‘मैं हिंसा का समर्थक नहीं, लेकिन…’ TMC सांसद सियानी घोष का सिर काटने का कहने वाले चैयरमेन NDTV से बोले

'मैं हिंसा का समर्थक नहीं, लेकिन...' TMC सांसद सियानी घोष का सिर काटने का कहने वाले चैयरमेन NDTV से बोले 'मैं हिंसा का समर्थक नहीं, लेकिन...' TMC सांसद सियानी घोष का सिर काटने का कहने वाले चैयरमेन NDTV से बोले

Sayanie Ghosh Controversy: “मैं हिंसा का समर्थक नहीं, लेकिन…” इस आधे-अधूरे तर्क के साथ बुलंदशहर के सिकंदराबाद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन डॉ. प्रदीप दीक्षित का विवादित बयान अब सुर्खियों में है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सायोनी घोष के खिलाफ दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस मामले में दीक्षित ने न सिर्फ बयान दिया, बल्कि सिर काटकर लाने वाले को इनाम तक घोषित कर दिया.

(बुलंदशहर से जीशान अली की रिपोर्ट)

विवादित बयान से मचा हड़कंप

सिकंदराबाद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन डॉ. प्रदीप दीक्षित ने एक कार्यक्रम के दौरान TMC

NDTV से बातचीत में दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद डॉ. दीक्षित ने NDTV से बातचीत में अपने बयान पर सफाई दी. उन्होंने कहा, “मैं हिंसा का समर्थक नहीं हूं, लेकिन ऐसी प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक होती हैं.” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी को भी धार्मिक भावनाओं को आहत करने का अधिकार नहीं है. अपनी बात रखते हुए उन्होंने खुद को शिवभक्त बताया और कहा कि वह अपने बयान पर आज भी कायम हैं.

धार्मिक भावनाओं का दिया हवाला

डॉ. प्रदीप दीक्षित ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि जब किसी धर्म या देवी-देवताओं का अपमान होता है, तो समाज में आक्रोश स्वाभाविक है. उनका कहना है कि यदि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी तो इस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती रहेंगी.

पदयात्रा के दौरान दिया गया बयान

यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब सिकंदराबाद में हिंदू संगठनों द्वारा देवी-देवताओं के अपमान के विरोध में एक बड़ी पदयात्रा निकाली जा रही थी. यह पदयात्रा करीब 3100 किलोमीटर लंबी बताई जा रही है. इसी दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में मंच से संबोधित करते हुए डॉ. दीक्षित ने यह विवादित बयान दिया.

सायोनी घोष के पोस्ट से जुड़ा विवाद

दरअसल, यह विवाद पश्चिम बंगाल की TMC सांसद सायोनी घोष के एक कथित आपत्तिजनक पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें भगवान शिव और शिवलिंग को लेकर टिप्पणी की गई थी. इसी के विरोध में कई जगहों पर प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, और बुलंदशहर में हुई यह घटना उसी कड़ी का हिस्सा है. 




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