Sparrow Haveli: कभी हमारे आंगन में फुदकने वाली गौरैया आज कंक्रीट के जंगलों में ‘इंपॉसिबल’ जैसा शब्द बन गई है. बड़े शहरों में तो लगभग इनका नामो निशान तक मिट गया है. मोबाइल टावर का रेडिएशन और कंक्रीट के मकानों ने इस नन्ही चिड़िया से उसका आशियाना छीन लिया है, लेकिन मुरादाबाद की एक हवेली से जो वीडियो सामने आया है, वो इस कड़वे सच को चुनौती दे रहा है.
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पंखे हटाए, सुकून बसाया (Bird friendly home)
इस घर के मालिक ने जब गौरैयों को शहर से गायब होते देखा, तो उन्होंने इसे एक निजी चुनौती की तरह लिया. शुरुआत में उन्होंने हवेली से सारे सीलिंग फैन निकलवा दिए, ताकि उड़ान भरती चिड़ियों को चोट न लगे. एक हादसे के बाद उन्होंने एसी का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया. आज वहां सिर्फ जालीदार कूलर हैं, जहां चिड़ियां बेखौफ होकर अपनी दुनिया बसाती हैं.
यहां गौरैयों की जमी है महफिल (Save sparrows)
यह नजारा किसी नेशनल ज्योग्राफिक की डॉक्यूमेंट्री जैसा है. घर की खिड़कियों से लेकर छत के हर कोने तक गौरैयों के लिए विशेष खांचे बनाए गए हैं. यहां रहने वाले परिवार का कहना है कि, अब घर के सदस्य से ज्यादा चिड़ियां यहां की मालिक हैं. सुबह शाम जब हजारों चिड़ियाएं एक साथ चहचहाती हैं, तो माहौल किसी संगीत की महफिल सा बन जाता है.
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क्या कह रही है सोशल मीडिया की जनता? (Moradabad gauraiya haveli)
इस खबर के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की बाढ़ आ गई है. किसी ने लिखा, ‘ये है असली संरक्षण’, तो कोई कह रहा है कि ‘हमें भी अपने घर को ऐसा ही बनाना चाहिए.’ लोगों के कमेंट्स साफ बता रहे हैं कि वे भी गौरैया की चहचहाहट को अपने आंगन में वापस चाहते हैं. यह हवेली आज सिर्फ एक ईंट पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि गौरैया को बचाने का एक ब्लूप्रिंट बन चुकी है. मुरादाबाद की यह हवेली ये मैसेज दे रही है कि प्रकृति को बचाने के लिए बड़ी संस्थाओं की नहीं, बल्कि एक बड़ी सोच की जरूरत होती है. अगर हम अपनी छोटी छोटी सुख सुविधाओं से समझौता कर लें, तो गौरैया जैसी खूबसूरत प्रजाति को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है.
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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)


