PM Modi Gold Appeal: भारतीय घरों में सोना सिर्फ गहनों की चीज नहीं है, बल्कि हमारी परंपरा और भावनाओं से जुड़ा हुआ है. शादी हो, त्योहार हो या कोई शुभ मौका, सोने के बिना खुशी अधूरी लगती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारी यही आदत देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर डालती है. देश को बड़ी मात्रा में सोना बाहर से मंगाना पड़ता है, जिससे खजाने पर बोझ बढ़ता है. ऐसे समय में, जब मिडिल ईस्ट में टेंशन बनी हुई है और हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं, पीएम मोदी ने लोगों से बड़ी अपील की है कि वो एक साल तक सोना ना खरीदें, जिससे देश की आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद मिल सके.
PM Modi On Gold: Avoid Purchasing Gold For A Year pic.twitter.com/Pu1roYaqRm
— NDTV Profit (@NDTVProfitIndia) May 10, 2026
देश की गुल्लक के जरिए समझें पूरा मामला
देश के पास एक गुल्लक की तरह विदेशी मुद्रा भंडार होता है, जिससे हम बाहर से जरूरी चीजें खरीदते हैं. जब हम विदेशी सोना खरीदते हैं, तो इस गुल्लक से डॉलर बाहर चले जाते हैं. अब अगर भविष्य में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा और कच्चा तेल महंगा हो गया, तो उसी गुल्लक के डॉलर हमें तेल खरीदने के लिए चाहिए होंगे. इसी वजह से पीएम मोदी सलाह दे रहे हैं कि भारत के नागरिक एक साल तक सोना खरीदने से बचें.
चलिए, ये बात तो आपके समझ आ गई होगी. अब जरा अपने देश में मौजूद सोने, विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति जान लीजिए.
कितनी है भारत के पास विदेशी मुद्रा?
किसी देश की आर्थिक मजबूती का अंदाजा उसके विदेशी मुद्रा भंडार से लगाया जाता है. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के वीकली डेटा के अनुसार, 1 मई 2026 को खत्म हुए हफ्ते में भारत का फॉरेक्स रिज़र्व $7.8 बिलियन घटकर $690.69 बिलियन रह गया. वजह साफ है मिडिल ईस्ट में वॉर के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हुआ. नतीजन कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गईं. देश की जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार ने महंगे दामों में कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदा, इसके लिए बड़ी मात्रा में डॉलर से पेमेंट किया गया.
भारत के पास कितना है गोल्ड रिजर्व?
आरबीआई की फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 तक भारत के पास करीब 880.52 मीट्रिक टन सोना मौजूद है, जिसमें से करीब 680 टन सोना भारत के वॉल्ट्स में मौजूद है. करीब 197.67 टन सोना विदेश में रखा गया है. इसके अलावा करीब 2.8 टन सोना गोल्ड डिपॉजिट के रूप में है. पिछले कुछ सालों में आरबीआई ने डॉलर पर डिपेंडेंसी कम करने के लिए सोने की खरीद बढ़ाई है, जिससे ग्लोबली टेंशन के समय अर्थव्यवस्था को मजबूत रखा जा सके.
सोना खरीदने पर देश का कितना बना बिल?
देश में लोग पहले से कहीं ज्यादा सोना खरीद रहे हैं और साथ ही दुनिया भर में सोने के दाम भी तेजी से बढ़े हैं. इसी वजह से भारत को सोना विदेशों से मंगाने पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ा है. कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025‑26 में भारत ने सोने की खरीद पर करीब 24% ज्यादा खर्च किया और ये खर्च बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया. पीएम मोदी इसी समस्या की बात कर रहे हैं. जब हम सोना खरीदते हैं, तो हमें पेमेंट डॉलर में करना पड़ता है, जिससे रुपया कमजोर होता है.
भारत में लोगों के पास कितना सोना मौजूद है?
एसोचैम (Assocham) की ताजा रिपोर्ट के 2024 से लेकर 2026 की शुरुआत तक सोने की कीमतों में आए जबरदस्त उछाल ने भारतीय घरों में रखे सोने की कीमत को $5 ट्रिलियन (करीब 415 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचा दिया है. यानी इतना बड़ा अमाउंट बैंकिंग सिस्टम से बाहर है. इसके लिए देश ने डॉलर चुकाए हैं पर अर्थव्यवस्था के लिए ये किसी काम में मदद नहीं कर रहा है. इसलिए पीएम मोदी ने सभी देशवासियों से एक साल गोल्ड ना खरीदने की सलाह दी है.


