अगर जानवर भी इंसानों की तरह जंक फूड खाकर पेट खराब कर लें तो क्या करेंगे? जिब्राल्टर में रहने वाले बंदरों ने इसका अनोखा तरीका खोज लिया है. जिब्राल्टर की चट्टान पर रहने वाले बार्बरी मकाक बंदरों के झुंड ने मिट्टी खाना सीख लिया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि वे ऐसा अपने पेट को ठीक करने के लिए करते हैं, क्योंकि उन्हें पर्यटकों से बहुत ज्यादा जंक फूड मिलता है- और कभी-कभी वे खुद भी चुरा लेते हैं.
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार रिसर्चर्स ने इस मिट्टी खाने की आदत को देखा, जिसे “जियोफैगी” कहा जाता है. यह तब सामने आया जब वे उस इलाके में रहने वाले बार्बरी मकाक बंदरों के समूहों का अध्ययन कर रहे थे. उन्होंने पाया कि जो बंदर पर्यटकों के ज्यादा संपर्क में आते हैं, वे सबसे ज्यादा मिट्टी खाते हैं. छुट्टियों के मौसम में यह और बढ़ जाता है.
जिब्राल्टर में लगभग 230 मकाक बंदर रहते हैं, जो 8 अलग-अलग समूहों में बंटे हैं. स्थानीय अधिकारी उन्हें रोज फल, सब्जियां और बीज देते हैं. लेकिन पर्यटक अक्सर उन्हें चिप्स के पैकेट, चॉकलेट, एम एंड एम्स और आइसक्रीम जैसे स्नैक्स भी खिला देते हैं. यह स्टडी साफ तौर पर यह नहीं बताता कि बंदर मिट्टी क्यों खाते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर उनके पाचन तंत्र को बचाने में होता है. जिन बंदरों का समूह पर्यटकों से दूर रहता है, उन्हें मिट्टी खाते हुए नहीं देखा गया.
बता दें कि दुनिया में इंसान भी मिट्टी खाते हैं, खासकर अफ्रीका, एशिया और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में गर्भवती महिलाएं. वे ऐसा उल्टी (मितली) कम करने या जरूरी खनिज पाने के लिए करती हैं. लेकिन रिसर्चर्स ने बंदरों में गर्भवती या दूध पिलाने वाली मादाओं में मिट्टी खाने की आदत ज्यादा नहीं देखी, जिससे पता चलता है कि यह सिर्फ पोषण की कमी पूरी करने के लिए नहीं है. इसके बजाय, लेमोइन ने कहा कि बंदर मिट्टी खाकर अपने पाचन तंत्र को “संतुलित” रखते हैं. वे ऐसा हाई-एनर्जी और कम फाइबर वाले जंक फूड के असर से बचने के लिए करते हैं, जो कुछ प्राइमेट्स में पेट खराब कर सकता है.


