ईरान-अमेरिका शांतिवार्ता में कहां फंस गया पेंच? पाकिस्तान में तो लगातार लैंड कर रहे US विमान

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पाकिस्तान में अमेरिका के विमान लगातार पहुंच रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि अब तक 6 विमान इस्लामाबाद पहुंच गए हैं. इसमें अमेरिकी राजनयिक, तकनीकि कर्मचारी,  विशेषज्ञ, सुरक्षा कर्मचारी और गुप्त सेवा अधिकारी सवार थे. कहा तो ये भी जा रहा है कि ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ भी इस्लामाबाद ईरान से वार्ता के लिए पहुंच चुके हैं. हालांकि, इसका आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. मगर ईरान ने अब तक क्लियर नहीं किया है कि वो वार्ता में शामिल होगा या नहीं. पाकिस्तान लगातार ईरान के संपर्क में है और किसी तरह उसे मनाकर वार्ता की टेबल पर लाने की कोशिश कर रहा है.

राजदूत के पास पहुंचे गृह मंत्री

पाकिस्तान के संघीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस्लामाबाद में ईरान के राजदूत डॉ. रजा अमीरी मोघदम से मुलाकात की. इसमें राजदूत को इस्लामाबाद वार्ता के दूसरे चरण की तैयारियों और क्षेत्रीय स्थिति के बारे में बताया गया. बैठक के दौरान, दोनों पक्षों ने वार्ता में भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा पर भी बात की. मंत्री नकवी ने जोर दिया कि दूसरे चरण की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और विदेशी मेहमानों के लिए पुख्ता सुरक्षा उपाय किए गए हैं. बैठक में इस्लामाबाद के मुख्य आयुक्त, इस्लामाबाद पुलिस के महानिरीक्षक और उप आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे. कुल मिलाकर पाकिस्तान ईरान को ये आश्वस्त करने की कोशिश कर रहा है कि वार्ता सुरक्षित और सही माहौल में वो कराएगा.

ईरान ने साफ कर दी बात

मगर आज ही ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ईरान ने अभी तक इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ पाकिस्तानी मध्यस्थता में होने वाली वार्ता के नए दौर में भाग लेने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है. साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए इस्माइल बाकाई ने कहा, “हमने अभी तक वार्ता के अगले दौर के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है,” राजनयिकता का पालन करने के अपने दावों के विपरीत कार्रवाई करने के लिए अमेरिका की आलोचना करते हुए प्रवक्ता ने कहा कि युद्धविराम की शुरुआत से ही ईरान को वाशिंगटन से “दुर्भावना और लगातार शिकायतों” का सामना करना पड़ा है. उन्होंने बताया कि अमेरिका ने शुरू में दावा किया था कि लेबनान युद्धविराम का हिस्सा नहीं है, जबकि पाकिस्तान ने स्पष्ट रूप से इसके विपरीत कहा था.

बताया अमेरिका पर विश्वास नहीं

बाकाई ने आगे कहा कि समझौता होने के बाद भी ईरान को “होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री कार्रवाइयों” का सामना करना पड़ा, जिसमें रविवार रात को एक ईरानी व्यापारिक जहाज पर अमेरिकी हमला भी शामिल है, जिसे उन्होंने युद्धविराम का उल्लंघन और “आक्रामकता का कृत्य” बताया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका का व्यवहार उसके कथनों से मेल नहीं खाता, और कहा कि यह असंगति पूरी प्रक्रिया के प्रति ईरान के अविश्वास को और गहरा कर रही है. उन्होंने आगे कहा, “ईरान अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए भविष्य के मार्ग के बारे में आवश्यक निर्णय लेगा.”

कहां फंसा हैं पेंच

  • यूरेनियम इनरिचमेंट अमेरिका को सौंपना का मसला
  • अमेरिका के होर्मुज में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का मसला
  • हिज्बुल्ला और हूती विद्रोहियों का मसला
  • हमास का मसला
  • ईरान में अमेरिका-इजरायल की बमबारी के हुए नुकसान की भरपाई का मसला
  • ईरान पर लगे बैन और फ्रीज संपत्तियों का मसला

इन दो मुद्दों के कारण ईरान ने फंसाया पेंच

ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका जो जंग में हासिल अब तक नहीं कर पाया है, वो वार्ता की टेबल पर हासिल करना चाहता है. ईरान ने कहा है कि वो यूरेनियम इनरिचमेंट को किसी भी कीमत पर अमेरिका को नहीं सौंपेगा. हां, वो हथियार नहीं बनाएगा ऐसा आश्वासन दे सकता है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को जांच के लिए अनुमति दे सकता है. दूसरा वार्ता की टेबल पर आने से जो मसला ईरान को रोक रहा है, वो है अमेरिका की होर्मुज में उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी. ईरान ने हाल में होर्मुज खोलने का ऐलान भी कर दिया था, मगर ट्रंप ने फिर कह दिया कि जब तक स्थाई समझौता नहीं होता, अमेरिका की नाकेबंदी जारी रहेगी. यहीं से ईरान भड़क गया कि हर बार बात होने के बाद अमेरिका पलट जाता है. पिछली बार भी सीजफायर के समय लेबनान पर हमला शामिल था, मगर बाद में अमेरिका और इजरायल मुकर गए. हालांकि, बाद में ट्रंप ही पीछे हटे और इजरायल को मनाया कि वो लेबनान के साथ सीजफायर करे और वार्ता की टेबल पर आए. लेबनान का मसला सुलझता देख ही ईरान ने फिर से होर्मुज खोलने का ऐलान किया था, लेकिन ट्रंप फिर पलट गए. साथ ही उन्होंने ये भी दावा कर दिया कि ईरान अपने न्यूक्लियर एनरिचमेंट को अमेरिका को सौंपने को तैयार है. तो फिलहाल वार्ता की मेज पर ईरान के नहीं आने का कारण ये दो मुद्दे ही हैं.    

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