म्यांमार के राष्ट्रपति भारत दौरे पर हैं. इस बीच खबर है कि म्यांमार के एक गांव में हुए विस्फोट में कम से कम 55 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हो गए हैं. बीबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शान राज्य के नामखाम टाउनशिप के कौंग तात गांव में 25 महिलाएं और 30 पुरुष मारे गए. वहीं एफएपी को दो बचावकर्मियों ने बताया कि रविवार को उत्तरी म्यांमार में हुए एक विस्फोट में दर्जनों लोग मारे गए. क्षेत्र पर नियंत्रण रखने वाले विद्रोहियों का कहना है कि यह विस्फोट खनन में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटकों के आकस्मिक विस्फोट के कारण हुआ. शान राज्य के नामखाम जिले में, जहां विस्फोट हुआ, एक प्राथमिक बचावकर्मी ने बताया कि छह बच्चों सहित 46 लोग मारे गए और 70 से अधिक लोग घायल हुए.
अभी कई शव दबे होने की आशंका
सुरक्षा कारणों से नाम न छापने की शर्त पर बात करने वाले उस बचावकर्मी ने बताया कि भीषण विस्फोट से कई घर नष्ट हो गए और घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया. उन्होंने आगे कहा, “क्षतिग्रस्त घरों के नीचे और भी शव दबे हो सकते हैं.” नाम ना छापने की शर्त पर बात करने वाले एक अन्य बचावकर्मी ने बताया कि मृतकों की संख्या इससे भी अधिक 59 थी, और शवों को अंतिम संस्कार के लिए आपातकालीन कर्मियों द्वारा एकत्र किया गया.
2021 में सेना द्वारा तख्तापलट करके सत्ता हथियाने के बाद से म्यांमार गृहयुद्ध में फंसा हुआ है, जहां सशस्त्र बल लोकतंत्र समर्थक गुरिल्लाओं और शक्तिशाली जातीय अल्पसंख्यक सशस्त्र समूहों से लड़ रहे हैं. म्यांमार के सबसे शक्तिशाली जातीय अल्पसंख्यक गुटों में से एक, ताआंग नेशनल लिबरेशन आर्मी (टीएनएलए) ने कहा कि रविवार को दोपहर लगभग 12:00 बजे (5:00 जीएमटी) नामखाम में खनन और पत्थर की खदानों में इस्तेमाल होने वाले रखे हुए विस्फोटकों में अचानक विस्फोट हो गया.
कीमती खनिजों को निकालने के लिए होता है खनन
टीएनएलए ने एक बयान में कहा, “इस विस्फोट के कारण कई स्थानीय ग्रामीणों की जान चली गई और कई घायल हो गए तथा उनके घरों को नुकसान पहुंचा.” हालांकि, उसने मरने वालों की सटीक संख्या नहीं बताई. समूह ने कहा कि विस्फोटक उसके आर्थिक विभाग के थे और विस्फोट के सटीक कारण की जांच की जा रही है. म्यांमार में कई विद्रोही समूह सरकार की सेना के खिलाफ अपने हमले और अपना अभियान चलाने के लिए रेयर अर्थ मैटेरियल के खनन पर निर्भर हैं. मगर इनके पास सुरक्षा उपकरण नहीं होते,ऐसे में दुर्घटनाएं हो ही जाती हैं.
देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में असंख्य जातीय अल्पसंख्यक सशस्त्र समूह सक्रिय हैं, जिनमें से कई 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से स्वायत्तता और लाभकारी संसाधनों पर नियंत्रण के लिए सेना से लड़ रहे हैं.
चीन करता है मध्यस्थता
जातीय अल्पसंख्यक सशस्त्र समूहों के गठबंधन ने 2024 की शुरुआत में चीन की मध्यस्थता से सेना के साथ युद्धविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन उसी वर्ष जून में, टीएनएलए ने शान राज्य और पड़ोसी मांडले क्षेत्र में नए हमले शुरू कर दिए. उसी गर्मी में विद्रोहियों ने उत्तरी रूबी-खनन शहर मोगोक पर कब्जा कर लिया, जिसमें टीएनएलए ने विपक्षी हमले का नेतृत्व किया.
फिर पिछले वर्ष अक्टूबर में, टीएनएलए ने कहा कि उसने मोगोक से पीछे हटने पर सहमति जताई है, जिसकी मध्यस्थता चीन ने की थी. विश्लेषकों का कहना है कि बीजिंग म्यांमार के गृहयुद्ध में एक प्रमुख मध्यस्थ है, जो अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों के अनुसार विद्रोहियों और सेना दोनों का समर्थन करता है.
ये भी पढ़ें-


