नियमों का पालन नहीं किया गया है तो भी मुआवजा दिया जा सकता है. अगर टोइंग, जुर्माना और चालान ट्रैफिक पुलिस का हक है तो अत्यधिक बल प्रयोग, लापरवाही, अधिकारियों का दुरुपयोग होने पर वाहन मालिक भी मुआवजे का हकदार है.


