NDTV के लेखों पर तत्काल रोक से दिल्ली HC का इनकार, अनिल अंबानी की अर्जी पर दिया प्रेस की आजादी का हवाला

NDTV के लेखों पर तत्काल रोक से दिल्ली HC का इनकार, अनिल अंबानी की अर्जी पर दिया प्रेस की आजादी का हवाला NDTV के लेखों पर तत्काल रोक से दिल्ली HC का इनकार, अनिल अंबानी की अर्जी पर दिया प्रेस की आजादी का हवाला

प्रेस की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए , दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को उद्योगपति अनिल अंबानी से जुड़े सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) मामलों की रिपोर्टिंग के संबंध में एनडीटीवी (NDTV) के खिलाफ कोई भी तत्काल प्रतिबंधात्मक आदेश पारित करने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि ऐसा करने से पहले संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और अभिव्यक्ति की आजादी के मौलिक अधिकार से संबंधित मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श जरूरी है.

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने मानहानि के एक केस में अंतरिम रोक लगाने की अंबानी की याचिका पर NDTV और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 के लिए तय की है. अंबानी ने इस मीडिया संस्थान से 2.1 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है.

केस में आरोप लगाया गया है कि NDTV और उससे जुड़ी संस्थाओं ने पिछले आठ महीनों में 72 लेख प्रकाशित करके एक अभियान चलाया. इन लेखों में अंबानी को रिलायंस ADA ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ चल रही जांचों से सीधे तौर पर जोड़ा गया था. अंबानी के वकील ने दलील दी कि इन रिपोर्टों में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया. ताकि उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सके. इसके अलावा यह भी कहा गया कि अब NDTV में अडानी ग्रुप की बहुसंख्यक हिस्सेदारी है.

हालांकि, कोर्ट ने पत्रकारिता से जुड़े कामों में दखल देने के लिए एक बहुत ऊंचा पैमाना तय किया. सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रसाद ने कहा कि खबर और राय के बीच एक अंतर होता है. उन्होंने कहा कि वादी को यह साबित करना होगा कि रिपोर्टें इतनी गलत थीं कि उन पर रोक लगाना जरूरी है.

सुनवाई की पहली तारीख पर ही इनजंक्शन आदेश पारित करने से इनकार करते हुए, न्यायमूर्ति प्रसाद ने टिप्पणी की: ‘अनुच्छेद 19(1)(a)… मैंने इस तरह के आदेश पारित किए हैं, लेकिन पहली ही तारीख पर नहीं. मैंने कम से कम 8 सुनवाई की हैं.’ अदालत ने संकेत दिया कि प्रकाशन रोकने वाले आदेश आमतौर पर विस्तृत सुनवाई के बिना पारित नहीं किए जा सकते. हालांकि पीठ ने एक स्तर पर यह भी कहा कि “कुछ सामूहिक जिम्मेदारी भी होती है,” लेकिन अंततः दोहराया कि प्रकाशन पर रोक के मामलों में संवैधानिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण शामिल है और इसके लिए सावधानीपूर्वक जांच की आवश्यकता है.

मीडिया हाउस को सुने बिना अंतरिम रोक लगाने से इनकार करके, अदालत ने इस सिद्धांत को रेखांकित किया कि जनता को सूचित करने का अधिकार संवैधानिक ढांचे के तहत तब तक सुरक्षित रहता है जब तक कि मामले के गुण-दोषों का पूरी तरह से मूल्यांकन नहीं हो जाता.

(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)




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