क्या बीजेपी लगा पाएगी ‘दीदी’ के गढ़ में सेंध, टूटेगा वोटिंग का पिछला रिकॉर्ड? बंगाल में आज ‘फाइनल फाइट’

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पश्चिम बंगाल में दूसरे और आखिरी चरण के लिए आज यानी 29 अप्रैल को मतदान होगा. इसके लिए तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं. राजधानी कोलकाता समेत छह जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर आज वोट डाले जाएंगे. इस चरण में 3.21 करोड़ से अधिक मतदाता 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. आज होने वाला मतदान तय करेगा कि क्या तृणमूल कांग्रेस दक्षिण बंगाल के अपने गढ़ को बरकरार रख पाती है या बीजेपी इसमें सेंध लगाकर सत्ता तक पहुंचने में सफल होती है.

TMC के गढ़ पर होगा कड़ा मुकाबला

पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान में इस बात की परीक्षा हुई कि उत्तर बंगाल और आस-पास के जिलों में बीजेपी अपनी पारंपरिक बढ़त को बरकरार रख सकी है या नहीं और अब दूसरे चरण में तृणमूल कांग्रेस के गढ़ कोलकाता, हावड़ा, उत्तर-दक्षिण 24 परगना, नदिया, हुगली और पूर्वी बर्धमान के मुकाबलों पर नजर रहेगी. दूसरे चरण में जिन 142 सीट पर मतदान होना है, उनमें से तृणमूल कांग्रेस ने 2021 में 123 सीट जीती थीं, बीजेपी ने सिर्फ 18 और आईएसएफ ने एक सीट हासिल की थी।

पांच साल पहले भाजपा के आक्रामक प्रचार अभियान के बावजूद ममता बनर्जी की टीएमसी ने दक्षिण बंगाल में शानदार प्रदर्शन किया और राज्य की सत्ता पर अपना कब्जा बरकरार रखा. इस नतीजे ने स्पष्ट कर दिया कि अगर आपको पश्चिम बंगाल की सत्ता चाहिये, तो दक्षिण बंगाल को जीतना सबसे जरूरी है. भवानीपुर विधानसभा सीट पर भी इसी चरण में मतदान होना है, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गढ़ है और बीजेपी ने यहां नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है.

बीजेपी के लिए असली परीक्षा यहीं

बीजेपी के लिए दूसरा चरण केवल अंतिम दौर का मतदान नहीं है, बल्कि यह इस बात की असली परीक्षा है कि क्या सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के आरोप और नागरिकता की राजनीति सत्ताधारी दल की सबसे मजबूत दीवार में सेंध लगा सकती है. टीएमसी के लिए इस क्षेत्र पर अपनी पकड़ बरकरार रखना अहम है, जिससे उसके लगातार चौथी बार सत्ता में आने का रास्ता साफ होगा.

टीएमसी के एक सीनियर नेता ने कहा, ‘यह हमेशा से हमारा मजबूत गढ़ रहा है और 2021 विधानसभा से लेकर 2024 के लोकसभा चुनावों में भी यहां के लोगों ने हमारा साथ दिया. अगर हम इस क्षेत्र में फिर से जीत दर्ज करते हैं, तो बंगाल में ममता बनर्जी की ही सरकार बनेगी.’ वहीं बीजेपी के एक नेता ने कहा, ‘दक्षिण बंगाल के किले को ध्वस्त किये बिना हम सत्ता तक नहीं पहुंच सकते. उत्तर 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा ही असली चुनावी युद्ध मैदान हैं. बदलाव यहीं से होगा.’

क्यों अहम हैं यह 142 सीटें?

भौगोलिक स्थिति इसकी अहमियत को स्पष्ट करती है. उत्तर 24 परगना में विधानसभा की 33 सीट, दक्षिण 24 परगना में 31, हावड़ा में 16, नदिया में 17, हुगली में 18, पूर्वी बर्धमान में 16 और कोलकाता में 11 सीट हैं. सीटों का यही गणित बताता है कि क्यों बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने प्रचार के अंतिम चरण में इन जिलों पर खास ध्यान केंद्रित किया और रैलियों व रोड शो के जरिए भ्रष्टाचार, घुसपैठ, चुनाव बाद हिंसा तथा महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. साथ ही, बनगांव के मतुआ ठाकुरबाड़ी जाकर प्रतीकात्मक रूप से इस समुदाय के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश भी की.

राज्य में पहले चरण में 93.19 प्रतिशत मतदान दर्ज होने के बाद बनर्जी ने दावा किया था कि तृणमूल कांग्रेस पहले ही 100 सीट का आंकड़ा पार कर चुकी है. यह राज्य में अब तक का सबसे अधिक मत प्रतिशत है. 

SIR ने नाम हटाए जाने के मुद्दे को दूसरे चरण का संभवत: सबसे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बना दिया है. उत्तर 24 परगना में वोटर लिस्ट से 12.6 लाख से अधिक नाम हटाए गए, दक्षिण 24 परगना में 10.91 लाख से अधिक, कोलकाता में लगभग 6.97 लाख, हावड़ा में लगभग छह लाख, हुगली में 4.68 लाख और नादिया में लगभग 4.85 लाख नाम हटाए गए. कम से कम 25 विधानसभा क्षेत्रों में हटाए गए नामों की संख्या पिछली जीत के अंतर से कहीं अधिक है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में जीत का अंतर हटाए गए नामों की तुलना में कम है, वहां SIR न केवल चुनाव परिणामों को, बल्कि चुनाव के बाद के विमर्श को भी बदल सकता है.
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भवानीपुर सीट पर प्रतिष्ठा की जंग

इस व्यापक मुकाबले के बीच भवानीपुर सीट प्रतिष्ठा का केंद्र बनी हुई है. इसे नंदीग्राम की तरह ही देखा जा रहा है, जहां 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था. अब पांच साल बाद यह सियासी जंग टीएमसी प्रमुख के गढ़ तक पहुंच गई है. तृणमूल कांग्रेस के लिए भवानीपुर सीट बचाए रखना बनर्जी की राजनीतिक पकड़ को बनाए रखने और प्रतिष्ठा का सवाल है. वहीं, भाजपा के लिए इस किले को ढहाने का मतलब बंगाल की सबसे शक्तिशाली नेता के ‘अजेय’ होने के मिथक को तोड़ना होगा. कोलकाता नगर निगम के आठ वार्डों में फैली भवानीपुर सीट को अक्सर ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है, जहां बंगाली, गुजराती, मारवाड़ी, जैन, सिख, मुस्लिम और बिहार-झारखंड से आए प्रवासी समुदायों की विविध आबादी रहती है.

दूसरे चरण के चुनाव की खास बातें 

बंगाल में आज जिन 142 सीटों पर वोटिंग होनी है उनमें कुल 3 करोड़ 21 लाख 7 हजार 837 वोटर्स हैं. इनमें 1.64 करोड़ पुरुष, 1.57 करोड़ महिला और 792 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं.  मतदाताओं में 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के 3,243 वोटर हैं, जबकि 85 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या 1.96 लाख है. इसके अलावा 146 एनआरआई वोटर और 39,961 सर्विस वोटर भी इस चरण में मतदान करेंगे.

इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 1,228 पुरुष और 220 महिला उम्मीदवार शामिल हैं. 142 सीटों में से 107 सामान्य श्रेणी की हैं, जबकि 34 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) और एक सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित है. दक्षिण 24 परगना जिले की भांगर सीट पर सबसे ज्यादा 15 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जबकि हुगली जिले की एक सीट पर सबसे कम पांच उम्मीदवार हैं.

कोलकाता के अलावा जिन जिलों में मतदान होगा उनमें नदिया, पूर्व बर्धमान, हुगली, दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और हावड़ा शामिल हैं. कुल 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 39,301 मुख्य और 1,700 सहायक मतदान केंद्र हैं. सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है. मतदान शांतिपूर्ण कराने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. केंद्रीय बलों की 2,407 कंपनियां तैनात की गई हैं. इनके अलावा पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस के जवान भी सुरक्षा में लगाए जाएंगे.

(एजेंसी के इनपुट के साथ)

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