नई दिल्ली:
Elnino impact on Mosoon: मॉनसून देरी से मगर दुरुस्त आया और 4 जून को केरल में दस्तक देने के बाद छह दिनों में उसने 13 राज्यों को कवर कर लिया है. लेकिन अल नीनो के कारण इस साल कम बारिश का खतरा बरकरार है. मौसम विभाग की लगातार चेतावनी के बाद सरकार ने भी युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. सरकार ने देश भर में 197 जिलों की पहचान की है, जहां अल नीनो का असर सबसे ज्यादा हो सकता है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनके विभाग ने हर राज्य के लिए इमरजेंसी प्लान तैयार किया है.
अल नीनो और मॉनसून अपडेट (Monsoon Update)
अल नीनो मौसम से जुड़ी एक ऐसी घटना है, जो मॉनसून को कमजोर करती है और बारिश पर असर डालती है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण पश्चिम मॉनसून के लंबे समय के औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो सामान्य से कम बारिश वाले मौसम का संकेत है. अगर मॉनसून के दूसरे चरण में अल नीनो ज्यादा सक्रिय होता है तो सूखे या कम बारिश से फसलों को खतरा बढ़ सकता है.
खेत बचाओ अभियान चला रहा कृषि मंत्रालय
कृषि मंत्रालय किसानों तक राहत पहुंचाने के लिए खेत बचाओ अभियान नाम से एक देशव्यापी अभियान चला रहा है. शिवराज ने कहा कि अल नीनो को लेकर सरकार अलर्ट मोड पर है. 197 जोखिम वाले जिलों की पहचान कर समय से पहले तैयारी की जा रही है. सूखे के संकट और अल नीनो के असर का पहले से पता लगाने के लिए हर हफ्ते बैठकें हो रही हैं. बीज समेत खेती से जुड़ी जरूरी चीजों का स्टॉक भी तैयार है. हर राज्य के लिए एक आपात योजना तैयार की गई है.
मॉनसून अभी तेजी से आगे बढ़ रहा
मॉनसून 4 जून को केरल पहुंचने के बाद तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना पहुंच चुका है. महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों तक भी मॉनसून पहुंचा है. पूर्वोत्तर के राज्यों मिजोरम, नगालैंड, त्रिपुरा समेत सभी हिस्सों में मॉनसून की बारिश हो रही है. यह अब देश के पूर्वी हिस्से, मध्य और गुजरात-महाराष्ट्र के बाकी के इलाकों को दायरे में ले रहा है. मॉनसून अभी देश के 30 प्रतिशत हिस्से में पहुंच चुका है. 15 जुलाई तक पूरे देश में ये छा जाएगा. हालांकि जुलाई के अंत और अगस्त से अल नीनो 90 फीसदी ताकत के साथ प्रचंड स्थिति में पहुंच सकता है.
Monsoon Rain
ये भी पढ़ें – मॉनसून की तेज रफ्तार, 12 राज्यों के पार, बिहार-झारखंड और छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ा, यूपी-दिल्ली में पहले ही बरसेंगे बदरा
मॉनसून पर अल नीनो का खतरा
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल अल नीनो के असर से अगस्त और सितंबर में बारिश काफी कम हो जाएगी. इससे देश के कई इलाके सूखा झेल सकते हैं. सबसे ज्यादा असर देश के उत्तरी इलाकों, पश्चिमी राज्य गुजरात-महाराष्ट्र और मध्य क्षेत्रों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि पर पड़ सकता है. कम बारिश से खरीफ की फसलों पर असर होगा. देश के लगभग 60 फीसदी किसान खरीफ की फसलों खासकर धान की बुआई के लिए मॉनसून की बारिश पर निर्भर हैं. कम बारिश से कृषि क्षेत्र पर संकट आ सकता है. पिछले कुछ वर्षों से सामान्य मॉनसून के कारण देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन हुआ है.
ये भी पढ़ें – फिर आएगी आंधी-बारिश, 5 दिन दिल्ली-यूपी से एमपी-राजस्थान तक मौसम मचाएगा तूफान
कहां सूखे की मार की आशंका
मध्य प्रदेश में इंदौर, उज्जैन,रीवा, शहडोल, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम जैसे इलाकों में सामान्य से काफी कम बारिश की आशंका है. अगस्त सितंबर में अलनीनो की मार से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कम बारिश हो सकती है.

दिल्ली-NCR में कम बारिश
राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और उसके आस-पास के इलाके भीषण गर्मी और लू का सामना कर रहा है. जलाशयों के भरने और भूजल स्तर बेहतर रखने में मॉनसून की बारिश से मदद मिलती है. कम बारिश से पेयजल संकट गहरा सकता है.
यूएन की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने आगाह किया है कि अल नीनो सक्रिय हो रहा है.अगस्त तक इसके सक्रिय होने की 80 फीसदी संभावना है. फिर मॉनसून 90 प्रतिशत की संभावना है और सितंबर तक यह पूरी तरह मजबूत होगा. इस साल सुपर अल नीनो के हालात बन सकते हैं.


