बाबा वेंगा के बाद अब जेफरी सैक्स ने दी विश्वयुद्ध की चेतावनी, बताया कैसे बन रहा माहौल

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बुल्गारियाई ज्योतिषी बाबा वांगा को कई लोग ‘बाल्कन का नोस्ट्राडेम्स’ भी कहते हैं. बाबा वेंगा ने 9/11 हमलों, राजकुमारी डायना की मौत और चीन के उदय जैसी घटनाओं की सटीक भविष्यवाणी की थी. हालांकि, बाबा वांगा का 1996 में 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया, लेकिन उनकी भविष्यवाणियां आज भी लोगों के लिए रहस्य का विषय बनी हुईं हैं. इसी साल जनवरी में न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाबा वांगा ने कथित तौर पर 2026 में तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत और मानव जाति का अलौकिक प्राणियों से पहला सामना होने की भविष्यवाणी की थी.

बाबा वेंगा की चेतावनी

बाबा वेंगा ने चेतावनी दी थी, “मानव जाति का अलौकिक जीवन से संपर्क होगा, जिससे संभवतः दुनिया पर संकट या प्रलय आ सकती है.” चीन का ताइवान पर लगातार सैन्य दबाव और ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बाबा वेंगा की तीसरे विश्व युद्ध की भविष्यवाणी को बिल्कुल खारिज तो कोई भी नहीं कर सकता. हालांकि, बाबा वेंगा की भविष्यवाणी के अनुसार तीसरा विश्व युद्ध इसी वर्ष शुरू होगा, लेकिन इससे मानवता का विनाश होने की संभावना नहीं है. उनकी पिछली भविष्यवाणियों में कहा गया था कि मानवता का पतन पिछले वर्ष ही शुरू हो गया था और दुनिया का आधिकारिक अंत 5079 में होगा.

कौन हैं जेफरी सैक्स

अब कोलंबिया विश्वविद्यालय (न्यूयॉर्क) के सतत विकास केंद्र के निदेशक और एक प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री प्रोफेसर जेफरी सैक्स ने कहा है कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान फिर से शुरू नहीं करना चाहिए क्योंकि यह संघर्ष अनियंत्रित रूप से बढ़कर विश्व युद्ध में तब्दील हो सकता है. तास न्यूज एजेंसी के अनुसार, पत्रकार टकर कार्लसन को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “हमें सीधे बमबारी और नए सिरे से सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए. यह एक बहुत बड़ी संभावना है. और मेरी राय में, दूसरी संभावना यह है कि यह संघर्ष अनियंत्रित रूप से बढ़कर एक बड़े युद्ध में तब्दील हो जाए, जो क्षेत्रीय युद्ध बन जाएगा और फिर विश्व युद्ध का रूप ले सकता है.”

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जेफरी सैक्स की चेतावनी

विशेषज्ञ ने आगे कहा कि अगर ईरान पर हमले फिर से शुरू होते हैं, तो तेहरान “जवाबी हमला करेगा, और बहुत ही जोरदार और तेजी से जवाबी हमला करेगा.” उन्होंने आगे कहा, “28 फरवरी से, इस युद्ध की शुरुआत से, हम सभी ने यह भी सीखा है कि पूरा खाड़ी क्षेत्र ईरान की मिसाइलों के हमले की चपेट में है, और वास्तव में इजरायल भी. हमें यह भी समझ में आया है कि मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स कई क्षेत्रों में कमजोर, सीमित और यहां तक कि क्षीण भी हो चुकी हैं. लेकिन हम जानते हैं कि खाड़ी क्षेत्र में स्थित विलवणीकरण संयंत्र, तेल और गैस क्षेत्र, बंदरगाह सुविधाएं, ईरानी हमलों से व्यवस्थित और व्यापक रूप से सुरक्षित नहीं हैं, और ईरान ट्रंप द्वारा बार-बार दी गई धमकियों, यानी ईरान के विनाश का पूरी तरह से, स्वाभाविक रूप से जवाब देगा.”

रूस-यूरोप में बढ़ी दुश्मनी

जेफरी सैक्स की बात को गंभीरता से इसलिए से लिया जा सकता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध जो ट्रंप के आने के बाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा था, वो भी अब तेज गति पकड़ सकता है. यूरोपीय संघ ने कल ही यूक्रेन की आर्थिक और सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशाल लोन पैकेज को मंजूरी दे दी. यह मंजूरी ब्लॉक की साइप्रस अध्यक्षता में हंगरी द्वारा वीटो हटाने के बाद दी गई. जेलेंस्की ने गुरुवार को यूरोपीय संघ द्वारा यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो (105 अरब डॉलर) के लोन को मंज़ूरी दिए जाने का स्वागत किया. जाहिर है जेलेंस्की इस पैसे का इस्तेमाल रूस के खिलाफ करेंगे और शांति की उम्मीदें इसे कमजोर होंगी. रूस-अमेरिका फिलहाल धीरे-धीरे करीब आते दिख रहे हैं. वहीं यूरोप और अमेरिका में दूरियां बढ़ती जा रही हैं. ट्रंप तो नाटो छोड़ने तक की बात कर रहे हैं. ऐसे में रूस और यूरोप के बीच सीधे युद्ध शुरू होने का भी खतरा है. यूरोप लगातार रूस को अपने लिए खतरा बताने भी लगा है.

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अमेरिका-चीन का टकराव बढ़ा

वहीं अमेरिका और चीन का कोल्ड वॉर लगातार जारी है. आज ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की एक समिति ने चीन की उन्नत सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी तक पहुंच को सीमित करने के उद्देश्य से 20 नए निर्यात नियंत्रण उपायों को मंजूरी दे दी है. सूचनाओं के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति ने इस सप्ताह की शुरुआत में इन प्रस्तावों को समिति चरण से आगे बढ़ाया, जिससे प्रतिनिधि सभा में आगे विचार-विमर्श का मार्ग प्रशस्त हुआ. इन उपायों में रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइकल बॉमगार्टनर द्वारा पेश किया गया प्रस्तावित मैच एक्ट भी शामिल है, जिसका उद्देश्य चीन को उन्नत सेमीकंडक्टर विनिर्माण उपकरणों के निर्यात पर वाशिंगटन के प्रतिबंधों के साथ अमेरिकी सहयोगियों को और अधिक निकटता से जोड़ना है.
बॉमगार्टनर के हवाले से कहा गया है कि चीन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह उन प्रौद्योगिकियों पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उसकी राष्ट्रीय रक्षा दोनों का आधार हैं. अगर चीन-अमेरिका में इसी तरह दुश्मनी बढ़ती रही तो जाहिर है ताइवान का मसला और बड़ा हो सकता है.

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