क्या लेबनान और इजरायल के बीच रुक जाएगी जंग? अमेरिका में बड़ी बैठक

क्या लेबनान और इजरायल के बीच रुक जाएगी जंग? अमेरिका में बड़ी बैठक क्या लेबनान और इजरायल के बीच रुक जाएगी जंग? अमेरिका में बड़ी बैठक

अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन डीसी में आज लेबनान और इज़रायल के बीच बातचीत हो रही है. लेकिन बैठक का ऐलान होने के बावजूद इजरायल के लेबनान पर हमले थमे नही हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बातचीत का नतीजा क्या होगा? हालांकि इस  बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मौजूद रहेंगे. लेबनान में अमेरिकी राजदूत मिशेल ईसा, काउंसलर माइकल नीडहम, अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लाइटर और अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह भी इसमें हिस्सा लेंगे. हलांकि इजरायल और अमेरिका की बातचीत लेबनान से होगी पर उसमें हिज्बुल्लाल मुख्य मुद्दा होगा. यह लेबनान का एक ताकतवर संगठन है जो लेबनान के दक्षिणी भाग और बेरुत पर मजबूत पकड़ रखता है.  इसके पास लेबनान सेना से ज्यादा हथियार और लड़ाके है. यह एक समानांतर सरकार चलाता है,  जो इजरायल के साथ किसी भी करह सीजफायर या समझौते का हमेशा विरोध करता है. तो लेबनान में शांति तभी आ सकती है जब हिज्बुल्लाह इसके लिए मान जाए.

हिज्जुबुल्लाह के मुद्दे पर रहेगा बैठक में फोकस

इस बातचीत का मुख्य मुद्दा दक्षिण लेबनान की सुरक्षा स्थिति और हिज़्बुल्लाह की गतिविधियां हैं. इजरायली मीडिया के मुताबिक, इजरायल इस बैठक में एक नई रणनीतिक योजना पेश करने की तैयारी में है. इस योजना के तहत दक्षिण लेबनान में लंबे समय तक इजरायली सेना की तैनाती का प्रस्ताव रखा जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल ने दक्षिण लेबनान को तीन अलग-अलग जोन में बांटने की योजना बनाई है. पहले जोन में लेबनान की सीमा के अंदर लगभग 8 किलोमीटर तक का इलाका शामिल होगा. इस क्षेत्र में इजरायली सेना की मजबूत और लंबी मौजूदगी बनी रहेगी.

इजरायल का कहना है कि जब तक हिज़्बुल्लाह पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक उसकी सेना यहां से नहीं हटेगी. दूसरे जोन में लितानी नदी तक का क्षेत्र शामिल होगा. इस इलाके में इजरायली सेना हिज़्बुल्लाह के खिलाफ अभियान जारी रखेगी. हालांकि, समय के साथ इस क्षेत्र का नियंत्रण धीरे-धीरे लेबनानी सेना को सौंप दिया जाएगा. इसका मकसद स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बताया जा रहा है. तीसरा जोन लितानी नदी के उत्तर का इलाका होगा. इस क्षेत्र में हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने की पूरी जिम्मेदारी लेबनानी सेना पर होगी. इजराइल इस हिस्से में सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा. इजरायल का यह प्रस्ताव आज होने वाली सीधी वार्ता में चर्चा के लिए रखा जाएगा. इस योजना को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है या नहीं, यह देखना अहम होगा. यह बातचीत क्षेत्र में स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

लेबनान में इजरायल लगातार कर रहा हमले

लेबनान के अधिकारियों के मुताबिक, 2 मार्च से इजरायली हमलों में करीब 1800 लोगों की मौत हो चुकी हैं. इस हमले में लगभग 6300 लोग घायल हो चुके हैं. 11 लाख लोग बेघर हो चुके हैं. पिछले बुधवार को अमेरिका और ईरान के सीजफायर के एलान के बाद इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया. इस हमले में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. ईरान का कहना है कि इसके अमेरिका के साथ सीजफायर की शर्त यह भी थी कि लेबनान पर इजराइली हमले बंद हो. वहीं इजरायल का कहना है लेबनान सीजफायर में शामिल नही हैं. इजरायल पर लेबनान पर हमले के बाद हिज्बुल्लाह के लड़ाकों ने भी अपने रॉकेटों और मिसाइलों से इजरायल को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया. कई जानकारों का तो यह भी कहना है कि इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम ईरानी मिसाइल तो ट्रैक कर लेते थे पर हिज्बुल्लाह के रॉकेट वह इंटरसैप्ट नही कर पाते थे जिस वजह से भी इजरायल को खासा नुकसान पहुंचा. हिज्बुल्लाह ने इस लड़ाई में पहली बार एफपीवी ड्रोन का इस्तेमाल कर इजराइल के ताकतवर मर्कावा टैंक  तक को बरबाद कर दिया.

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इजरायल का कहना है जब तक हिज्बुल्लाह को हथियार विहीन नही किया जाता तब तक सीजफायर नही हो सकता. हिज्बुल्लाह का अरबी में शाब्दिक अर्थ है ईश्वर की पार्टी. इसका गठन 1980 के दशक में इजरायल के लेबनान पर कब्जे के दौरान हुआ. तब से यह इजरायल के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखे हुए हैं. माना जाता है कि इस शिया संगठन को ईरान हर लिहाज से मदद करता रहता हैं. आज यह केवल हथियारबंद समूह नही बल्कि एक सामाजिक राजनीतिक पार्टी बन चुका है. वहीं 2024 में भी लेबनान और इजरायल के बीच सीजफायर हुआ था लेकिन जैसे इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला किये तो यह संघर्षविराम टूट गया. इजरायल के लेबनान पर लगातार हमले की निंदा फ्रांस, स्पेन और तुर्की जैसे तमाम देशों ने की है. इनका मानना है कि इस हमले में बड़ी संख्या में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं. अब देखना ये है कि आज रात की बात कहां पहुंचेगी?

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