Buddha Purnima: 30 अप्रैल या 1 मई…बुद्ध पूर्णिमा कब है? जानें सही तिथि और स्नान-दान का शुभ समय

Buddha Purnima: 30 अप्रैल या 1 मई...बुद्ध पूर्णिमा कब है? जानें सही तिथि और स्नान-दान का शुभ समय Buddha Purnima: 30 अप्रैल या 1 मई...बुद्ध पूर्णिमा कब है? जानें सही तिथि और स्नान-दान का शुभ समय

Buddha Purnima Date: हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विषेश महत्व है. खासकर वैशाख महीने की पूर्णिमा का दिन हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के लिए खास महत्व रखता है. इसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था. वहीं, हिंदू धर्म की वैष्णव परंपरा के अनुसार, भगवान बुद्ध को श्रीहरि विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है. अब, साल 2026 में बुद्ध पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं इस साल बुद्ध पूर्णिमा कब है, साथ ही जानेंगे बुद्ध पूर्णिमा पर स्नान-दान का शुभ समय क्या रहने वाला है. 

कब है बुद्ध पूर्णिमा 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल 2026 को रात 9:13 बजे शुरू होगी. इसका समापन 1 मई 2026 को रात 10:52 बजे होगा. चूंकि व्रत और पूजा उदया तिथि के आधार पर की जाती है, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा 1 मई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी.

स्नान, दान और पूजा के शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा के दिन किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल मिलता है. वहीं, शुभ मुहूर्त में करने पर इन कर्मों का फल और अधिक बढ़ जाता है. इस बार बुद्ध पूर्णिमा पर कई शुभ योग बन रहे हैं. जैसे-  

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:15 से 04:58 तक रहेगा
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:52 से दोपहर 12:45 तक रहेगा
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:31 से 03:24 तक रहेगा
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:55 से 07:17 तक रहेगा
  • अमृत काल: शाम 06:56 से 08:41 तक रहेगा
  • निशिता मुहूर्त: रात 11:57 से 12:39 (2 मई) रहेगा.

आप इन समय में स्नान और दान कर सकते हैं. 

यह भी पढ़ें- केदारनाथ शिवलिंग त्रिभुज क्यों है? केदारनाथ शिवलिंग की कहानी क्या है, यहां जान‍िए

इन सब से अलग इस दिन भद्रा सुबह 05:41 से 10:00 बजे तक रहेगी, लेकिन इसका प्रभाव पृथ्वी लोक पर नहीं माना जाएगा. इसलिए पूजा और दान के कार्य बिना किसी चिंता के किए जा सकते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन स्नान, व्रत और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. यह दिन आत्मशुद्धि और शांति का प्रतीक भी माना जाता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

 




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *