Who is Surendra Diler? New State Minister in UP Govt with Strong Political Legacy: उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट में 10 मई 2026 को 6 नए चेहरे शामिल हुए. इनमें एक नाम सुरेंद दिलेर का भी है. दिलेर के शपथ लेते ही यूपी की राजनीति में अलीगढ़ का नाम सुर्खियों में आ गया, क्योंकि राज्यमंत्री बनाए गए सुरेंद दिलेर जिले की खैर विधानसभा से जीतकर विधायक बने हैं. मंत्री दिलेर के परिवार का यूपी की राजनीति में कई दशकों पुराना इतिहास है. उनके दादा और पिता भाजपा से कई बार सांसद-विधायक रह चुके हैं.
दादा और पिता कई बार सांसद-विधायक रहे
सुरेंद दिलेर भाजपा के युवा और उभरते नेताओं में गिने जाते हैं. अब मंत्री बनने से पार्टी में उनका कद और बढ़ गया है. मंत्री सुरेंद दिलेर के दादा स्वर्गीय किशन लाल दिलेर चार बार सांसद और छह बार विधायक रहे हैं, जबकि उनके स्वर्गीय पिता राजवीर दिलेर भाजपा से सांसद और विधायक रह चुके हैं. अब भाजपा ने दिलेर परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाकर बड़ा संदेश दिया है.
2024 लोकसभा चुनाव में पिता का टिकट कटा था
राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा ने यह फैसला काफी सोच-समझकर लिया है. 2024 लोकसभा चुनाव में हाथरस सीट से स्वर्गीय सांसद राजवीर दिलेर का टिकट कटने के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं थीं. इस दौरान उनका हार्ट अटैक से निधन हो गया था. इसके बाद से ही माना जा रहा था कि भाजपा आलाकमान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिलेर परिवार को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को आगे लाएंगे. सुरेंद दिलेर को राज्य मंत्री बनाकर भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिलेर परिवार की पकड़ और जनाधार को वह बनाए रखना चाहती है.
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खैर विधानसभा ‘दूसरा जाटलैंड’
सुरेंद दिलेर जिस खैर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे वह अलीगढ़ की सबसे चर्चित सीटों में से एक है. यह सीट 1957 में अस्तित्व में आई थी, इस सीट पर लंबे समय तक जाट नेताओं का दबदबा रहा. इस कारण इसे जिले का ‘दूसरा जाटलैंड’ भी कहा जाता है. हालांकि, समय-समय पर यहां सामाजिक समीकरण बदलते रहे, इस दौरान बसपा, रालोद, कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद इस सीट पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए. भाजपा, रालोद और बसपा के बीच कई बार कांटे की टक्कर देखने को मिली. अब सुरेंद्र दिलेर के मंत्री बनने के बाद इस सीट का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है.
खैर विधानसभा से कई बड़े नेताओं ने लड़ा चुनाव
अलीगढ़ की खैर विधानसभा के इतिहास में कई बड़े नेताओं ने जीत दर्ज की है. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मोहनलाल गौतम से लेकर चौधरी देवदत्त सिंह, चौधरी महेंद्र सिंह, चौधरी प्यारेलाल, जगवीर सिंह, ज्ञानवती सिंह, प्रमोद गौड़, सत्यपाल सिंह, भगवती प्रसाद सूर्यवंशी, अनूप प्रधान और अब सुरेंद्र दिलेर तक यह सीट हमेशा राजनीतिक रूप से चर्चित रही है. इस सीट पर चौधरी प्यारेलाल और जगवीर सिंह ही ऐसे नेता रहे जो लगातार दो बार विधायक बने. बाकी नेताओं को दोबारा जीत हासिल नहीं हो सकी. यही वजह है कि खैर विधानसभा को राजनीतिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है.
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पार्टी के प्रति समर्पण का मिला इनाम
स्वर्गीय सांसद राजवीर दिलेर के प्रतिनिधि रहे ज्ञानू शर्मा ने कहा कि दिलेर परिवार हमेशा भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा रहा है. एक समय ऐसा भी आया जब राजवीर दिलेर का टिकट काट दिया गया, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी और अंत तक पार्टी के प्रति समर्पित रहे. उसी निष्ठा और परिवार की वर्षों की राजनीतिक तपस्या का परिणाम है कि भाजपा ने सुरेंद्र दिलेर को मंत्री बनाकर सम्मान दिया है.


