1 Rupee Pepsi making video: गर्मी का पारा चढ़ते ही बाजार में रंग-बिरंगी बर्फ की डंडिया और प्लास्टिक की थैलियों में बंद मीठा पानी बिकने लगता है. हम इसे बचपन की याद समझकर मुस्कुरा देते हैं, लेकिन इंटरनेट पर वायरल हो रहे कारखानों के वीडियो कुछ और ही दास्तां बयां कर रहे हैं. इन वीडियो में दिख रहा है कि, जिस ‘चुस्की’ को हम बड़े शौक से चूसते थे, उसे बनाने में न तो सफाई का ख्याल रखा जा रहा है और न ही सेहत का. कबाड़ जैसे बर्तनों में गंदा पानी और उसमें मिलाए जा रहे ढेर सारे जहरीले केमिकल कलर्स देखकर आपका कलेजा मुंह को आ जाएगा.
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केमिकल का खेल और गंदगी का अंबार (Unhygienic food factory India)
इन वायरल क्लिप्स में दिखाया गया है कि, कैसे एक बड़े से कढ़ाहे में पानी उबाला जाता है और फिर उसमें बिना नाप-तोल के भड़कीले रंग डाल दिए जाते हैं. कुछ जगहों पर तो ‘मिल्क चुस्की’ के नाम पर सफेद रंग का ऐसा घोल तैयार किया जा रहा है, जिसमें दूध का नामोनिशान तक नहीं है. फर्श पर बिखरी गंदगी और बिना दस्तानों के काम करते मजदूर यह बताने के लिए काफी हैं कि, ये ‘पेप्सी’ नहीं, बल्कि बीमारियों का सीधा न्यौता है. इन वीडियो ने उन लोगों के होश उड़ा दिए हैं, जो आज भी अपने बच्चों को ये दिलाने में गुरेज नहीं करते.
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बचपन की याद या सेहत से खिलवाड़? (Childhood Nostalgia vs Health Risks)
वीडियो देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं. कुछ पुराने दिनों को याद कर भावुक हो रहे हैं, तो अधिकतर लोग इस ‘अस्वास्थ्यकर’ (Unhygienic) तरीके पर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. कहा जाता है कि इन घटिया रंगों और गंदे पानी से पेट का इन्फेक्शन, टाइफाइड और गले की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. सोशल मीडिया पर वायरल यह हकीकत हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या महज एक रुपये की खुशी के लिए अपनी जान जोखिम में डालना सही है?
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)


