पंजाब में 26 मई को स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाएंगे, जबकि परिणाम 29 मई को घोषित किए जाएंगे. इस चुनाव में राज्य के 8 नगर निगम—मोहाली, बठिंडा, अबोहर, बरनाला, कपूरथला, मोगा, बटाला और पठानकोट-सहित कुल 103 नगर निकायों में मतदान होगा, जिसमें 75 नगर परिषद और 20 नगर पंचायतें शामिल हैं. वहीं, हिमाचल प्रदेश में 3,754 ग्राम पंचायतों के चुनाव 26, 28 और 30 मई को तीन चरणों में होंगे.
पंजाब और हिमाचल में चुनावी सरगर्मी तेज
इस चुनाव में हजारों उम्मीदवार मैदान में हैं और शहरी मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे. चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह बैलेट पेपर के जरिए कराई जाएगी, जिसे लेकर पहले विवाद भी हुआ. लेकिन अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. राज्यभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बड़ी संख्या में पुलिस और चुनाव कर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके.
पंजाब की राजनीति के लिहाज से यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसे आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल भी कहा जा रहा है. सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। यह चुनाव शहरी क्षेत्रों में जनता के रुझान को भी तय करेगा और सरकार के कामकाज पर जनमत का संकेत देगा.
हिमाचल में तीन चरणों में पंचायत चुनाव
वहीं, हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव 26, 28 और 30 मई को तीन चरणों में कराए जाएंगे. ये चुनाव राज्य की 3,754 ग्राम पंचायतों में होंगे, जिसमें लगभग 50.79 लाख मतदाता हिस्सा लेंगे. इनमें बड़ी संख्या में महिला मतदाता और 52 हजार से ज्यादा पहली बार वोट देने वाले युवा भी शामिल हैं. इन चुनावों में कुल 31,182 पदों के लिए मतदान होगा, जिनमें ग्राम पंचायत सदस्य, प्रधान, उप-प्रधान, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य शामिल हैं. यह चुनाव राज्य के ग्रामीण प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनसे गांव स्तर पर नेतृत्व तय होता है और विकास योजनाओं का दिशा-निर्धारण होता है.
हालांकि, राज्य के सभी स्थानों पर चुनाव नहीं हो पाएंगे. 75 में से करीब 22 शहरी निकायों में मतदान नहीं होगा, क्योंकि इनके लिए आवश्यक आरक्षण रोस्टर सरकार द्वारा समय पर जारी नहीं किया गया. ऐसे में निर्वाचन आयोग ने अन्य क्षेत्रों में चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य निर्वाचन आयोग को 31 मई तक पंचायत चुनाव पूरा करने का निर्देश दिया है, जिसके चलते समयसीमा के भीतर चुनाव कराना जरूरी हो गया है.
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