Breaking News Live: Heat Wave और मॉनसून सीजन के दौरान बाढ़ संकट से निपटने की तैयारी शुरू, अमित शाह ने बुलाई बड़ी बैठक

Breaking News Live: Heat Wave और मॉनसून सीजन के दौरान बाढ़ संकट से निपटने की तैयारी शुरू, अमित शाह ने बुलाई बड़ी बैठक Breaking News Live: Heat Wave और मॉनसून सीजन के दौरान बाढ़ संकट से निपटने की तैयारी शुरू, अमित शाह ने बुलाई बड़ी बैठक

इस साल भयंकर गर्मी पड़ने की आशंका है. भारत मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के मुताबिक मई महीने के दौरान हिमालय के तलहटी (foothills) क्षेत्र, ओडिशा सहित पूर्वी तट के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र में तेज़ गर्मी पड़ने की आशंका है, जिससे इन क्षेत्रों में सामान्य से लगभग 2-4 दिन अधिक लू चलने की संभावना है.

मई के दूसरे (8-14 मई) और चौथे (22-28 मई) सप्ताह में तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहने की संभावना है, जिससे उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पूर्वी तट में लू चल सकती है. इस खतरे को देखते हुए भारत मौसम विभाग ने सभी प्रभावित होने वाले राज्यों को हीट वेव एडवाइजरी जारी कर चुका है.

इसके अलावा मॉनसून सीजन (जून से सितम्बर, 2026) के दौरान देश के कुछ संवेदनशील इलाकों में बाढ़ संकट की भी संभावना है.  

अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने Heat Wave और बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए रविवार को बड़ी बैठक बुलाई है.

गृह मंत्रालय के मुताबिक,

“बैठक के दौरान गृह मंत्री केंद्र सरकार की एजेंसियों की तैयारियों का आकलन करेंगे. साथ ही, किसी भी प्रकार की जनहानि न हो और संपत्ति को कम से कम नुकसान पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, संसाधनों की तैनाती और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की समीक्षा करेंगे. पूरे देश में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए किए जा रहे दीर्घकालिक उपायों की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी. इसके साथ ही, केन्द्रीय गृह मंत्री पिछले वर्ष आयोजित की गई समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन की भी जानकारी लेंगे, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और विभिन्न गतिविधियों का त्वरित एवं समन्वित निष्पादन हो सके.”

गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस नोट के मुताबिक, इस उच्च-स्तरीय बैठक में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी जिसमें चार प्रमुख हैं:

– उन्नत प्रौद्योगिकी और ‘real-time’ डेटा एकीकरण के माध्यम से बाढ़ के पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ़ बनाना.

– एक साथ आने वाली आपदाओं, विशेष रूप से बाढ़ और Heat Wave जैसी चुनौतियों से निपटने की तैयारियों को बढ़ाना.

– जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोकने के लिए सामुदायिक जागरूकता और resilience-building कार्यक्रम चलाना.

– आवश्यक राहत सामग्री का पर्याप्त भंडार और चिकित्सा संबंधी तैयारियों को सुनिश्चित करना.
इनपुट- हिमांशु शेखर मिश्रा



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