पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर अब पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. पहले से ही भारी कर्ज और महंगाई के बोझ तले दबी पाकिस्तान की अवाम को शहबाज शरीफ सरकार ने एक और करारा झटका दिया है. गुरुवार देर रात सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया, जिसके बाद अब पड़ोसी मुल्क में ईंधन की कीमतें 400 रुपये (PKR) प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं.
IMF की शर्तों का असर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों को पूरा करने के दबाव में सरकार ने कीमतों में तत्काल प्रभाव से इजाफा किया है.
पेट्रोल: इसकी एक्स-डिपो कीमत में 6.51 PKR का इजाफा हुआ है, जिससे यह 393.35 रुपये से बढ़कर 399.86 रुपये प्रति लीटर हो गया है.
हाई-स्पीड डीजल (HSD): डीजल की कीमतों में लगभग 5% की बड़ी वृद्धि की गई है. 19.39 रुपये की बढ़त के साथ अब यह 380.19 रुपये से उछलकर 399.58 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है.
हालांकि सरकारी दरें 400 रुपये से मामूली कम दिख रही हैं, लेकिन पेट्रोल पंपों पर डीलर मार्जिन और अन्य स्थानीय शुल्क जुड़ने के बाद आम जनता को यह 400 PKR प्रति लीटर से अधिक की कीमत पर मिल रहा है.
सब्सिडी का सहारा: क्या मिलेगी राहत?
बढ़ती कीमतों के बीच जनता के गुस्से को शांत करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कुछ राहत उपायों की घोषणा की है:
मोटरबाइक सवारों के लिए: टू-व्हीलर चालकों को प्रति लीटर 100 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है. हालांकि, यह राहत प्रति माह अधिकतम 20 लीटर तक ही सीमित है और केवल तीन महीनों के लिए लागू की गई है.
लक्ष्य: सरकार का दावा है कि इस कदम का उद्देश्य ईरान संघर्ष और बढ़ती तेल कीमतों के बोझ से कमजोर तबके, किसानों और ट्रांसपोर्टर्स को बचाना है.
महंगाई और माल ढुलाई पर दोहरी मार
जानकारों का मानना है कि डीजल की कीमतों में 5% की बढ़ोतरी पाकिस्तान के लिए घातक साबित हो सकती है. चूंकि पाकिस्तान में हाई-स्पीड डीजल का इस्तेमाल मुख्य रूप से माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन में होता है, इसलिए इसकी लागत बढ़ने से सीधे तौर पर खाने-पीने की चीजों और जरूरी सामानों के दाम बढ़ेंगे. इससे पहले 10 अप्रैल को डीजल की कीमत अपने पीक (520.35 PKR) से नीचे आई थी, लेकिन अब दोबारा शुरू हुई इस तेजी ने ‘प्राइमरी बैलेंस टारगेट’ हासिल करने की सरकार की मजबूरी को उजागर कर दिया है.
सरकारी खजाने का मुख्य जरिया बना तेल
पाकिस्तान में हर महीने लगभग 7 से 8 लाख टन पेट्रोल-डीजल की बिक्री होती है, जो सरकार के लिए राजस्व (कमाई) का सबसे बड़ा स्रोत है. वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ईरान संकट के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत नहीं मिली, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और भी भयानक स्तर तक जा सकती हैं, जिससे आम पाकिस्तानी नागरिक की कमर पूरी तरह टूट जाएगी.


