इमरान खान की आंखों की रौशनी 85 फीसदी समाप्त, रखा जाता है एकांत में… वकील ने हाईकोर्ट से रिहा करने की अपील की

इमरान खान की आंखों की रौशनी 85 फीसदी समाप्त, रखा जाता है एकांत में... वकील ने हाईकोर्ट से रिहा करने की अपील की इमरान खान की आंखों की रौशनी 85 फीसदी समाप्त, रखा जाता है एकांत में... वकील ने हाईकोर्ट से रिहा करने की अपील की

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने गुरुवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट से मानवीय और दया के आधार पर अपनी रिहाई पर विचार करने का आग्रह किया. उन्होंने लंबे समय तक एकांत कारावास और आंखों के संक्रमण का हवाला दिया. यह अपील उनके वकील सलमान सफदर के माध्यम से की गई, जब अदालत 190 मिलियन पाउंड के भ्रष्टाचार मामले में खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी.

सजा निलंबित करने की अपील

पिछले साल जनवरी में इस्लामाबाद की एक जवाबदेही अदालत ने राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) द्वारा चलाए गए भ्रष्टाचार मामले में 73 वर्षीय खान को 14 साल और बीबी को सात साल की जेल की सजा सुनाई थी. सुनवाई के दौरान, सफदर ने अदालत से सजा निलंबित करने का अनुरोध किया और तर्क दिया कि मामला 16 महीने से अधिक समय से लंबित है और अपील पर पहले ही 17 सुनवाई हो चुकी हैं, डॉन अखबार ने यह जानकारी दी. सफदर ने अदालत को खान की दृष्टि को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि उनकी दृष्टि काफी खराब हो गई है. एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने उनके हवाले से कहा, “इमरान खान की दृष्टि 85% तक कम हो गई है और अब उनकी दृष्टि 15% रह गई है.” 

आंखों को हुआ स्थायी नुकसान 

बचाव पक्ष के वकील ने दावा किया कि खान की आंख को हुआ नुकसान स्थायी प्रतीत होता है. सफदर ने अपने मुवक्किलों की हिरासत की स्थिति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “एक मुद्दा आंखों की समस्या है, और दूसरा यह कि उन्हें एकांत कारावास में क्यों रखा जा रहा है.” उन्होंने आगे बताया कि खान ने उन्हें बताया था कि उनकी एक आंख से ठीक से दिखाई नहीं देता और डॉक्टरों ने कहा है कि यह स्थिति अपरिवर्तनीय है. वकील ने अदालत को बताया कि खान को कई बार अस्पताल ले जाया गया है और अडियाला जेल में ऐसी उपचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं.

जज ने पूछा जल्दी फैसला क्यों नहीं चाहते

सफदर ने कहा, “मामला अब इस हद तक बढ़ गया है कि हम जेल महानिरीक्षक, अधीक्षक और उप अधीक्षक को तलब करने की मांग कर रहे हैं.” उन्होंने अदालत से अस्पताल को संपूर्ण चिकित्सा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का आदेश देने का भी अनुरोध किया. सफदर ने कहा कि बुशरा बीबी भी इस मामले से प्रभावित हैं, और बताया कि उन्हें “फैसले के समय गिरफ्तार किया गया था”. आईएचसी के मुख्य न्यायाधीश सरफराज डोगर ने सफदर से पूछा कि वह मुख्य अपील पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं, यह देखते हुए कि इसका निपटारा शीघ्र किया जा सकता है. डोगर ने कहा कि अपीलों की सुनवाई नियमित रूप से हो रही है और बहस की तारीख तय होने पर जल्दी फैसला हो सकता है. हालांकि, सफदर ने जोर देकर कहा कि निलंबन आवेदनों पर पहले फैसला होना चाहिए.

कोर्ट ने क्या फैसला किया

वकील ने पंजाब जेल आईजी और अस्पताल अधिकारियों को, साथ ही संपूर्ण मेडिकल रिकॉर्ड को तलब करने के अपने अनुरोध को दोहराया.  बाद में सुनवाई स्थगित कर दी गई. भ्रष्टाचार का यह मामला अल-कादिर ट्रस्ट से जुड़े आरोपों से संबंधित है, जो इस्लामाबाद के बाहर एक विश्वविद्यालय चलाने वाला एक कल्याणकारी संगठन है. आरोप है कि इस ट्रस्ट का इस्तेमाल एक रियल एस्टेट टाइकून से लाखों डॉलर की जमीन प्राप्त करने के लिए एक दिखावे के तौर पर किया गया था. एनएबी के अनुसार, ये दान पूर्व प्रधानमंत्री के प्रशासन द्वारा यूनाइटेड किंगडम से वापस लाए गए धन का उपयोग व्यवसायी की ओर से जुर्माना भरने के लिए करने के बदले में दिए गए थे, न कि राष्ट्रीय खजाने में जमा करने के लिए. खान ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि न तो उन्हें और न ही उनकी पत्नी को ट्रस्ट या संबंधित लेन-देन से कोई वित्तीय लाभ हुआ है.

ये भी पढ़ें-

कंगाली में जजों और अफसरों की पत्नियों ने किया प्लॉट स्कैम तो IMF पर भड़का पाकिस्तान




Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *