नई दिल्ली:
Bakrid Qurbani Rules: बकरीद में कुर्बानी को लेकर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत कई राज्यों की सरकारों ने गाइडलाइन और एडवाइजरी जारी की है. खुले में कुर्बानी पर रोक है, साथ ही गाय, ऊंट और बछड़े जैसे जानवरों की कुर्बानी देने की भी सख्त मनाही है. यूपी में प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, संभल समेत कई शहरों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टीम ने फ्लैग मार्च किया है.हालांकि सबसे ज्यादा तकरार कॉलोनी और सोसायटी में बकरीद पर कुर्बानी को लेकर हो रही है. इसको लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं. दिल्ली में अजमेरी गेट से जामा मस्जिद तक फ्लैग मार्च हुआ है. मुंबई में मीरा भायंदर, घाटकोपर जैसे इलाकों की सोसायटी में कुर्बानी को लेकर विरोध खुलकर सामने आ गया है. हाउसिंग सोसायटी और अपार्टमेंट्स में बकरीद (ईद-उल-अजहा) पर कुर्बानी को लेकर कानून, नगर निगम और हाईकोर्ट के आदेशों के तहत बेहद सख्त नियम तय हैं.
फ्लैट के अंदर कुर्बानी पर पूरी तरह रोक (Bakrid Qurbani Rules 2026)
बॉम्बे हाईकोर्ट और अन्य निकाय एजेंसियों के महत्वपूर्ण आदेशों के अनुसार, बकरीद पर किसी भी व्यक्तिगत फ्लैट या आवासीय इमारत के अंदर पशु की कुर्बानी देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है.कोर्ट का स्पष्ट मानना है कि घनी आबादी वाली सोसायटी के छोटे फ्लैट में बुजुर्गों और बच्चों की सेहत, सफाई और निकासी की व्यवस्था के लिहाज से फ्लैट के भीतर कुर्बानी की इजाजत नहीं दी जा सकती.
सोसाइटी के कॉमन एरिया के नियम
अगर कोई सोसाइटी अपने परिसर के भीतर किसी खुली जगह या कॉमन एरिया में सामूहिक कुर्बानी का आयोजन करना चाहती है, तो उसके नियम अलग हैं. सोसाइटी की आरडब्ल्यूए (RWA) या आयोजकों को नगर निगम, स्थानीय प्रशासन से बाकायदा एनओसी लेनी होती है. अदालती दिशानिर्देशों के अनुसार, हाउसिंग सोसाइटी से 1 किलोमीटर की दूरी के भीतर कोई कम्युनिटी बूचड़खाना या धार्मिक या सामूहिक कुर्बानी स्थल मौजूद है तो नगर निगम उस सोसाइटी परिसर के अंदर कुर्बानी की अनुमति नहीं दे सकता. किसी अन्य धर्म के पूजा स्थल या खुली आवाजाही वाले रास्ते के ठीक सामने कुर्बानी नहीं होना चाहिए.
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— NDTV India (@ndtvindia) May 27, 2026
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वेस्ट मैनेजमेंट और साफ-सफाई
दिल्ली समेत कई राज्य सरकारों की इस पर गाइडलाइन है. कुर्बानी के बाद पशु के खून को खुले नालों या सीवर में बहाना और बचे हुए अवशेषों को सार्वजनिक कचरे के डिब्बों, सड़कों या सोसायटियों के डस्टबिन में फेंकना पूरी तरह प्रतिबंधित है. आरडब्ल्यूए और आयोजकों को यह सुनिश्चित करना होता है कि वेस्ट को नगर निगम की गाड़ियों या निर्धारित डंपिंग साइट तक सुरक्षित और कवर्ड तरीके से पहुंचाया जाए.
RWA और सोसाइटी के नियम
हर कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के अपने नियम भी होते हैं. अगर सोसाइटी की RWA ने परिसर के अंदर किसी भी तरह के धार्मिक या अन्य आयोजन में पशु लाने या वहां अस्थायी शेड (बाड़ा) बनाने पर रोक लगाई है, तो निवासियों को सोसाइटी के नियमों का पालन करना जरूरी है.विवाद से बचने के लिए नगर निगम के तयशुदा स्थानों, ईदगाह या चिन्हित कसाईखानों पर जाकर ही यह रस्म पूरी करते हैं.
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हिंदू पक्ष की राय
- जानबूझकर नई परंपरा शुरू की गई
- सोसायटी में शेड हटाने के बाद फिर से बनाया गया
- खुले में कुर्बानी से किसी की भावनाएं आहत करने की इजाजत नहीं
- खुले परिसर में कुर्बानी के लिए शेड बनाना गलत
- कॉमन एरिया में कुर्बानी नहीं दे सकते
- शेड बनाना नियमों के खिलाफ
मुस्लिम पक्ष का तर्क
- हर साल बकरे के लिए शेड मिलता था
- इस साल बिल्डर ने शेड देने से मना किया
- मजबूरी में बकरे परिसर में लाने पड़े हैं
- त्योहार मनाने का सबको अधिकार
- कानून सोसायटी के नियमों का सम्मान
- नियमों के मुताबिक होगी कुर्बानी
- वैध बूचड़खानों में ही कुर्बानी
यूपी में खुले स्थानों पर पशुओं की कुर्बानी बैन
प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी नहीं होगी
सड़क जाम करने की अनुमति नहीं
तय स्थानों पर ही आयोजन कराए जाएं
नई जगहों पर कुर्बानी नहीं की जाएगी
नियमों का पालन न करने पर सख्त कार्यवाही
दिल्ली सरकार की बकरीद पर गाइडलाइंस
- सड़कों पर नमाज नहीं होगी
- प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी बैन
- 13 रैपिड रिस्पांस टीम तैनात
- गाय, बछड़ा ऊंट की कुर्बानी नहीं
- खरीद बिक्री निश्चित स्थानों पर ही होगी


