Niti Aayog Goverment School Report: देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं. स्मार्ट क्लास, डिजिटल पढ़ाई और नई एजुकेशन पॉलिसी जैसी बातें लगातार चर्चा में रहती हैं. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. नीति आयोग की नई रिपोर्ट में सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक देश के हजारों स्कूल आज भी बिजली, पानी, टॉयलेट और लैब जैसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं. कई स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है, जबकि कुछ स्कूल ऐसे भी हैं जहां छात्रों का नामांकन तक नहीं है. रिपोर्ट में बढ़ते ड्रॉपआउट और शिक्षा की गिरती गुणवत्ता पर भी चिंता जताई गई है.
स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी
रिपोर्ट के अनुसार देश के 98 हजार से ज्यादा स्कूलों में लड़कियों के लिए काम करने वाले टॉयलेट नहीं हैं. वहीं 61 हजार से ज्यादा स्कूलों में इस्तेमाल करने लायक टॉयलेट तक नहीं हैं. करीब 1.19 लाख स्कूल अब भी बिजली की सुविधा से दूर हैं. इसके अलावा हजारों स्कूलों में पानी और हैंडवॉश जैसी जरूरी सुविधाएं भी नहीं हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी सेकेंडरी स्कूलों में सिर्फ 51.7 प्रतिशत स्कूलों में साइंस लैब मौजूद है.
शिक्षकों की भारी कमी
रिपोर्ट में सामने आया कि देश के 1 लाख से ज्यादा स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं. इनमें ज्यादातर स्कूल ग्रामीण इलाकों में हैं. बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में शिक्षक पदों पर सबसे ज्यादा खाली जगहें दर्ज की गई हैं. झारखंड के सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 47:1 बताया गया है, जबकि आदर्श अनुपात इससे काफी कम माना जाता है.
ड्रॉपआउट और पढ़ाई का स्तर भी चिंता का विषय
रिपोर्ट में सेकेंडरी स्कूलों में बढ़ते ड्रॉपआउट को भी बड़ी चुनौती बताया गया है. पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक और असम में ड्रॉपआउट रेट राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है. बिहार और उत्तर प्रदेश में भी हालात खराब हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक गणित में सिर्फ 2 प्रतिशत शिक्षक ही 70 प्रतिशत से ज्यादा अंक ला सके. वहीं शिक्षा पर भारत का खर्च GDP का सिर्फ 4.6 प्रतिशत बताया गया है, जो कई देशों से कम है.
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