वॉशिंग मशीन में कपड़े धुलने का सही तरीका जानते हैं आप, 90 % लोग करते हैं ये गलती

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Laundry Tips: “थोड़ा सा पाउडर और झाग ढेर सारा…” टीवी पर बजने वाले ऐसे विज्ञापन एक पूरी पीढ़ी के दिमाग में ऐसे बैठे कि लोगों ने झाग को ही सफाई की पहचान मान लिया. जितना ज्यादा झाग, उतने ज्यादा साफ कपड़े. फिर शुरू हुआ हर वॉश में जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालने का सिलसिला. किसी ने गर्म पानी को जादुई हथियार बना लिया, तो किसी ने पूरे हफ्ते के कपड़े एक साथ मशीन में ठूंसना आदत बना ली. लेकिन आज की मॉडर्न वॉशिंग मशीनों और नए जमाने के डिटर्जेंट के दौर में ये पुराने तरीके फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं. यानी जो आदतें लोग सफाई समझकर अपनाते हैं, वही धीरे-धीरे कपड़ों की उम्र कम कर सकती हैं. आइए जानते हैं कौन सी हैं वो पुरानी लॉन्ड्री आदतें जो चुपचाप आपके कपड़ों की उम्र कम कर रही हैं.

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ज्यादा डिटर्जेंट मतलब ज्यादा झाग व ज्यादा सफाई नहीं (Too Much Detergent Doesn’t Mean Cleaner Clothes)

कई लोगों को लगता है कि अगर कपड़े ज्यादा गंदे हैं तो डिटर्जेंट भी ज्यादा डालना चाहिए. इससे ज्यादा झाग आएगा और सफाई बेहतर होगी. जबकि हकीकत उल्टी है. जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट कपड़ों में जमने लगता है और बाद में वही गंध, चिपचिपापन और फैब्रिक की हार्डनेस की वजह बनता है. फ्रंट लोड और हाई-एफिशिएंसी मशीनों में तो कम डिटर्जेंट ही काफी माना जाता है.

हर कपड़ा गर्म पानी में धोना भी सही नहीं (Hot Water Is Not Always Necessary)

पहले मोटे कॉटन और लिनन के कपड़े ज्यादा होते थे, इसलिए गर्म पानी इस्तेमाल करना आम बात थी. लेकिन अब ज्यादातर कपड़ों में सिंथेटिक और मिक्स फैब्रिक होते हैं. बार-बार गर्म पानी इस्तेमाल करने से कपड़ों का रंग फीका पड़ सकता है और कपड़े जल्दी ढीले या कमजोर हो सकते हैं. ज्यादातर रोजमर्रा के कपड़ों के लिए नॉर्मल या हल्का गुनगुना पानी काफी होता है.

खुशबूदार कपड़े हमेशा साफ हों, जरूरी नहीं (Fragrance Doesn’t Always Mean Clean)

बहुत से लोग कपड़ों से तेज खुशबू आने को सफाई की निशानी मान लेते हैं. लेकिन कई बार भारी फ्रेगरेंस सिर्फ पसीने या बदबू को छिपा देती है. शरीर की गर्मी पड़ते ही वही गंध फिर वापस आ सकती है. इसलिए सिर्फ खुशबू के भरोसे कपड़ों की सफाई तय करना सही तरीका नहीं माना जाता.

हर बार मशीन की सेटिंग बदलना जरूरी (Washer Settings Matter)

एक ही सेटिंग पर हर तरह के कपड़े धो देना भी बड़ी गलती मानी जा रही है. अलग फैब्रिक, अलग गंदगी और अलग लोड के हिसाब से वॉश मोड बदलना जरूरी होता है. गलत सेटिंग से कपड़ों की शेप और क्वालिटी दोनों प्रभावित हो सकती हैं.

वॉशिंग मशीन खुद साफ नहीं होती (Washing Machines Need Cleaning Too)

कई लोग सोचते हैं कि मशीन में हर दिन पानी घूमता है, इसलिए उसे अलग से साफ करने की जरूरत नहीं. जबकि मशीन के अंदर बाल, डिटर्जेंट, गंदगी और फैब्रिक का बारीक कचरा जमा होता रहता है. अगर लंबे समय तक सफाई न की जाए तो बदबू और ब्लॉकेज जैसी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं.

केयर लेबल पढ़ना अब भी जरूरी (Read the Care Labels)

कपड़ों के अंदर लगे छोटे टैग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होते, उनमें कपड़े धोने और संभालने की पूरी जानकारी छिपी होती है. जैसे किस तापमान के पानी में धोना है, मशीन वॉश करना है या नहीं, ड्रायर इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं और इस्त्री कितनी गर्म रखनी है. इन्हें नजरअंदाज करने पर कपड़े सिकुड़ सकते हैं, रंग छोड़ सकते हैं या उनका फैब्रिक खराब हो सकता है. यानी कुछ सेकंड लेबल पढ़ लेना कई बार महंगे कपड़ों को जल्दी खराब होने से बचा सकता है.




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