प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण से जुड़े नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर संसद में चल रही चर्चा को लेकर सभी राजनीतिक दलों से भावनात्मक और संवेदनशील अपील की है. पीएम मोदी ने X पर लंबा संदेश लिखते हुए कहा कि संसद में इस विषय पर गहन चर्चा हो चुकी है और सभी भ्रम, आशंकाओं तथा सवालों का तर्कपूर्ण जवाब दिया जा चुका है.
संसद में इस समय नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा चल रही है। कल रात भी एक बजे तक चर्चा चली है।
जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है। हर आशंका का समाधान किया गया है। जिन जानकारियों का अभाव था, वो जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं। किसी के मन…— Narendra Modi (@narendramodi) April 17, 2026
प्रधानमंत्री ने बताया कि महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा बीती रात एक बजे तक चली, जिसमें सदन के सदस्यों द्वारा उठाए गए हर सवाल और शंका का समाधान किया गया. उन्होंने कहा कि जिन जानकारियों का अभाव था, वे भी सभी सांसदों को उपलब्ध कराई गईं और जिन मुद्दों को लेकर किसी भी प्रकार का विरोध या असमंजस था, उन पर खुलकर चर्चा हुई.
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश में पिछले चार दशकों से राजनीति होती रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि देश की आधी आबादी को उसका अधिकार मिले. उन्होंने कहा कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में सीमित प्रतिनिधित्व लोकतंत्र की आत्मा के अनुरूप नहीं है.
प्रधानमंत्री ने सांसदों को याद दिलाया कि लोकसभा में अब कुछ ही देर में मतदान होने वाला है और यह क्षण न केवल राजनीतिक बल्कि ऐतिहासिक महत्व का है. उन्होंने सभी दलों से आग्रह करते हुए कहा कि वे पूरी सोच-विचार और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लें और महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें.
पीएम मोदी ने कहा कि वह यह अपील केवल प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं, माताओं, बहनों और बेटियों की ओर से कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि सदन में ऐसा कोई कदम न उठाया जाए, जिससे नारीशक्ति की भावनाएं आहत हों.
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज देश की करोड़ों महिलाओं की नजरें संसद के सदस्यों पर टिकी हैं. उनकी दृष्टि हमारी नीयत पर है, हमारे निर्णय पर है और हमारे आचरण पर है.
प्रधानमंत्री ने अंत में सभी सांसदों से एक बार फिर अपील की कि वे नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का समर्थन करें और भारत की महिलाओं को उनके लंबे समय से प्रतीक्षित अधिकार दिलाने में अपनी भूमिका निभाएं.


