होर्मुज संकट में कैसे बढ़ रही देश के विझिंजम पोर्ट की अहमियत, शशि थरूर ने एनडीटीवी संग बातचीत में बताया

होर्मुज संकट में कैसे बढ़ रही देश के विझिंजम पोर्ट की अहमियत, शशि थरूर ने एनडीटीवी संग बातचीत में बताया होर्मुज संकट में कैसे बढ़ रही देश के विझिंजम पोर्ट की अहमियत, शशि थरूर ने एनडीटीवी संग बातचीत में बताया

होर्मुज में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब भारत के समुद्री कारोबार पर दिखने लगा है. संसदीय विदेश मामलों की स्थायी समिति के चेयरमैन और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि होर्मुज संकट की वजह से उनके संसदीय क्षेत्र तिरुवनंतपुरम के विझिंजम पोर्ट पर दुनियाभर की शिपिंग कंपनियों की नजर टिकी है और यह बंदरगाह तेजी से एक ग्लोबल शिपिंग हब बनता जा रहा है. शशि थरूर के मुताबिक, विझिंजम पोर्ट पर इस समय जबरदस्त दबाव है.

पोर्ट पर 100 से ज्यादा जहाजों ने मांगी इजाजत

अब तक 100 से ज्यादा जहाजों ने पोर्ट पर डॉक करने या बर्थिंग राइट्स के लिए आवेदन किया है, लेकिन जगह सीमित होने के कारण 60 कार्गो शिप को मना करना पड़ा है. उन्होंने बताया कि यह अदाणी का पोर्ट है, जहां फेज-2 एक्सपेंशन पर काम शुरू हो चुका है. अगले ढाई साल में यहां कहीं ज्यादा जहाजों को संभालने की क्षमता विकसित हो पाएगी. थरूर ने साफ कहा कि मौजूदा हालात में पोर्ट का विस्तार और उसकी क्षमता बढ़ाना अब बेहद ज़रूरी हो गया है.

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IRGC की फायरिंग पर चिंता

ईरानी IRGC फोर्स द्वारा भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना को शशि थरूर ने इसे चिंताजनक करार दिया. उन्होंने कहा कि यह घटना ईरान सरकार और IRGC फोर्स के बीच कम्युनिकेशन गैप की वजह से हुई. थरूर ने NDTV को बताया कि इस मामले में भारत ने कल ईरान के राजदूत को समन किया था और आज एक भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर सुरक्षित होर्मुज से बाहर निकल गया है. उन्होंने दोहराया कि घटना का कारण सरकार और ज़मीनी फोर्स के बीच तालमेल की कमी रही.

बातचीत नहीं हुई तो युद्ध फिर भड़केगा

फिलहाल के हालात पर शशि थरूर ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इस समय किसी तरह की शांति वार्ता नहीं चल रही है और सीजफायर की अवधि खत्म होने जा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत जल्द शुरू नहीं हुई तो युद्ध दोबारा भड़क सकता है, जो बेहद चिंताजनक होगा. थरूर के मुताबिक, अगर बुधवार तक पाकिस्तान की मध्यस्थता से कोई रास्ता नहीं निकलता, तो अन्य देशों को आगे आना होगा और अमेरिका से भी बातचीत करनी पड़ेगी ताकि जंग को रोका जा सके.

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भारत की भूमिका अहम, शांति के लिए सक्रिय कदम जरूरी

शशि थरूर ने कहा कि वह भारतीय जहाजों और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और भारत को हर हाल में शांति के लिए काम करना होगा. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही कई देशों के नेताओं से बातचीत की है. भारत के पास यह बड़ा फायदा है कि उसके सभी प्रमुख पक्षों के साथ अच्छे संबंध हैं. इसी वजह से भारत इस संघर्ष में एक सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाने की स्थिति में है.





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