EXCLUSIVE: ‘लंगड़ा’ के इशारों पर हुआ पहलगाम नरसंहार, पाकिस्तान से चला पूरा ऑपरेशन, NIA चार्जशीट में बड़े खुलासे

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नई दिल्ली:

कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले को लेकर NIA की चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, जिनसे साफ संकेत मिलता है कि पूरी साजिश पाकिस्तान में बैठकर रची गई. जांच में सामने आया है कि लश्कर और TRF का आतंकी साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ लाहौर से पूरे ऑपरेशन को रिमोट कंट्रोल कर रहा था.

‘लंगड़ा’ निकला मास्टरमाइंड

NIA ने अपनी चार्जशीट में सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ को इस हमले का मुख्य आरोपी नंबर-1 बताया है. एजेंसी के मुताबिक, वह पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर आतंकियों को लगातार निर्देश दे रहा था. जांच में पहली बार उसकी पहचान भी पुख्ता हुई है. चार्जशीट में शामिल तस्वीर की पहचान उसके कश्मीर में रहने वाले बेटे से करवाई गई, जिसने पुष्टि की कि वही उसका पिता है. NIA इसे बेहद अहम सबूत मान रही है, जिससे उसके नेटवर्क और मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि होती है.

कौन है साजिद जट्ट

साजिद जट्ट पाकिस्तान के कसूर का रहने वाला है और 2005 में घुसपैठ कर कश्मीर पहुंचा था. कुलगाम समेत दक्षिण कश्मीर में उसने अपना नेटवर्क तैयार किया, स्थानीय युवाओं का ब्रेनवॉश किया और OGW (Over Ground Workers) का मजबूत तंत्र खड़ा किया. 2005 से 2007 के बीच वह कश्मीर में रहा, स्थानीय महिला से शादी की और बाद में पाकिस्तान भाग गया. NIA के मुताबिक, गोली लगने के कारण उसकी एक टांग खराब हो गई, जिसके चलते वह नकली टांग इस्तेमाल करता है, इसी वजह से उसे ‘लंगड़ा’ कहा जाता है.

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TRF खड़ा करने में अहम भूमिका

जांच एजेंसी का कहना है कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद लश्कर-ए-तैयबा ने अपनी रणनीति बदली और TRF (The Resistance Front) नाम के फ्रंट संगठन को आगे किया. साजिद जट्ट ने इस संगठन को खड़ा करने, सोशल मीडिया नेटवर्क बनाने और जमीन पर मॉड्यूल तैयार करने में अहम भूमिका निभाई. यही संगठन घाटी में टारगेट किलिंग और बड़े हमलों में शामिल रहा है.

हमले की पूरी साजिश

चार्जशीट के मुताबिक, पहलगाम हमला पहले से प्लान किया गया ऑपरेशन था.

15-16 अप्रैल: साजिद ने तीन आतंकियों- फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब उर्फ छोटू और हमजा अफगानी को बैसरन घाटी की रेकी के लिए भेजा. इलाके की सुरक्षा और टूरिस्ट मूवमेंट का पूरा खाका तैयार किया गया

हमले के दिन: लाहौर से रियल-टाइम में लोकेशन और निर्देश दिए गए.

NIA के अनुसार, आतंकियों की हर मूवमेंट, हमला, छिपने की जगह और भागने का रास्ता सब कुछ पाकिस्तान से तय हो रहा था.

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लोकल नेटवर्क की बड़ी भूमिका

चार्जशीट में दो स्थानीय लोगों- परवेज और बशीर अहमद की भूमिका भी सामने आई है. जांच के मुताबिक, 21 अप्रैल को आतंकी जंगल के रास्ते पहलगाम पहुंचे और इन दोनों ने उन्हें शरण दी. आतंकियों को खाना, पानी और ठहरने की जगह दी गई. करीब 5 घंटे तक झोपड़ी में छिपाए रखा गया. जाते वक्त 10 रोटियां, सब्जी और जरूरी सामान भी दिया गया. NIA का कहना है कि दोनों को यह पता था कि वे आतंकी हैं, बावजूद इसके उन्होंने मदद की.

हमले से पहले भी मौका था

22 अप्रैल को परवेज और बशीर ने उन्हीं आतंकियों को फिर बैसरन पार्क के पास देखा, लेकिन उन्होंने पुलिस को सूचना नहीं दी. जांच एजेंसी का कहना है कि अगर समय रहते जानकारी दी जाती, तो 26 लोगों की जान बचाई जा सकती थी.

फॉल्स फ्लैग साजिश का पर्दाफाश

हमले के बाद TRF ने ‘Kashmir Fight’ टेलीग्राम चैनल के जरिए जिम्मेदारी ली, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने पर पीछे हट गया और चैनल हैक होने का दावा किया. NIA की जांच में सामने आया कि ‘Kashmir Fight’ चैनल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा से संचालित हो रहा था. इसके अलावा दूसरा चैनल रावलपिंडी से ऑपरेट हो रहा था. एजेंसी के मुताबिक, यह पाकिस्तान की सोची-समझी False Flag साजिश थी.

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पाकिस्तान कनेक्शन के ठोस सबूत

मारे गए आतंकियों से बरामद मोबाइल फोन की जांच में भी बड़ा खुलासा हुआ. एक फोन लाहौर से खरीदा गया था, तो दूसरा कराची से. NIA का कहना है कि ये सबूत साबित करते हैं कि आतंकियों को न सिर्फ पाकिस्तान से निर्देश मिल रहे थे, बल्कि पूरी साजिश भी वहीं रची गई थी.

NIA की चार्जशीट ने साफ कर दिया है कि पहलगाम हमला कोई स्थानीय घटना नहीं, बल्कि सीमा पार से संचालित सुनियोजित आतंकी ऑपरेशन था. ‘लंगड़ा’ जैसे मास्टरमाइंड के जरिए पाकिस्तान से चल रहा यह नेटवर्क अभी भी सक्रिय है, जिसे खत्म करना सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है.




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